ETV Bharat / state

ऊबड़-खाबड़ धूल भरे मैदान में फुटबॉल का जोश हाई, विदेशी कोच मिनी ब्राजील से निकालेंगे तुरुप के इक्के

फुटबॉल में दुनिया के नक्शे पर पहचान बना रहा मध्य प्रदेश का मिनी ब्राजील, असुविधाओं के बावजूद निकल रहे नेशनल खिलाड़ी, विदेशी कोच पहुंचे विचारपुर.

SHAHDOL MINI BRAZIL VICHARPUR
विदेशी कोचों का फेवरेट बना मिनी ब्राजील (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 19, 2026 at 4:24 PM IST

|

Updated : January 19, 2026 at 6:55 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: अखिलेश शुक्ला

शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल का विचारपुर गांव दुनिया भर में अपनी ख्याति बिखेर रहा है. इस गांव के खिलाड़ियों के फुटबॉल क्रेज को देखने पहले यहां जर्मनी के कोच पहुंचे. फिर कंबोडिया के कोच पहुंचे. उन्होंने यहां खिलाड़ियों और स्थानीय कोच को ट्रेनिंग भी दी. लगातार विदेशी फुटबॉल कोचेस को प्रभावित करने वाले मिनी ब्राजील में आखिर क्या कुछ बदलाव हुआ है. आइए जानते हैं.

विदेशी कोच पहुंचे विचारपुर (ETV Bharat)

विदेशी कोचों का फेवरेट बना मिनी ब्राजील!

मैदान पर धूल का ढेर और इस उड़ती हुए धूल में फुटबॉल खेलते हुए बच्चे, इन दिनों विदेशी कोचों के फेवरेट बने हुए हैं. तभी तो पहले जर्मनी के कोच डाइटमार बीयर्सडॉर्फ शहडोल के विचार पुर गांव में बच्चों के फुटबॉल क्रेज को देखने के लिए पहुंचे. उनके बाद अब कंबोडिया के कोच भी मिनी ब्राजील में इन बच्चों की प्रतिभा देखकर काफी खुश हुए. उनका मानना है कि यहां अद्भुत टैलेंट है.

मैदान नहीं रेत का ढेर है, जहां बच्चे खेलने को मजबूर

विचारपुर गांव शहडोल जिला मुख्यालय से लगा हुआ है. इसी गांव की पहचान यहां के फुटबॉल क्रेज को लेकर मिनी ब्राजील के नाम से है. विचारपुर गांव के पूर्व खिलाड़ी और वर्तमान में मिनी ब्राजील के कोच अनिल सिंह युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. वो बताते हैं, ''विदेशी कोचों के गांव में आने से बदलाव तो बहुत कुछ हो रहा है. बच्चों के खेल का स्टाइल भी बदल रहा है. उनका कॉन्फिडेंस और उम्मीदें भी बढ़ रही हैं. लेकिन जो बुनियादी चीजें है उनमें कोई बदलाव नहीं हो रहा है.''

Vicharpur Dusty Football Ground
कंबोडिया कोच ने दी खिलाड़ियों को ट्रेनिंग (ETV Bharat)

कोच अनिल सिंह कहते हैं कि, ''कंबोडिया के कोच आए हुए थे, जिन्होंने खिलाड़ियों को बहुत सी बारीकियां बताई. किस उम्र में किस तरह से युवा खिलाड़ियों को तैयार करना है. ऐसी कई सारी टेक्निकल और काम की चीजें बताईं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या यही है कि जहां बच्चों को प्रैक्टिस करना है, वहां कोई डेवलपमेंट नहीं हो रहा है.'' अनिल सिंह बताते हैं कि, ''मिनी ब्राजील का खेल मैदान एक तरह से रेत का ढेर है. फुटबॉल का खेल ग्रॉसरी मैदान में खेला जाता है. यहां के बच्चे उड़ती धूल में खेलने को मजबूर हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, क्योंकि एक अच्छा खेल मैदान होगा तो बच्चे अच्छे से प्रैक्टिस कर सकेंगे.''

Vicharpur Dusty Football Ground
मैदान में रेत का ढेर, जहां बच्चे खेलने को मजबूर (ETV Bharat)

जर्मनी से लौटने के बाद कितना बदला खेल

मिनी ब्राजील के फुटबॉल कोच अनिल सिंह बताते हैं, ''4 अक्टूबर 2025 को शहडोल से पांच खिलाड़ी सानिया कुंडे, सुहानी कोल, प्रीतम कुमार, वीरेंद्र बैगा, मनीष घंसिया और एक कोच लक्ष्मी सहीस जर्मनी गए थे. 15 अक्टूबर को जर्मनी से ट्रेनिंग लेकर भारत लौटे. यह सभी खिलाड़ी जर्मनी के क्लब FC Ingolstadt 04 क्लब में ट्रेनिंग लेने गए थे. वहां से लौटने के बाद इन खिलाड़ियों में एक अलग ही बदलाव देखने को मिल रहा है. जो बच्चे ज्यादा बोलते नहीं थे, अब वह दूसरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. लेकिन वापसी पर खिलाड़ियों को फिर वही धूल भरे मैदान पर खेलना पड़ रहा है.''

