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शहडोल का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर, कोणार्क की विधा पर कलचुरी राजवंश ने कराया था निर्माण

कलचुरी राजवंश ने कोर्णाक की तर्ज पर शहडोल में कराया था ऐतिहासिक सूर्य मंदिर का निर्माण. जगह-जगह बिखरे हैं मंदिर के अवशेष.

SHAHDOL HISTORICAL SUN TEMPLE
शहडोल का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 11:05 PM IST

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शहडोल: मध्य प्रदेश में कई जगहों पर ऐसी ऐतिहासिक और पौराणिक चीजें हैं जो अद्भुत ही नहीं अविश्वसनीय और अकल्पनीय भी हैं. शहडोल में एक ऐसा ही पुरातात्विक महत्व का ऐतिहासिक और अद्भुत सूर्य मंदिर है. भले ही अब ये सूर्य मंदिर अपने संरक्षण की बाट जोह रहा है, लेकिन जब इसकी स्थापना की गई थी तो कोणार्क मंदिर के विधा पर ही की गई थी. ये हम नहीं कह रहे बल्कि यहां पर मौजूद कई ऐतिहासिक संरचनाएं खुद ब खुद बयां कर रही हैं.

शहडोल का अद्भुत सूर्य मंदिर

शहडोल से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थित है रोहनिया गांव और इसी गांव में थोड़ी दूर आगे जाएंगे तो यहां पर मौजूद है वो ऐतिहासिक और पुरातात्विक अद्भुत सूर्य मंदिर जो बहुत विशेष है. यहां पर जाने के बाद आपको प्रकृति की खूबसूरती तो देखने को मिलेगी साथ ही यहां प्राचीन सूर्य मंदिर के अवशेष देखे जा सकते हैं. चारों तरफ ये बिखरे पड़े हैं. पुराना मंदिर भी टूट चुका है, एक कमरा बना दिया गया है. जिसमें कलचुरी कालीन सूर्य प्रतिमा और कई सारी पुरातात्विक महत्व की प्रतिमाएं अंदर रखी हुई हैं. बाहर पुरातात्विक महत्व के कई अवशेष, मूर्तियां बिखरी भी पड़ी हैं, जिनका छरण हो रहा है. यहां पहुंच कर यही लगेगा कि ऐसे अद्भुत अमूल्य पुरातात्विक महत्व की चीजों के संरक्षण की बहुत जरूरत है.

कोणार्क की विधा पर कलचुरी राजवंश ने कराया था निर्माण (ETV Bharat)

पुरातात्विक सर्वे में मिली थी ये जगह

पुरातत्वविद रामनाथ परमार बताते हैं कि "रोहनिया शहडोल से रीवा रोड पर सोन नदी के पहले बसा है. पुरातात्विक सर्वेक्षण में यहां पर एक सूर्य मंदिर टूटी-फूटी अवस्था में मिला था. यहां पर मूर्तियां बिखरी हुईं तो कुछ प्रतिमाएं साबुत और कुछ खंडित मिलीं. उसमें बड़ी एक महत्वपूर्ण बात थी कि वहां पर सूर्य की स्थानक प्रतिमा लगभग एक मीटर से थोड़ी बड़ी और उससे आधा मीटर से ज्यादा चौड़ी है. इस तरह से स्थानक प्रतिमा सूर्य की मिली, जिसे वहां के स्थानीय लोग देवी के रूप में पूजते थे."

KALACHURI DYNASTY BUILT SUN TEMPLE
कोर्णाक की तर्ज पर बनाया गया था सूर्य मंदिर (ETV Bharat)

'कोणार्क सूर्य मंदिर की विधा पर हुआ निर्माण'

पुरातत्वविद रामनाथ परमार बताते हैं कि "रोहनिया की भौगोलिक और खगोलीय दृष्टि को देखते हुए इस स्थान का चुनाव कलचुरी शासकों ने किया और वहां पर सूर्य मंदिर का निर्माण कराया. सूर्य मंदिर एक ऐसे स्थान पर है, जो अद्भुत है, शहडोल जिले से उस स्थान से कर्क रेखा भी निकल रही है, सोन नदी वहीं पर पूर्व की ओर से आती है. एकदम पूर्व से पश्चिम की ओर आते हुए वहीं पर जहां पर मंदिर बना है एक किलोमीटर के लिए दक्षिण से उत्तर की ओर हो जाती है.

SHAHDOL HISTORICAL TEMPLE
जगह-जगह बिखरे हैं मंदिर के अवशेष (ETV Bharat)

पश्चिम में आ रही थी सीधे दक्षिण से उत्तर की मुड़ जाती है और लगभग एक किलोमीटर सवा किलोमीटर ऐसे ही बहती है. फिर से मुड़ती है और फिर पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लग जाती है. वहां का ऊंचा स्थान, सामने सोन नदी का प्रवाह, कर्क रेखा की उपस्थिति ये सब चीजें जिस तरह से कोणार्क का सूर्य मंदिर है, उस विधा पर ही यहां पर कलचुरी शासकों ने उस स्थान पर सूर्य मंदिर की स्थापना कराई थी."

SHAHDOL SUN TEMPLE LIKE KONARK
अद्भुत है रोहनिया का सूर्य मंदिर (ETV Bharat)

कब कराई स्थापना ?

सूर्य देवता हैं और ये पंच देवताओं में भी शामिल हैं, इनके महत्व को देखते हुए कलचुरी शासको ने रोहनिया में इस जगह पर 9वीं, 10वीं शताब्दी में जो यहां पर कलचुरी राजवंश के शासक थे उन्होंने यहां पर अद्भुत सूर्य मंदिर की स्थापना करवाई थी, सूर्य मंदिर बनवाया था, जो बहुत ही विशेष है.

SHAHDOL SUN TEMPLE LIKE KONARK
शहडोल का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर (ETV Bharat)

अद्भुत है रोहनिया का सूर्य मंदिर

रामनाथ परमार बताते हैं कि "रोहनिया में सूर्य मंदिर में आप देखते हैं कि जो प्रतिमा बनी है, ये बहुत ही महत्वपूर्ण है, शहडोल जिले में मऊ ब्यौहारी के आगे एक मऊ स्थान है प्राचीनतम स्थल है, वहां पर भी सूर्य की बहुत ही अद्भुत प्रतिमा है, लेकिन ये जो रोहनिया में सूर्य प्रतिमा है ये अपने आप में ही अद्वितीय है. इस सूर्य प्रतिमा में देखेंगे तो सूर्य स्थानक स्वरूप में हैं, इनका एक चक्रीय रथ पर सात घोड़े का जुता हुआ रथ होता है उसमें स्थानक रूप में हैं."

अति महत्वपूर्ण स्थान पर ये सूर्य प्रतिमा विराजी हुई है, जो कालांतर से छरण हुआ, मंदिर टूट गया या तोड़ा गया या भूकंपीय स्थिति से टूटा जो भी इतिहास रहा हो, इतिहास में छिपी हुई चीज हैं लेकिन ये मंदिर अद्भुत है और इसे सरंक्षण की जरूरत है.