किसान को 10 का मुनाफा, ग्राहकों को 60 रुपए की मार, ऑनियन हब से लेकर जमाखोरी तक प्याज का गणित
प्याज के बढ़े दाम ने बिगाड़ा किचन का जायका, 60 रुपए प्रति किलो पहुंचे दाम. क्यों बढ़ रहे दाम, कितना हो रहा किसानों को फायदा-नुकसान. पढ़िए प्याज की पूरी इंसाइड स्टोरी. अखिलेश शुक्ला की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 4:55 PM IST
|Updated : August 27, 2026 at 5:32 PM IST
शहडोल: सावन का महीना चल रहा है और इस महीने में ही प्याज के दाम में बढ़ोतरी हो रही है. जो अब लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं. क्योंकि प्याज एक ऐसी चीज है जो रसोई की अधिकतर डिश का स्वाद बढ़ाती है. अगर प्याज ही महंगा हो जाए तो इसका असर किचन पर भी देखने को मिलता है. प्याज के बढ़ते दामों से लेकर हर कोई चिंतित है. सरकार भी इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास में जुट चुकी है. प्याज के दाम आखिर क्यों बढ़ रहे हैं, प्याज के बढ़ते दामों का फायदा क्या किसानों को वास्तव में मिल पाता है या फिर किसान यहां भी ठगा जाता है. जानिए रॉकेट की गति से प्याज के बढ़ते दामों का पूरा गुणा गणित.
रॉकेट की गति से बढ़ रहे प्याज के दाम
शहडोल सब्जी मंडी में सब्जी खरीदने गई शीतल गुप्ता सब्जियों के दाम को लेकर परेशान दिखाई पड़ीं. वो कहती हैं कि, ''इन दिनों सब्जियों के दाम काफी बढ़े हुए हैं. लेकिन प्याज के दाम तो रॉकेट की गति से बढ़ रहे हैं. अभी कुछ दिन पहले ही प्याज 40 से 45 रुपए किलो था, लेकिन आज अचानक ₹60 किलो हो गया है.'' शीतल गुप्ता कहती हैं कि, ''इन बढ़े हुए दामों ने उनके किचन का बजट बिगाड़ दिया है.''
बिन प्याज खाने का स्वाद अधूरा
राजा गुप्ता शहडोल चौपाटी में अपना ठेला लगाकर चाट फुल्की चाउमीन बनाकर बेचते हैं. जब ईटीवी भारत की टीम ने उनसे बात की तो उन्होंने बताय, ''प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं.'' कैसे मैनेज करेंगे इसे लेकर राजा गुप्ता कहते हैं कि, ''देखिए प्याज की जरूरत तो हमारे व्यापार में बहुत ज्यादा है, क्योंकि हर डिश में स्वाद प्याज ही बढ़ाता है. पानी पूड़ी भी खिलाते हैं तो उसमें भी प्याज चाहिए, लोगों को हर चीज में प्याज की जरूरत होती है. दाम बढ़ भी जाएं तो प्याज की जरूरत तो पड़ेगी ही. मैनेज तो करना ही पड़ता है, क्या करें धंधा है करना तो पड़ेगा.''
15 से 60 पहुंच गए प्याज के दाम
शहडोल रेलवे सब्जी मंडी में ताजी सब्जियां लेने गए बृजेश सिरमौर बताते हैं कि, ''प्याज की बढ़ती कीमत आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है. लोगों की जेबें ढीली हो रही हैं. कुछ दिन पहले की बात करें तो मान कर चलिए 15 से 25 रुपए किलो तक प्याज का दाम था. पिछले 1 महीने में धीरे-धीरे ये 30 से ₹40 तक हुआ, और अब अचानक से ये ₹60 तक बढ़ चुका है. जो कि भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. अभी सावन चल रहा है, सावन में अभी यह रेट है तो आगे ₹100 की कीमत भी हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है.''

प्याज के दाम जान लीजिए
पिछले कई सालों से आलू प्याज का व्यापार करने वाले उपेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि, ''प्याज के दाम में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. सावन में ही जब प्याज खुले बाजार में ₹60 किलो तक पहुंच गया है तो सावन खत्म होने दीजिए सितंबर अक्टूबर में तो प्याज के दाम ₹100 किलो पार कर सकते हैं.'' हालांकि उपेंद्र कुशवाहा उम्मीद जताते हैं कि, ''जब नया प्याज आएगा तो दाम में कुछ लगाम लगेगी. लेकिन यह पूरा डिपेंड करेगा कि इस बार बरसात के प्याज का उत्पादन कैसा होता है.'' उपेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि, ''मार्केट में जितनी प्याज की जरूरत है उतना आ नहीं पा रहा है, इस वजह से प्याज के दाम में बढ़ोतरी हो रही है.''
शहडोल में पिछले कई सालों से आलू प्याज का थोक व्यापार करने वाले लखन पांडे बताते हैं कि, ''वर्तमान में थोक में 48 रुपए किलो प्याज बिक रहा है, और यही वजह है कि खुले बाजार में यह ₹60 किलो तक पहुंच गया है. अभी आगे प्याज के दाम कितने बढ़ेंगे अभी कुछ भी कयास नहीं लगाया जा सकता है. लेकिन प्याज के दाम नहीं घटेंगे, अभी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.''

