साल भर गिनते रहेंगे पैसे, लगा दें दाल वाली ये फसल, बारिश का भी नहीं रहेगा इंतजार
कम पानी में होती है बंपर पैदावार, गर्मी के मौसम में करें उड़द की खेती, कुछ ही महीने में खटाखट गिनेंगे नोट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 30, 2026 at 3:49 PM IST
|Updated : June 30, 2026 at 4:33 PM IST
शहडोल: अल नीनो के प्रभाव से इस बार कम बारिश का अनुमान लगाया गया है, जिसे लेकर किसान चिंतित हैं और जून का महीना वैसे ही ज्यादातर सूखा ही गया है. माह के आखिरी के कुछ दिनों में जरूर बारिश शुरू हुई है, ऐसे में उड़द की खेती करके इस बार किसान अच्छी खासी आय हासिल कर सकते हैं. क्योंकि उड़द को कम पानी की जरूरत होती है, ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती और यह मार्केट में हाथो-हाथ अच्छे दाम के साथ बिक भी जाती है.
उड़द की खेती क्यों खास, कहां करें ?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं कि "उड़द की खेती बेहतर खेती होती है इसमें न तो ज्यादा पानी की जरूरत होती है न ही ज्यादा देखरेख की जरूरत होती है और कम लागत में यह अच्छी पैदावार देने वाली फसल होती है.
उड़द की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी बहुत ही बेहतर मानी जाती है. इसका पीएच मान 6.5 से 7.8 के बीच होना चाहिए. जहां उड़द की फसल लगाना चाहते हैं वहां कोशिश करें कि वो जगह ऐसी हो, जहां जल जमा न होता हो, क्योंकि ज्यादा पानी इस फसल को गला भी देता है, इसके लिए गर्म और आर्द्र जलवायु बेहतर मानी जाती है."

कैसे करें उड़द की खेती ?
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं उड़द की खेती के लिए सबसे पहले तो खेत की कल्टीवेटर से पहले अच्छी तरह से जुताई कर दें. फिर इसके बाद अगर उसमें घास दिखती है तो रोटावेटर चलवा दें जिससे घास भी पूरी तरह से कट जाए और मिट्टी भी समतल हो जाए और भुर भुरी हो जाए. फिर बुवाई करके हल्का पाटा चला दें, जिससे दाना मिट्टी से ढक जाए. खरीफ के सीजन में इस फसल की बुवाई का जो बेस्ट समय होता है वह जून के आखिरी महीने से लेकर जुलाई के मध्य तक होता है.
15 से 17 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर लगता है
बीज दर की बात करें तो खरीफ सीजन में अगर आप इसकी खेती कर रहे हैं तो 15 से 17 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. बीज बोने से पहले अच्छी तरह से बीज को उपचारित कर लें. इसके लिए जैविक और रासायनिक दोनों तरह के ऑप्शन आते हैं, किसी से भी बीज को उपचारित कर सकते हैं. इसकी बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें.
खाद और सिंचाई
जहां तक खाद और सिंचाई की बात है तो वैसे तो हर फसल के लिए खाद की जरूरत होती है, तो कोशिश करें कि अगर सड़े हुए गोबर की खाद मिल जाए तो पूरे खेत में अच्छी तरह से फैला दें और ज्यादा से ज्यादा सड़े हुए गोबर की खाद डालें, जिससे कार्बन की मात्रा अच्छी बनी रहे. ऐसे में ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ेगी और वैसे भी यह दलहनी फसल है नाइट्रोजन की आवश्यकता इसमें कम होती है. इसमें थोड़ी बहुत नाइट्रोजन फास्फोरस सल्फर का छिड़काव कर सकते हैं.

सिंचाई और खाद की जहां तक बात है तो सिंचाई की आवश्यकता इसमें बरसात के सीजन में तो वैसे भी कम पड़ती है, क्योंकि बारिश होती रहती है और इसे कम पानी की आवश्यकता भी होती है. 10 से 15 दिनों के अंतराल पर इसे चार से पांच सिंचाई की जरूरत होती है. कोशिश करें कि फूल आते समय और फली बनते समय खेत में नमी जरूर बनी रहे.
ये भी पढ़ें:
- उड़द मूंग में कर दें बस एक छोटा सा काम, फिर देखें कमाल, छप्पर फाड़ होगी पैदावार
- जायद में लगा दें दाल की दो फसल, मेहनत कम और पैसा अधिक, मिट्टी भी बनेगी ऊपजाऊ
खरपतवार नियंत्रण के लिए भी आजकल बहुत से ऑप्शन आने लग गए हैं. मार्केट में कई दवा आती हैं तो खरपतवार को खत्म कर सकती हैं. इसके लिए अपने जिले के कृषि एक्सपर्ट या कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं.

रोग से बचाव के लिए फसल की निगरानी करें
इसमें जहां तक रोग की बात है तो पीला मोजेक वायरस जो की सफेद मक्खी के कारण फैलता है इसको मैनेज करना होता है. इसके अलावा फली भेदक जो फलियों को नुकसान पहुंचाने वाली इल्लियां होती हैं इन्हें कंट्रोल करना होता है. इसके लिए सतत फसलों का निरीक्षण करते रहें और अगर इस तरह के कुछ लक्षण लगें तो दवा का छिड़काव करें.
किसानों के लिए कैश क्रॉप है उड़द
अगर सही वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करते हैं, अच्छी पैदावार होती है और किसी तरह की आपदा नहीं आती है, तो प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल तक इसकी पैदावार ले सकते हैं. वैसे भी उड़द एक ऐसी फसल है जिसकी डिमांड हमेशा मार्केट में बनी रहती है और यह अच्छी कीमत देकर जाती है. इसीलिए किसानों के लिए इसे कैश क्रॉप भी कहा जाता है.

