अंगारों की तरह दिख रहे पलाश के पेड़, इनमें है कई मर्जों की दवा, आयुर्वेद में खास महत्व
शहडोल में फूलों से सज गए हैं पलाश के पेड़, छाल से लेकर गोंद तक आयुर्वेद में आते हैं काम, फूलों का रंग भी खास.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 8:41 AM IST
शहडोल: प्रकृति ने हमें कई ऐसी अद्भुत और चमत्कारी चीजें दी हैं, जिसके बारे में सिर्फ जानने की जरूरत है. इनमें से एक है पलाश. इन दिनों खेतों में जंगलों में पलाश के पेड़ों पर मनमोहक फूल खिले हुए हैं, जो प्रकृति की अद्भुत खूबसूरती को दिखा रहे हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि पलाश का पूरा पेड़, छाल, फूल और गोंद सभी का आयुर्वेद में विशेष महत्व है. इसकी काफी डिमांड भी है, कई मर्जों की दवा के रूप में काम आता है.
पलाश है खास, कई मर्जों की दवा
आयुर्वेद के डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि "पलाश का डिस्क्रिप्शन सुश्रुत संहिता में बहुतायत में आया है. इस पेड़ की छाल, गोंद और पेड़ के मुख्य तौर पर जो फूल हैं, इसका डिस्क्रिप्शन काफी बार आचार्य सुश्रुत ने किया है. इसके फल के जो बीज होते हैं, उसको डिवर्मिंग के लिए या क्रिमिनाशन के लिए उपयोग में लाया जाता है. बात करें इसके फूल की तो इसके फूल का जो सूखा चूर्ण है, वो स्किन के डिस्कलरेशन में काफी काम आता है. जहां पर रंग थोड़ा विचित्र हो गया हो वहां पर लेप करने से इससे काफी फायदा मिलता है."
छाल का भी विशेष महत्व
आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि इसकी छाल का पाउडर महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में बहुत काम आता है. छाल का काढ़ा पीने से मासिक धर्म सही समय पर आने लग जाता है.
बच्चों के लिए भी है खास
बच्चों में खास तौर पर जो पाइल्स की समस्या होती है, उसमें इसका निर्यास या इसकी गोंद काफी कारगर है. इसके जो पंचांग का छार बनता है वो स्त्री रोग में भी काफी लाभप्रद होता है.

कैसे बनाएं पलाश का क्षार
आयुर्वेद डॉक्टर बताते हैं कि पलाश के जो छोटे पौधे होते हैं उसके पंचांग को जला लिया जाता है. जलाने के बाद में उसकी जो राख होती है उसे पानी में घोल लिया जाता है. रात भर के लिए इसे छोड़ दिया जाता है, अगले दिन वो जो पानी होता है, उस पानी को बढ़िया से छान कर उसको गर्म किया जाता है. बहुत समय तक गर्म करने के बाद में जो काला द्रव्य प्राप्त होता है, उसको ही क्षार बोलते हैं.
क्षार का अर्थ होता है क्षरण करना और क्षरण का मतलब होता किसी भी कैनाल को या किसी भी ट्यूब की सफाई करना या किसी भी चीज को स्क्रैप आउट करना. क्षार जो होता है वो ऑब्स्ट्रक्टिव डिजीज जो होते हैं जहां पर भी मार्ग अवरोध के कारण समस्याएं होती है, वहां पर ये विशेष रूप से काम करता है.

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पलाश के फूलों का रंग है खास

अगर पलाश के फूलों का होली में कलर बनाया जाता है, तो पहली बात तो ये है कि ये नेचुरल है. ये नुकसान नहीं करेगा और खास तौर पर अगर पलाश की बात करें तो इसके फूलों का जो चूर्ण बनता है वह सुंदर ऑरेंज कलर का होता है, जिसका उपयोग किया जा सकता है. स्किन और एलर्जी के प्रोस्पेक्टिव में गुलाल, सिंथेटिक कलर की जगह पर अगर हम हर्बल कलर उपयोग करें तो वो बेनिफिशियल होता है.

