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कद्दू और इसके बीज पोषण का भंडार, गर्भवती महिलाओं के लिए है फायदेमंद

कद्दू की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा, फल से लेकर बीज तक की बाजार में डिमांड.

Pumpkin seeds nutrition storehouse
कद्दू के फल से लेकर बीज तक की बाजार में डिमांड (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : November 28, 2025 at 7:58 PM IST

5 Min Read
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शहडोल: हरी सब्जियां सेहत के लिए वरदान होती हैं. कुछ सब्जियां तो ऐसी होती हैं, जिनका फल और बीज दोनों ही खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी ही एक सब्जी है कद्दू, जिसे खाने पर सेहत तो दुरुस्त रहती ही है, इसके अलावा इसके बीज का सेवन करने से शरीर को अनेक पोषक तत्व मिलते हैं. इसके लाभकारी गुणों के चलते बाजार में कद्दू के बीज अलग से भी बेचे जाते हैं.

बाजार में कद्दू के क्या दाम?

कद्दू एक ऐसी सब्जी है, जिनकी डिमांड हर समय बनी रहती है. इसके शौकीन लोग सब्जी मार्केट से ढूंढ कर इसे घर लाते हैं. सब्जी व्यापारी राम प्रताप साहू बताते हैं कि "ठंड के मौसम में कद्दू की सब्जी केवल इसके शौकीन लोग खाते हैं, लेकिन गर्मियों में ये बहुत ज्यादा बिकता है. कद्दू अभी 40 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है."

कद्दू की खेती फायदे का सौदा

किसान राम सजीवन कचेर जो कि कई सालों से सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इसी खेती से उनका पूरा परिवार चल रहा है. वे कहते हैं कि "कद्दू की खेती एक ऐसी खेती होती है, जो कभी नुकसान देकर नहीं जाती. कच्चा फल अच्छे रेट पर बिक जा रहा है तो ठीक है, नहीं तो उसे पकने के बाद भी बेचा जा सकता है, क्योंकि पके कद्दू की सब्जियों की भी काफी डिमांड होती है."

Shahdol farmers Pumpkin cultivation
कद्दू की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा (ETV Bharat)

आधुनिक खेती के चलते 12 महीने कद्दू उपलब्ध

राम सजीवन बताते हैं कि "अगर कद्दू की फसल अभी लगाते हैं, ठंड के मौसम के कारण पौधे के ग्रोथ में थोड़ा वक्त लगेगा. लेकिन अच्छी देखभाल करेंगे तो फरवरी तक ये फसल देने लग जाएगा. जिससे काफी प्रॉफिट होता है, क्योंकि इस टाइम पर दाम अच्छे मिलते हैं. वहीं, कद्दू की खेती का सीजन जून-जुलाई में होता है. इस समय बेल पर अधिक फल लगते हैं. लेकिन आधुनिक खेती में 12 महीने लोग कद्दू की खेती करते हैं और यह बाजार में उपलब्ध होता है."

कैसे करें कद्दू की खेती

कद्दू की फसल को लगाने के तरीकों को लेकर किसान राम सजीवन कचेर बताते हैं कि "अगर आपके पास ड्रिप सिस्टम है, तो मल्चिंग के साथ बेड बनाकर इसे लगा दें और लाइन से लाइन की दूरी 8 फीट तथा पौधे से पौधे की दूरी 3 फिट रखें. यदि आपके पास ड्रिप सिस्टम नहीं है, तो 2x2 का गड्ढा बनाकर इसे लगा सकते हैं. गड्ढों के बीच की दूरी 8 से 10 फीट की रखें. एक गड्ढे में कम से कम 4 से 5 बीज लगा दें."

कद्दू के बीज में पोषक तत्वों की भरमार

कद्दू के बीज में भी पोषक तत्वों की भरमार होती है. इसे लेकर आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि "कद्दू बीज को कई और नाम से भी जाना जाता है. जिसे पंपकिन सीड्स या मगज भी कहा जाता है. जो बीज एक पौधे को बनाने की क्षमता रखता है, इसी से समझ सकते हैं कि उस बीज में कितने न्यूट्रिएंट्स होते हैं. कद्दू के बीज भी न्यूट्रिशन से भरपूर होते हैं. ये बहुत सारी बीमारियों को टालने में कारगर है. इसलिए आदिकाल से ही इसे बहुत उपयोगी माना जाता है."

Shahdol Pumpkin cultivation Method
कद्दू के फल और बीज में पोषण का भंडार (ETV Bharat)

कद्दू और इसके बीज खाने के फायदे

  • इसमें फास्फोरस, मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए हड्डियों के लिए बहुत अच्छा होता है. क्योंकि फॉस्फोरस मैग्नीशियम की कमी के कारण ही हड्डियां कमजोर हो रही हैं. आज के समय में ऑस्टियोआर्थराइटिस, ऑस्टियो सोरायसिस जैसी बीमारियां हो रही हैं. कद्दू के बीज के सेवन से इसमें काफी फायदा मिल सकता है.
  • कद्दू बीज में फाइबर की अच्छी खासी मात्रा होती है, तो ये कॉन्स्टिपेशन नहीं होने देता है. फाइबर होने से नसों को साफ रखता है.
  • कद्दू बीज डायबिटिक फ्रेंडली भी है. इसमें शुगर कंटेंट बहुत कम होता है. डायबिटिक लोग भी इसको ले सकते हैं. माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स और ट्रेस मिनरल्स इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.

गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद

अंकित नामदेव बताते हैं कि "कद्दू का नित्य सेवन किया जा सकता है. आमतौर पर लोग इसे कच्चा खाते हैं. इसे हल्का भून कर या इसको फुला करके पीसकर मिल्क बनाकर भी कद्दू बीज का सेवन लोग करते हैं. कद्दू गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है, वे इसको खा सकती हैं. इससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा."

कद्दू की सब्जी खाने के फायदे

आयुर्वेद डॉक्टर बताते हैं कि "कद्दू खाने के भी कई फायदे होते हैं. इसे आयुर्वेद में कद्दू या कुष्मांड बोला गया है. कुष्मांड मानसिक क्षमता भी बढ़ाता है और खास तौर पर जिनको पित्तज बीमारियां होती हैं, उनके लिए कुष्मांड वरदान है. पित्तज की बीमारी होने पर पेठे या कद्दू का पानी भी पीते हैं. इसका एक बना हुआ मेडिसिन कुष्मांड रसायन मार्केट में भी उपलब्ध है, जो कि पित्तज बीमारी, जैसे हाथ पैर में जलन, छाती में जलन, खट्टी डकार में अत्यंत उपयोगी होता है."