ETV Bharat / state

सूरजमुखी की खेती कर देगी मालामाल, बस जान लें इस खास खेती का सही तरीका

किसानों के लिए सूरजमुखी की खेती हो सकती है वरदान, कृषि वैज्ञानिक से जानें कैसे करें इसकी बुवाई और सिंचाई.

SHAHDOL SUNFLOWER CULTIVATION
किसान के लिए सूरजमुखी की खेती हो सकती है वरदान (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 17, 2026 at 9:51 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

शहडोल: आदिवासी बहुल इलाके के किसान आए दिन नए प्रयोग करते रहते हैं. खरीफ सीजन में यहां सबसे बड़े रकबे में धान और रबी सीजन में गेहूं की खेती की जाती है. इसके अलावा दलहन तिलहन की भी खेती की जाती है. लेकिन जायद में अब कई किसान सब्जी, उड़द, मूंग, तिल की खेती करने लगे हैं. इसके साथ ही सूरजमुखी की खेती भी किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है.

तीनों सीजन में की जाती है सुरजमुखी की खेती

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, "सूरजमुखी की खेती गर्मी, बरसात और ठंड तीनों सीजन में की जाती है. रबी सीजन में इसकी खेती साउथ इंडिया में की जाती है. मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से बरसात और गर्मी के दिनों में इसकी खेती की जाती है. ये मुख्य रूप से तिलहन फसल है, जो स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही फायदेमंद है."

Shahdol Sunflower cultivation
जानें सूरजमुखी की खेती का सही तरीका (ETV Bharat)

सूरजमुखी की खेती कैसे करें?

बीके प्रजापति बताते हैं, "इसकी खेती करने के लिए खेत को 2 बार कल्टीवेटर के साथ अच्छे से जुताई कर लें. इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था हो, जीवाश्म कार्बन उसमें प्रचुर मात्रा में हों और मिट्टी का पीएच मान (अम्लीयता/क्षारीयता) 6.5 से लेकर 7.5 के बीच होना चाहिए. इसकी बुवाई के लिए 10 से 15 किलो प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है."

कृषि वैज्ञानिक से जानें सूरजमुखी की खेती का तरीका (ETV Bharat)

बुवाई से पहले बीज को करें उपचारित

कृषि वैज्ञानिक कहते हैं, " सूरजमुखी के बीज की बुवाई से पहले इसे अच्छी तरह से उपचारित कर लें. बुवाई करने के लिए एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 15 सेंटीमीटर रखनी होती है. वहीं, सूरजमुखी बुवाई में 2 लाइन के बीच की दूरी 45 सेमी से लेकर के 60 सेंटीमीटर तक रखें. वहीं, जब कोई दूसरी फसल भी उनके बीच में लगाना हो, तो 2 लाइन के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखनी होती है. इसे अंतः फसल भी कहते हैं."

कैसे करें फसल की सिंचाई?

बीके प्रजापति कहते हैं "बीज बुवाई से पहले भूमि में नमी होना आवश्यक है. पलावा करके भी इसकी बुवाई की जा सकती हैं. बुवाई करने के बाद खेत में स्प्रिंकलर माध्यम से सिंचाई करनी चाहिए. इससे बीज का अंकुरण बहुत अच्छा होता है. इसके अलावा खरपतवार हटाना भी बहुत जरूरी है. पानी की मात्रा मिट्टी की क्वालिटी पर डिपेंड करता है, क्योंकि कुछ भूमि हल्की होती है, जिसमें कम पानी की आवश्यकता होती है. वहीं, जो भूमि भारी होती है या रेतीली होती है उसमें पानी अधिक लगती है."

तोते से फसल को बचाने के उपाय

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि "सूरजमुखी में फूल लगने के दौरान तोते फसल को नुकसान कर सकते हैं. इससे बचने के लिए मुख्य रूप से खेतों के चारों ओर रंग-बिरंगे झंडा लगा सकते हैं. इसके अलावा फसल के ऊपर कपड़े सिलाई के धागे लगा दें, तो तोते बीज को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं."