सब्जी की खेती में ग्राफ्टिंग का क्रेज, बंपर पैदावार के लिए करें ये काम, सब्जियों से भर जाएगा थैला
शहडोल संभाग के किसानों में ग्राफ्टेड नर्सरी लगाने का क्रेज, फसलों पर मिल रहा बंपर उत्पादन, जानें कैसे करना है ग्राफ्टेड नर्सरी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 19, 2026 at 7:52 PM IST
|Updated : January 19, 2026 at 8:36 PM IST
शहडोल: विंध्य के शहडोल में जो भी किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं. उनके बीच में ग्राफ्टेड नर्सरी लगाने का क्रेज है, क्योंकि किसानों का मानना है कि इसमें बंपर पैदावार होती है, लेकिन अगर थोड़ी सी सावधानी न बरती जाए तो नुकसान भी हो सकता है. सब्जी की खेती करने वाले ज्यादातर किसान बैगन, टमाटर और मिर्ची की फसल के लिए ग्राफ्टेड नर्सरी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.
आदिवासी अंचल में ग्राफ्टेड का क्रेज
किसान राम सजीवन कचेर बताते हैं कि "शहडोल में जो भी किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं. अधिकतर किसानों की पसंद ग्राफ्टेड नर्सरी बन रही है. बैगन टमाटर और मिर्च के लिए ज्यादातर किसान ग्राफ्टेड नर्सरी ही लगाना चाह रहे हैं. उसके लिए छत्तीसगढ़ के रायपुर और अंबिकापुर जैसे जगह से वो ग्राफ्टेड नर्सरी मंगवा रहे हैं, और बकायदे लगा रहे हैं, क्योंकि किसानों का मानना है, कि ग्राफ्टेड सब्जियों की फसल की नर्सरी लगाने से उत्पादन ज्यादा होता है. इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है. इससे बहुत ज्यादा रोग नहीं लगते हैं, जिससे दवाओं का अनावश्यक खर्च नहीं होता है.

इन बातों का रखें ख्याल
किसान राम सजीवन कचेर कहते हैं कि बैगन, टमाटर और मिर्च की ग्राफ्टेड नर्सरी अगर आप लगा रहे हैं, तो कुछ बातों का जरूर ख्याल रखें. अगर बिजनेस के लिए इस फसल को लगा रहे हैं, तब तो जरूर ही ध्यान रखें, क्योंकि अगर इन चीजों को नहीं अपनाएंगे तो दिक्कत हो सकती है. बाहर से मंगवाने पर शहडोल में ग्राफ्टिंग नर्सरी का एक प्लांट कम से कम ₹12 में पड़ता है. इससे आप समझ सकते हैं कि कितना चार्ज लगता होगा. थोड़ी सी चूक आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है.
ग्राफ्टेड नर्सरी का प्लांट लगाने के लिए सबसे पहले तो खेत की गहरी जुताई जरूर करवा लें, गोबर खाद डालें, ग्राफ्टेड में मल्चिंग बहुत जरूरी है. अगर लंबे समय तक फसल को चलाना है, खरपतवार ना हो, इसके लिए मलचिंग जरूर करें और ड्रिप की भी व्यवस्था करें. सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई करें, क्योंकि अगर इस तरह से आप ग्राफ्टेड फसल लगाएंगे, तो उत्पादन बेहतर होगा और मुनाफा होगा.
अगर इस तरह से नहीं किया तो उत्पादन में नुकसान हो सकता है. अगर मल्चिंग नहीं करेंगे तो खरपतवार निकलेंगे और खरपतवार बाहर निकलेंगे तो लेबर चार्ज लगेगा. जिसके चलते उत्पादन में भी कमी आएगी. इसके अलावा रोग जीत व्याधि भी ज्यादा होंगे, उसके निदान में भी पैसा लगेगा.
इसके अलावा ग्राफ्टेड नर्सरी को मिट्टी में लगाते समय कोशिश करें कि जो मिट्टी का लेवल है, जहां से जड़ और तना जुड़े होते हैं, ग्राफ्टिंग पॉइंट से मिट्टी 1 से 2 इंच नीचे होना चाहिए. अगर ग्राफ्टिंग वाला हिस्सा मिट्टी के संपर्क में आ गया, तो ऊपरी पौधा अपनी जड़े निकाल लेगा. इसके बाद ग्राफ्टिंग का कोई लाभ नहीं मिल पाएगा. पौधे को हमेशा शाम के समय ही लगाएं. जिससे रात भर उसे नमी मिलती रहे और पौधे को संभलने का मौका मिल जाए. इसके अलावा इस बात का ख्याल रखें कि अगर ग्राफ्टिंग वाला जड़ जो मिट्टी के नीचे होता है, उससे तने न निकले तो उसे तोड़ दें, क्योंकि वो मुख्य तने को नुकसान पहुंचा सकता है."

पानी खाद का कैसे बनाएं बैलेंस
कृषि वैज्ञानिक डॉ बीके प्रजापति बताते हैं कि "ग्राफ्टेड पौधों में संतुलित पानी दें, क्योंकि इसकी जड़े नीचे तक जाती है. इसलिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है. पौधे के पास जल भराव ना करें, नर्सरी लगाते समय सड़ी हुई गोबर की अच्छी खाद वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करें. ग्राफ्टेड पौधे ज्यादा भोजन लेते हैं, इसलिए उन्हें नियमित अंतराल पर खाद और सूक्ष्म पोषक तत्व देते रहें. पौधे जब बड़े हो जाएं, फल आने लगे तो इसमें बांस या लकड़ी से सहारा दे दें, क्योंकि इनमें फल बहुत ज्यादा लगते हैं. इसलिए पौधे को नुकसान हो सकता है. समय-समय पर कीट नियंत्रण और रोगों पर ध्यान देते रहें. अगर कुछ ऐसा समझ में आता है तो उसका समय से उपचार करें, क्योंकि फसल स्वस्थ रहेगा तो पैदावार भी मस्त होगी."
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ग्राफ्टेड में कितना उत्पादन
किसान राम सजीवन कचेर बताते हैं कि "वो पिछले कई सालों से ग्राफ्टेड बैगन, मिर्च और टमाटर की फसल लगा रहे हैं, उनका जो अनुमान है, उसके मुताबिक अगर अच्छी देखरेख और फसल अच्छी है, तो एक ग्राफ्टेड बैगन के पौधे से 50 किलो तक उत्पादन हो सकता है. एक सीजन में इसी तरह टमाटर से 20 से 25 किलो तक एक पौधे से टमाटर मिल सकता है, तो 8 से 10 किलो तक एक पौधे से मिर्च मिल सकती है.
इसके अलावा मिर्च और बैगन एक ऐसी फसल है, जिसे अगर सही पोषण देते रहते हैं. एक सीजन की फसल लेने के बाद इसे थोड़ी खाद दे दें, थोड़ी छंटाई कर दें तो दूसरे सीजन में भी फसल निकाल सकते हैं."

