शहडोल का रेनफॉरेस्ट बॉडीगार्ड! न जमीन न सरकारी बजट, खड़ा किया 1000 पेड़ों का जंगल
पर्यावरण की अनोखी मिसाल बने शहडोल के मुकेश केवट, डेढ़ दशक में हजार पेड़ लगाए, पेड़ काटने पर वसूलते हैं जुर्माना. अखिलेश शुक्ला की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 27, 2026 at 12:49 PM IST
|Updated : June 27, 2026 at 2:09 PM IST
शहडोल: बरसात के मौसम के साथ ही पेड़ लगाने की शुरुआत भी हो जाएगी. आज हम एक ऐसे युवा के बारे में बताने जा रहे हैं जो सिर्फ पौधे लगाता ही नहीं, बल्कि नर्सरी तैयार करके दूसरे लोगों को भी पौधे लगाने के लिए देता है. लंबा अरसे से युवक लगातार पेड़ लगा रहा है और लोगों को प्रेरित भी कर रहा है. अब युवा का यही शौक उसे चर्चाओं में ला दिया है. अब लोग उसे युवा ट्री मैन के नाम से जानने लगे हैं.
कौन है युवा ट्री मैन?
शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर है गोहपारू ब्लॉक. उसी के अंतर्गत आता है देवी नंबर दो गांव. जहां के रहने वाले हैं मुकेश केवट जिनकी उम्र 35 साल है. वैसे तो मुकेश अपने घर का गुज़ारा कारपेंटर और इलेक्ट्रिशियन का काम करके करते हैं. लेकिन उनके पेड़ लगाने के प्रेम को देखकर अब लोग उन्हें ट्री मैन के नाम से जानने लगे हैं. क्योंकि उन्होंने करीब डेढ़ दशक में ही 1000 से भी ज्यादा पेड़ लगा दिए हैं.
मुकेश केवट की खास बात यह है कि वो पेड़ लगाते ही नहीं हैं, बल्कि उसे बड़ा होने तक उसकी देखरेख भी करते हैं. अगर कोई बड़े वृक्ष को काटता है तो उस पर गांव वालों से जुर्माना भी लगवा देते हैं. मुकेश को ट्री मैन इसलिए भी कहने लगे हैं क्योंकि वो नर्सरी खुद घर पर तैयार करते हैं. अगर कोई पेड़ लगाना चाहता है और वादा करता है कि वह उसकी सुरक्षा करेगा तो उसे वो फ्री में पौधा भी देते हैं. इसीलिए अब लोगों के बीच उनकी पहचान ट्री मैन के नाम से बनने लगी है.

कौन-कौन से पेड़ लगाए, कहां लगाए?
मुकेश केवट बताते हैं कि, ''उन्होंने अब तक कई छायादार फलदार और इमारती लकड़ियों के पेड़ लगाए हैं. वो कदम, करंज, नीम, पीपल, बरगद, अशोक, गुलमोहर, आम, जामुन, खजूर, महुआ, सागौन, चंदन ऐसे कई पेड़ लगा चुके हैं. लगातार इनकी नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं और जो लगाना चाहता है उसे देते भी हैं.''
मुकेश केवट बताते हैं कि, ''उनके पास बहुत ज्यादा जमीन नहीं है, इसलिए वो सरकारी परिसरों में, जैसे स्कूल, आंगनबाड़ी, तालाब के किनारे, सड़कों के किनारे, चौराहों के आसपास और जहां उन्हें जगह मिलती है, वहां पेड़ लगाते हैं. इसके लिए उन्होंने एक नियम बनाया है, जब कभी कोई बेहतर दिन होता है या तिथि होती है, उनका जन्मदिन होता है या उनके किसी खास का जन्मदिन होता है तो पौधारोपण करते हैं. उस वृक्ष की सतत सेवा करते हैं. गर्मियों के समय में जब उन्हें विशेष सुरक्षा और देखरेख की जरूरत होती है तब उनका ख्याल रखते हैं. साथ ही मवेशियों से बचाने की व्यवस्था भी करते हैं.''

