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तिलापिया बनी पैसे छापने की मशीन, पंगास मछली मध्य प्रदेश में करा रही सॉलिड कमाई

मध्य प्रदेश में तिलापिया और पंगास मछली की दो प्रजाति बनी किसानों के लिए पैसों की मशीन. इसे पालन किसान हो रहे मालामाल. कमाई का रिकॉर्ड चेक करें.

Shahdol Fish Farming earning
मछली पालन से कम समय में ज्यादा फायदा (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 2, 2026 at 4:10 PM IST

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Updated : May 2, 2026 at 4:24 PM IST

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शहडोल: पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मछली पालन का क्रेज बढ़ने लगा है. खेती में अक्सर हो रहे घाटे को देखते हुए किसान मछली पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं और कई जगहों पर मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं. क्योंकि मछली पालन कम समय में बंपर कमाई का साधन है. किसानों की पहली पसंद मछली की प्रजाति पंगास और तिलापिया ज्यादा है. शहडोल व अनूपपुर में कई किसान मछली पालन कर रहे हैं. कुछ किसान साथी किसानों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित कर ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.

खुद कर रहे मछली पालन, ट्रेनिंग भी देते हैं

अनूपपुर जिले के पवन कुमार शाह कुछ सालों से बड़े स्तर पर मछली पालन कर रहे हैं. पवन शाह अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं. उन्हें मछली पालन सिखा रहे हैं. पवन कुमार शाह बताते हैं "वह केज कल्चर से मछली पालन करते हैं. मछली पालन में उनकी पहली पसंद तिलापिया और पंगास हैं, क्योंकि मार्केट में इनकी डिमांड बहुत ज्यादा है. वह जिन किसानों को मछली पालन की ट्रेनिंग दे रहे हैं, वे भी इस प्रजाति की मछली पालने लगे हैं. मध्य प्रदेश में तिलापिया और पंगास मछली का पालन तेजी से बढ़ा है."

मध्य प्रदेश में मछली पालन से किसान हो रहे मालामाल (ETV BHARAT)

पंगास और तिलापिया की डिमांड ज्यादा

मछली पालक पवन कुमार शाह कहते हैं "पंगास और तिलापिया की डिमांड का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पहले वह 9000 मछलियों का पालन करते थे, जिनकी संख्या अब 30 हज़ार तक पहुंच चुकी है. ग्राहकों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. जिन किसानों को वह ट्रेनिंग दे रहे हैं, वे भी प्रोडक्शन ले रहे हैं और अपने ग्राहकों को बेच रहे हैं."

खुद कर रहे मछली पालन, ट्रेनिंग भी देते हैं (ETV BHARAT)

पंगास और तिलापिया की क्या है खासियत

पवन कुमार शाह बताते हैं "मार्केट में पंगास और तिलापिया मछली आसानी से 150 से ₹160 किलो तक बिक जाती है. मछली की ये दोनों वैरायटी 6 से 8 महीने में ही ग्रोथ कर जाती है, बेचने लायक हो जाती है. जबकि रोहू, कतला जैसी इंडियन ब्रीड की मछलियां तैयार होने में 18 महीने तक लग जाते हैं. पंगास मीठे पानी की मछली है, जिसे कैटफिश भी कहा जाता है. इसकी बनावट शार्क मछली की तरह होती है और यह चमकदार होती है. यह बहुत तेजी से ग्रोथ करती है. अन्य मछलियों की तुलना में इसमें कांटा नहीं पाया जाता. इसीलिए इसे बोनलेस मछली भी कहा जाता है. इस मछली में बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी काफी है."

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पंगास और तिलापिया की क्या है खासियत (ETV BHARAT)

तिलापिया मछली पालन में लागत कम

तिलापिया मछली को एक तरह से जलीय चिकन एक्वेटिक चिकन माना जाता है. तिलापिया मछली बहुत कम दाना खाकर तेजी से वजन बढ़ा सकती है. ये प्रकृति में सर्वाहारी होती है. यह प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जलीय पौधों और सामान्य फीड पर आसानी से पल सकती है, जिससे इसके पालन का खर्च कम हो जाता है. 5 से 6 महीने में ही बाजार में बेचने लायक हो जाती है. ये लगभग 1 किलो वजन हासिल कर लेती है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं "मछली उत्पादन में भारत का पूरे विश्व में दूसरा स्थान है. 2013-14 में देश में केवल 96 लाख टन मछली का उत्पादन होता था, लेकिन पिछले वर्ष उत्पादन 195 लाख टन तक पहुंच चुका है. मतलब 140 लाख टन तक का ग्रोथ है."

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पंगास और तिलापिया की डिमांड ज्यादा (ETV BHARAT)

मछली पालन में आंध्रा नंबर एक पर

मछली पालन में देश में पहला स्थान आंध्रा का है. इसके बाद वेस्ट बंगाल और तीसरा कर्नाटका. मछली पालन फ्रेश वाटर के अंतर्गत किया जाता है और मेराईन के अंतर्गत गुजरात का मछली उत्पादन में स्थान है. फ्रेश वाटर के अंतर्गत मुख्य रूप से रोहू कतला और मृगल किसानों के बीच में पॉपुलर है. इसके अलावा जो एग्जॉटिक ब्रीड में पंगेसीएस है और तिलापिया है. ये दो मछलियां वर्तमान में कृषकों के बीच बहुत ही ज्यादा प्रचलित हैं. इसका मुख्य कारण इनका हार्ड नेचर है, ये विषम परिस्थितियों में लड़ सकती हैं. इनकी फास्ट ग्रोथ होती है. ये कम ऑक्सीजन में भी को सरवाइव कर लेती हैं.

देश के किन राज्यों में पंगास व तिलापिया मछली पालन

आंध्र प्रदेश भारत में सबसे ज्यादा पंगास और तिलापिया मछली का उत्पादन करता है. आंध्रा में मछली उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा 50% से अधिक है, लगभग 5 लाख मीट्रिक टन यहीं से आता है. यहां लगभग 24 हज़ार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है. इसके अलावा आंध्र में तिलापिया का भी उत्पादन प्रमुखता से किया जाता है.

आंध्रा के बाद बिहार में करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्र में पंगास मछली का पालन होता. इसके अलावा पश्चिम बंगाल पूरे देश में पंगास मछली के बीज आपूर्ति का मुख्य केंद्र है. छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश के किसान भी अब केज कल्चर के माध्यम से पंगास और तिलापिया मछली का पालन तेजी से कर रहे हैं.

Last Updated : May 2, 2026 at 4:24 PM IST