ETV Bharat / state

जंगल में छोड़ने के बाद बाघ की लगातार मॉनिटरिंग, कैमरा ट्रैप से 4 मार्च के बाद आएगा सही आंकड़ा

शहडोल के जंगल में कितने जंगली जानवर हैं इसकी जानकारी 4 मार्च के बाद मिलेगी. संजय गांधी टाइगर रिजर्व ने इंस्टाल किए हैं ट्रैप कैमरे.

SHAHDOL INJURED TIGER MONITORING
जंगल में छोड़ने के बाद बाघ की लगातार मॉनिटरिंग (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 25, 2026 at 3:17 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

शहडोल: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की तरह शहडोल के जंगल में भी वन्य प्राणियों का मूवमेंट बढ़ गया है और लगातार इनकी संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. अभी हाल ही में शहडोल जिले के उत्तर वन मंडल के जिस क्षेत्र से घायल बाघ का रेस्क्यू किया गया था, ठीक होने के बाद उसे छोड़ा गया है. इस बाघ की निगरानी काफी कड़ाई से की जा रही है.

फिट होने के बाद घायल बाघ की घर वापसी

शहडोल जिले का उत्तर वन मंडल पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में रहा है. 29 जनवरी को उत्तर वन मंडल के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र के वनचाचर बीट में एक वयस्क नर बाघ आपसी द्वंद्व में घायल हो गया था. जिसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू दल ने रेस्क्यू किया था और उसे उपचार के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा एंक्लोजर क्रमांक एक में सुरक्षित रखा था. जहां पर उसकी विशेष तौर पर देखरेख हुई और इलाज किया गया. इसके बाद फिर उसे 22 फरवरी को सफलतापूर्वक उसी जगह पर रिलीज कर दिया गया है.

कैमरा ट्रैप से 4 मार्च के बाद आएगा सही आंकड़ा (ETV Bharat)

'बाघ की मॉनिटरिंग करना जरूरी'

शहडोल उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "जो घायल बाघ फिट हुआ है, ये एरिया उसका देखा हुआ था, इसलिए उसको यहीं पर छोड़ा गया है. टाइगर्स को जब आप रेस्क्यू करते हैं तो उनको सेडेशन देना पड़ता है, उस सेडेशन से जैसे ही बाहर आते हैं तो एनिमल को नॉर्मलाइज होने में वक्त लगता है, इसलिए उस बाघ की मॉनिटरिंग करना जरूरी है. फर्स्ट डे जब उसको रिलीज किया था तो हाथियों के साथ इसकी मॉनीटरिंग कर रहे थे कि सब कुछ ठीक-ठाक है कोई प्रॉब्लम तो नहीं है. अभी तक सबकुछ ठीक है, बाघ फिट है, और जंगल में मौज से घूम रहा है, जिसकी कड़ाई से निगरानी की जा रही है."

SHAHDOL INJURED TIGER
फिट होने के बाद घायल बाघ की घर वापसी (ETV Bharat)

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

शहडोल जिले के उत्तर वन मंडल में एनिमल्स की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. शहडोल उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "हमारा जो उत्तर वन मंडल का क्षेत्र है ये बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व के बीच में है तो यहां रेगुलरली एनिमल का मोमेंट रहता है, जैसा कि विभाग का प्रोटोकॉल है कि गश्ती होना चाहिए रेगुलरली ताकि ये पता चल सके कि कितने एनिमल्स का मूवमेंट है. इसके साथ-साथ ही जो इलेक्ट्रिक लाइन होते हैं, उनकी भी लगातार रात्रिकालीन गश्ती होती है और जो रेगुलर चीजें हैं वो भी साथ-साथ चल रही हैं."

BANDHAVGARH TIGER RESERVE
सुरक्षा के कड़े इंतजाम (ETV Bharat)

कैमरा ट्रैप से आएगा एक्चुअल आंकड़ा

डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "अभी जैसा कि बाघों की गणना चल रही है, इसी के तहत संजय गांधी टाइगर रिजर्व के द्वारा हमारे यहां ट्रैप कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं. ये कैमरे 25 दिन के लिए लगाए गए हैं. उसका जो लास्ट चरण है, 4 मार्च को खत्म हो रहा है, उस दौरान जो भी कैमरा इंस्टॉल किए हैं, उनके फोटोस आएंगे. उन फोटोस के आधार पर यह सुनिश्चित होगी कि तकरीबन यहां कितने एनिमल्स हैं."

सेंसिटिव एरिया क्यों है?

शहडोल उत्तर वन मंडल डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "उत्तर वन मंडल का एरिया थोड़ा सेंसिटिव है. इस वन मंडल में 99 बीट हैं, तकरीबन सभी में लेपर्ड्स, टाइगर और भालू हैं. कुछ जगहों पर तो हाथी भी हैं, या फिर बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व के बीच होने की वजह से जंगली जानवरों का मूवमेंट भी अक्सर बना ही रहता है. एक तरह से ये कॉरिडोर की तरह है. अब किस क्षेत्र में कितने बाघ हैं ये तो ट्रैप कैमरे का रिजल्ट आने के बाद ही पता चलेगा."

'स्टाफ की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण'

डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "हमारे लिए एनिमल्स की सुरक्षा और एनिमल्स के लिए हैबिटेट यह दोनों ही इंपॉर्टेंट है. रेगुलरली उसमें हम काम करते हैं, जैसे उनके हैबिटेट इंप्रूवमेंट के काम, वाटर होल के काम या फिर उनके कवर के लिए काम करना या फिर इसके अलावा पेट्रोलिंग की व्यवस्था करना, इतनी सारी चीजों से डील करने के लिए स्टाफ की सुरक्षा वह भी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.

हमारे स्टाफ के पास सारे संसाधन हों, उनकी प्रॉपर ट्रेनिंग हो, इसके साथ-साथ जो लोग उस क्षेत्र में रह रहे हैं जिनको डे टू दे अपनी नीड्स के लिए जंगल में जाना पड़ता है. उनका अवेयरनेस प्रोग्राम चलाना, यह सारी चीजें हम साइड दर साइड चला रहे हैं, कोशिश कर रहे हैं इसको हम उसी तरह से करें जितना की किसी संरक्षित क्षेत्र में होता है."