क्यों बढ़ रहे प्याज के दाम ?
आखिर प्याज के दाम क्यों बढ़ रहे हैं, इसे जानने के लिए हम लोगों ने कई व्यापारियों से ये सवाल पूछा. इस पर आलू प्याज लहसुन का थोक व्यापार करने वाले लखन पांडे बताते हैं कि, ''इसकी एक ही वजह है कि प्याज किसान के हाथ से निकलकर व्यापारियों के पास पहुंच गया है, इसलिए महंगा हो गया है, क्योंकि पिछली बार स्टॉकिस्टों ने प्याज नहीं खरीदा था, जिसकी वजह से इस सीजन में प्याज का दाम काबू में था, बहुत महंगा नहीं था. लेकिन इस बार स्टॉकिस्टों ने प्याज खरीदा है. यही वजह है कि माल को उन्होंने जाम किया है और जब माल जाम हो जाता है तो दाम बढ़ने तो तय हैं. अभी तो और दाम बढ़ सकते हैं.''
आलू प्याज का व्यापार करने वाले उपेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि, ''प्याज की बढ़ती कीमतों के एक वजह यह भी है की नई फसल अभी आई नहीं है और इस पर सब की उम्मीदें टिकी हुई हैं. अगर खरीफ सीजन की नई फसल अच्छी आएगी तो इस पर लगाम लग सकता है. प्याज की पुरानी फसल खत्म हो रही है. खरीफ के नए फसल का इंतजार है. भारत में प्याज की सप्लाई को देखें तो मार्च-अप्रैल के आसपास जो फसल निकलती है वो रबी सीजन की फसल कहलाती है. वहीं देश की मुख्य स्टोरेज फसल है, और कई महीनों तक मोटे तौर पर अक्टूबर महीने तक बाजार में सप्लाई देती है. जैसे-जैसे कोल्ड स्टोरेज में रखी फसल खत्म हो जाती है, बाजार अगली फसल में आने वाली सप्लाई पर ज्यादा निर्भर हो जाता है.''
मार्च अप्रैल में स्टोर में रखी गई प्याज अक्टूबर तक सप्लाई का मुख्य जरिया होती है. इस बीच कर्नाटक तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आने वाली खरीफ प्याज की थोड़ी बहुत सप्लाई अक्टूबर में मुख्य खरीफ फसल के आने से पहले की कमी को पूरा करने मदद करती है. मौजूदा साल मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि स्टोर किया गया प्याज खत्म हो रहा है और स्टोर की गई प्याज की क्वालिटी पर भी असर पड़ा है. एक रिपोर्ट की माने तो मार्च और अप्रैल में महाराष्ट्र में बे मौसम बारिश और ओलावृष्टि से सीजन के आखिरी की फसल को नुकसान भी पहुंचा और स्टोर किए गए स्टॉक पर भी असर पड़ा. इसका मतलब है कि बाजार में न सिर्फ प्याज की कमी है बल्कि उन प्याज की क्वालिटी और उपलब्धता पर भी दबाव है जो आम तौर पर मुश्किल महीना में देश की जरूरतें पूरी करती हैं.

प्याज के उत्पादन में मानसून ने डाला खलल
उपेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि, ''प्याज की कीमतों में राहत खरीफ सीजन की जो फसल आएगी वो ला सकती है. लेकिन अब तक वह आ नहीं रही है, सबको उसी का इंतजार है. इस बार मानसून भी एक बड़ा कारण है क्योंकि खरीफ सीजन में जो फसल लगाते हैं जिस तरह से देरी से मानसून आया फिर कभी तेज बारिश हुई उसने भी कुछ असर डाला है. जाहिर सी बात है मौसम ने सप्लाई चैन पर असर डाला है जो कि मौजूदा बढ़ोतरी के पीछे मौसम एक आम वजह बनकर उबर रहा है.''
आलू प्याज के थोक व्यापारी लखन पांडे बताते हैं कि, ''शहडोल में भी कई जगह ऐसे हैं जहां प्याज की खेती अच्छी खासी हो रही है. अमरहा, भमरहा ब्यौहारी इन जगहों से भी प्याज आता है, लेकिन वर्तमान में यहां से अब खत्म हो चुका है. हालांकि मध्य प्रदेश में भी खरीफ सीजन बारिश के मौसम में प्याज की खेती कुछ जगह पर होने लग गई है. राज्य में सबसे ज्यादा वैसे ठंड के मौसम में प्याज की खेती की जाती है. लेकिन त्यौहार के सीजन अक्टूबर नवंबर में प्याज की कमी को पूरा करने के लिए खरीफ में भी प्याज की खेती का चलन अब तेजी से बढ़ रहा है.''
प्याज के बढ़े दाम, किसानों को कितना लाभ
प्याज की कीमतों के जो दाम बढ़े हैं क्या इसका फायदा किसानों को सीधा मिल पाता है? किसानों को कितना फायदा मिलता है, इसे जानने के लिए जब हमने भारतीय किसान संघ के उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने जो बात बताई वह भी गौर करने वाली है. ''अगर प्याज की खेती की बात करें तो 1 एकड़ में प्याज की खेती की जाती है तो लगभग 25 से 30 हज़ार के करीब लागत आती है. वो भी तब जब मौसम प्रतिकूल हो नहीं तो दाम घट बढ़ भी सकते हैं.
मौसम के मुताबिक, दाम घट बढ़ भी सकते हैं क्योंकि डीजल खाद बीज मजदूरी दवाइयां ऐसी बहुत सारी चीजें लगती है जो इसमें लागत बढ़ाते घटाते रहते हैं. इस हिसाब से देखें तो 1 किलो प्याज किसान को खेत से ही 7 से 8 रुपए के लगभग पड़ता है. मतलब इतनी लागत लग जाती है और जब किसान फसल बेचने जाता है तो वह 10 से ₹15 किलो तक बिकता है. कुल मिलाकर किसान को प्याज बेचने में 7 से 8 रुपए का प्रॉफिट होता है. ज्यादा से ज्यादा ₹10 का प्रॉफिट मान सकते हैं.''