कंबोडिया के कोच ने किया है वादा

कंबोडिया के फुटबॉल कोच चार्ली पोमेरॉय इसी साल 15 जनवरी को शहडोल जिले के मिनी ब्राजील यानी विचारपुर पहुंचे. उन्होंने दो दिन शहडोल में बिताए. उन्होंने दूसरे दिन तो मिनी ब्राजील के कोच और खिलाड़ियों की 2 घंटे की सेशन भी ली और इस दौरान वह काफी प्रभावित हुए. उनका कहना था कि यहां के खिलाड़ियों में फुटबॉल के प्रति गजब का क्रेज है. इन्हें अगर शुरुआत से अच्छी ट्रेनिंग दी जाए यह कमाल कर सकते हैं.

germany coach Football Training
विचारपुर का फुटबॉल खेल मैदान (ETV Bharat)

मिनी ब्राजील में स्थित खेल युवा कल्याण विभाग साईं के सब फीडर सेंटर की कोच लक्ष्मी सहीस कहती हैं कि, ''चार्ली सर ने बहुत ही क्वालिटी सेशन लिया. फुटबॉल को लेकर बहुत बारीकियां बताईं. कैसे छोटे-छोटे बच्चों को फुटबॉल के प्रति तैयार करना है इसकी बारीकियां बताई. उन्होंने आश्वासन दिया है कि आने वाले समय में वह फिर वापस आएंगे और इस बार पूरी तैयारी के साथ आएंगे. यहां के कुछ कोचों को ट्रेंड करेंगे. इसके अलावा कुछ खिलाड़ियों को लेकर भी जाएंगे.''

shahdol Cambodian coach arrived Mini Brazil
विदेशी कोच पहुंचे विचारपुर (ETV Bharat)

जर्मनी रिटर्न खिलाड़ी बोले- बदला है खेल

ईटीवी भारत ने उन खिलाड़ियों से बात की जो जर्मनी ट्रेनिंग के लिए गए थे. फुटबॉल खिलाड़ी सुहानी कोल और वीरेंद्र बैगा बताते हैं कि, ''जर्मनी से ट्रेनिंग लेने के बाद उन्हें बहुत कुछ तकनीकी चीजें सीखने को मिली हैं. उसे अब अपने खेल में इंप्लीमेंट कर रहे हैं, जिसका असर भी देखने को मिल रहा है. उनका खेल बहुत बदल रहा है. वह यहां के बच्चों को भी सिखाने की कोशिश कर रहे हैं. इन दोनों ही खिलाड़ियों का मानना है कि, ''जर्मनी जाने के बाद पता चला कि फुटबॉल में किस तरह से तकनीकी ट्रेनिंग दी जाती है. अगर वह ट्रेनिंग उन्हें भी मिलती है तो इंटरनेशनल लेवल पर वो लोग जरूर कमाल कर दिखाएंगे.''

MP National Football Players
इंटरनेशनल खेल चुके हैं विचारपुर के खिलाड़ी (ETV Bharat)

खेलने की सुविधा बढ़े, खिलाड़ी बढ़ जाएंगे

सादिया अंजुम कहती हैं कि, ''उन्हें भी फुटबॉल खेलना बहुत पसंद है. वह पिछले 4 साल से विचारपुर के इस मैदान में फुटबॉल खेल रही हैं. उनका सपना है कि, ''वह भारत को रिप्रेजेंट करें.'' वह कहती हैं कि, ''यहां कई दशकों से फुटबॉल खेला जा रहा है, अब तो विदेशी कोच भी यहां पहुंच रहे हैं और बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है. लेकिन ये उम्मीद वहां धराशाई हो जाती है, जब यहां के बच्चे उड़ते हुए धूल पर खेलने को मजबूर होते हैं.

ग्राउंड में बहुत ज्यादा धूल है, मैदान ऊबड़ खाबड़ है. यहां के बच्चों के खेलने के लिए सर्व सुविधा युक्त ग्राउंड ही नहीं है. जब ग्राउंड ही नहीं होगा तो बच्चे प्रैक्टिस कहां से करेंगे. जो ग्राउंड है उसमें भी बहुत ज्यादा रेत है. डस्ट में बच्चों को खेलने को मजबूर होना पड़ रहा है.'' सादिया अंजुम कहती हैं कि, ''आप हमें बुनियादी सुविधाएं दे दीजिए, खिलाड़ी अपने आप आगे बढ़ जाएंगे.''

CAMBODIAN COACH ARRIVED MINI BRAZIL
विचारपुर में ऊबड़-खाबड़ है खेल का मैदान (ETV Bharat)

हर दूसरे घर में फुटबॉल के नेशनल खिलाड़ी

फुटबॉल कोच यशोदा सिंह मिनी ब्राज़ील विचारपुर की ही फुटबॉल खिलाड़ी हैं. जो कई नेशनल खेल चुकी हैं. अब फुटबॉल की कोचिंग भी दे रही हैं. वह कहती हैं कि, ''यहां के हर दूसरे घर में फुटबॉल के नेशनल प्लेयर मिल जाएंगे. इस गांव की खासियत है यहां छोटी उम्र से ही बच्चे फुटबॉल खेलने के लिए मैदान पर आते हैं.''

पीएम मोदी के मन में बसता है मिनी ब्राजील

विचारपुर गांव अगर आज मिनी ब्राजील के नाम से अपनी पहचान बना पाया है तो उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा रोल है. क्योंकि फुटबॉल का क्रेजी ये गांव मोदी के मन में बसता है. 1 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहडोल जिले के दौरे पर थे, जहां उन्होंने यहां के नन्हे युवा फुटबॉल खिलाड़ियों से मुलाकात की थी और काफी प्रभावित भी हुए थे. फिर उसके बाद 30 जुलाई 2023 को अपने मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने यहां के फुटबॉल क्रेज का जिक्र किया था. जिसके बाद ही जर्मन कोच की नजर इस मिनी ब्राजील पर पड़ी थी.

Last Updated : January 19, 2026 at 6:55 PM IST