अब तक कितने पेड़ तैयार
मुकेश बताते हैं कि, ''उन्होंने 2010- 11 से पेड़ लगाना शुरू किया था. अब तक एक हज़ार से भी ऊपर पेड़ लगा चुके होंगे.'' मुकेश का दावा है कि, ''300 से ऊपर पेड़ तो ऐसे हो गए हैं, जिसे उन्होंने बड़ा कर दिया है. अब ये अलग-अलग गांवों में छाया और फल दे रहे हैं. उनके लगाए पौधे देवरी नंबर दो के अलावा देवदहा, करुआ, पैलवाह, बोचकी गांव में भी लगाए हैं. मतलब वो आसपास के गांव में भी वृक्षारोपण करते रहते हैं.
उन्होंने एक नियम भी बनाया है कि, अगर कोई उनके लगाए हुए पेड़ों को काट देता है, तो उस पर जुर्माना भी लगवाते हैं. कुछ दिन पहले उनके द्वारा तैयार किए गए एक कदम के पेड़ को किसी ने काट दिया था, तो उन्होंने गांव की पंचायत में अपनी बात रखी और संबंधित व्यक्ति से ₹5000 का जुर्माना वसूल किया. इसके अलावा भी वो कई लोगों पर जुर्माना लगवा चुके हैं. मुकेश कहते हैं कि, ''उनके लगाए हुए कदम के पेड़ की कुछ डगाल को किसी ने काटा था, जिसके बाद उन्होंने उस पेड़ की सुरक्षा की, आज कदम का पेड़ पूरी तरह से तैयार हो चुका है.''

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पेड़ लगाना क्यों शुरू किया?
मुकेश बताते हैं कि, ''उन्होंने पेड़ लगाने का सिलसिला कुछ यूं ही शुरू नहीं किया. पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से वह कक्षा 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं कर सके. लेकिन वह चाहते थे कि समाज में उनका नाम सम्मान से लिया जाए, उनकी एक अलग पहचान हो, वो रहे या ना रहे लोग उन्हें याद करें. इसके लिए उन्होंने काफी मंथन के बाद सोचा कि अगर वो जगह-जगह कई सारे पेड़ लगाते हैं, तो लोगों के बीच हमेशा याद किए जाएंगे.
मुकेश केवट बताते हैं कि, ''जब वो कई सारे पेड़ तैयार कर देंगे, तो लोग जब पेड़ों की छाया के नीचे बैठेंगे या उस पेड़ के फल को खाएंगे तो एक बार उन्हें जरूर याद करेंगे. इसी मकसद के साथ वो लगातार वृक्षारोपण कर रहे हैं. लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं.'' मुकेश का मानना है कि, ''पेड़ ही उन्हें एक अलग पहचान दे सकते हैं, और इसीलिए लोग अब उन्हें ट्री मैन के नाम से जानने भी लगे हैं.''
फिर शुरू की पढ़ाई, मिशन में आई गति
जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक विवेक पांडे बताते हैं कि, ''मुकेश जन अभियान परिषद से भी जुड़े हुए हैं और इससे जुड़कर समाजिक कार्य की पढ़ाई भी कर रहे हैं. साथ ही उनकी संस्था वीर सावरकर सेवा संस्थान नवांकुर योजना में भी जुड़कर कार्य कार्य करती है, जिससे पौधारोपण की प्रक्रिया में उनके और तेजी आई है. मुकेश हर तरह के विशेष दिन तिथि में पौधारोपण पर फोकस करते हैं. अभी हाल ही में पर्यावरण दिवस पर उन्होंने फिर पौधारोपण किया है और एक नर्सरी भी तैयार की है, जिससे लोगों को निशुल्क पौधे बांटने का उनका प्लान है.''