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बिचौलियों-स्टॉकिस्टों को मिलता है फायदा
किसान नेता भानु प्रताप कहते हैं कि, ''अगर बाजार में ₹60 किलो की दर से प्याज बिक रहा है तो ये मत मानिए कि किसानों को इतना लाभ मिल रहा है. क्योंकि किसान तो दुकान लगाकर बेचेगा नहीं, उसके पास इतना समय नहीं है. अगर वह मंडी में स्टाल लगाकर बेचने लगेगा तो खेतों पर काम कौन करेगा. तो किसान अपनी फसलों को ले जाकर मंडी पर बेच देता है. अगर ₹60 किलो ही प्याज बिक रहा है, तो ज्यादा से ज्यादा मानिए किसानों से मंडी में थोक रेट में 20 से ₹25 ₹30 किलो तक ही प्याज किसान बेच पायेगा. इसमें भी जो किसान अभी बचा कर रखे हैं प्याज उन्हीं के पास होगा या की जो कोल्ड स्टोरेज में रखे होंगे. लघु और मझौले किसानों के पास तो प्याज बचे ही नहीं होंगे, क्योंकि प्याज को बचाना भी लंबे समय के लिए कठिन कार्य होता है.
इसलिए ज्यादातर किसान तुरंत बेच देते हैं, लेकिन जो रखे भी हैं उनमें से कुछ का प्याज सूखता भी है, कुछ खराब भी होता है तो कुल मिलाकर वही हो जाता है कि 10 से 12 रुपए का ही प्रॉफिट किसानों को मिल पाता है.'' लेकिन जब हमने सवाल किया कि, फिर इसका फायदा किसे मिलता है तो वह भी व्यंगात्मक कहते हैं कि ''जिनके पास न खेत हैं, न हल है, न बैल हैं, मतलब इसका फायदा बिचौलियों को मिलता है. व्यापारियों, आढ़तियों, ट्रेडर्स और स्टॉकिस्टों को मिलता है. किसान के साथ तो वही होता है जो होते आया है, चाहे फिर दाम कितना क्यों न बढ़ जाये.''

मध्य प्रदेश में प्याज उत्पादन
भारतीय किसान संघ के संभागीय उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि, "मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है. यह देश के कुल प्याज उत्पादन में करीब 14 से 15% तक की हिस्सेदारी रखता है. राज्य में रबी और खरीफ दोनों सीजन में प्याज की बंपर पैदावार होती है.'' बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा प्याज उत्पादन करने वाला राज्य महाराष्ट्र है, तो दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, तीसरे नंबर पर कर्नाटक है तो वही चौथा गुजरात है.
ओनियन हब कहलाता है शाजापुर
मध्य प्रदेश में प्याज का सबसे बड़ा ज्यादा उत्पादन वाला क्षेत्र मालवा और निमाड़ है. राज्य के कुल प्याज उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं दो क्षेत्र से आता है. शाजापुर को ओनियन हब भी कहा जाता है. यह जिला पूरे मध्य प्रदेश में प्याज उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर है. इंदौर और उज्जैन में भी इन जिलों में भी बड़े पैमाने पर प्याज उगाया जाता है. धार, देवास और राजगढ़ इन जिलों के किसान रबी और खरीफ दोनों सीजन में बड़े स्तर पर प्याज की खेती करते हैं. इसके अलावा खंडवा और खरगोन पश्चिम निमाड़ यहां का प्याज अपनी बेहतरीन क्वालिटी और स्वाद के लिए जाना जाता है.
बड़वानी जिले में भी प्याज की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है. बुंदेलखंड में बात करें तो सागर बुंदेलखंड क्षेत्र में प्याज उत्पादन के मामले में ये जिला सबसे आगे है. रतलाम और मंदसौर मसाला फसलों के साथ यहां के किसान बड़े पैमाने पर प्याज उगाते हैं. सतना रीवा में भी इन दोनों क्षेत्र में स्थानीय खपत और आसपास की मंडियों के लिए प्याज उगाया जाता है.

