आसानी से बनाएं मिट्टी को अमृत देने वाला ये खाद, जानिए घन जीवामृत बनाने की विधि
जैविक खादों का इस्तेमाल कर अपने घरों और खेतों में कर सकते हैं अच्छी पैदावार, इन विधि से तैयार करे घनजीवामृत का करें उपयोग.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 2:55 PM IST
रिपोर्ट: अखिलेश शुक्ला
शहडोल: आज के समय में खेती की ओर लोगों का आकर्षण बढ़ा है और सबसे अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी जगह पर ही लेकिन अपने घर के लिए सब्जी, फसल, फूल के पौधे ज्यादातर लोग लगा रहे हैं. शहरों में भी छोटी सी जगह हो या छत पर लोग घर के इस्तेमाल के लिए सब्जियां फूल लगाने लगे हैं. ऐसे में अगर आप अपनी फसलों पर रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, जैविक और प्राकृतिक तरीके से फसल को लगाना चाहते हैं तो घनजीवामृत बनाना सबसे फायदेमंद रहेगा.
कैसे बनाएं घन जीवामृत ?
घन जीवामृत को लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह बताते हैं कि "प्राकृतिक खेती के इस दौर में घन जीवामृत बड़े काम का है. ये जीवाणुओं को मल्टिप्लाई करने की एक विधि है, तो इसमें हम 10 किलो गोबर, 10 किलो गोमूत्र, एक दो किलो गुड़, एक से दो किलो बेसन, बेसन मतलब चने का हो, या किसी भी दाल, किसी भी तरह के फसल का हो, इसको लेकर के अच्छी तरह से मिला लेते हैं.
उसमें 10 लीटर पानी लेकर आप उसको अच्छी तरह से मिला लें और साथ में कहीं अच्छी जगह पर खासतौर से अगर बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी मिल जाए तो, क्योंकि बरगद के पेड़ में जो तरह तरह के जीव-जंतु पक्षी बैठते हैं, वो फल भी खाते हैं, उसके चलते बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी ज्यादा बैक्टीरिया वाली होती है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाती है. कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी न मिले तो किसी भी उपजाऊ जगह की मिट्टी ले लें, मिट्टी को एक मुट्ठी लेना है.

इसे अच्छी तरह से पकी हुई गोबर की खाद कंपोस्ट भी जिसको कहते हैं, उसमें इसको डालकर अच्छी तरह से मिला कर 48 घंटे किसी जूट के बोरे से ढंक कर रख दिया जाता है. इस तरह से हमारा घन जीवामृत तैयार हो जाता है.

कब और कैसे करें इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह बताते हैं कि जब घन जीवामृत आपका तैयार हो जाए, तो इसे जब किसी भी खेत में फसल बोना है, तो आखिरी जुताई से पहले उसे खेतों में मिला दें, जितना ज्यादा घन जीवामृत मिलाएंगे, उतना फायदा मिलेगा.
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ये घन जीवामृत आपके खेत की मिट्टी के उर्वरा शक्ति बढ़ाएगा, उसमें कार्बन जीवाश्म की मात्रा बढ़ाएगा. जिससे उत्पादन भी बंपर होगा और मिट्टी की संरचना भी सुधरेगी. साथ ही खेती में लागत भी बचेगी, क्योंकि आपको रासायनिक खाद का भी इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा, अगर बेहतर तरीके से अच्छी तादात में घन जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा को ये बढ़ा देगा."

