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मध्य प्रदेश के 2 वन कर्मियों को राष्ट्रीय सम्मान, डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने गज गौरव अवॉर्ड से नवाजा

गज गौरव अवॉर्ड में शहडोल का जलवा, विशाखापट्टनम में 2 वन कर्मियों को मिला अवॉर्ड, जानिए क्यों है खास? अखिलेश शुक्ला की रिपोर्ट.

shahdol Gaj Gaurav Award
आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने गज गौरव अवॉर्ड से नवाजा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 15, 2026 at 4:08 PM IST

6 Min Read
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शहडोल: शहडोल संभाग में पिछले कई सालों से हाथियों का मूवमेंट लगातार बना हुआ है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 50 से 70 की संख्या में हाथियों ने अपना परमानेंट ठिकाना बना रखा है. इसके अलावा शहडोल के उत्तर वन मंडल में भी 25 हाथी बाणसागर के बैक वाटर वाले एरिया में पिछले डेढ़ साल से रह रहे हैं. इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ के रास्ते अनूपपुर होते हुए शहडोल जिले में अक्सर हाथियों का आगमन होता रहता है.

क्षेत्र में इन हाथियों के एंट्री के साथ ही वन विभाग की चुनौतियां बढ़ जाती है. हाथी मानव द्वंद को कैसे रोका जाए, हाथियों की सुरक्षा एक बड़ा चैलेंज होता है, और इन्हीं हाथियों के महत्वपूर्ण प्रबंधन और बेहतर कार्य के लिए अब शहडोल जिले के दो वन कर्मियों को गज गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है जो जिले के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

प्रतिबद्धता, साहस और प्रभावित संघर्ष को मिला सम्मान (ETV Bharat)

गज गौरव अवॉर्ड में शहडोल का जलवा

भारत सरकार हाथियों के संरक्षण, मानव हाथी संघर्ष के प्रबंधन और बेहतर योगदान देने वाले व्यक्तियों को हर साल विश्व हाथी दिवस के अवसर पर गज गौरव अवॉर्ड से सम्मानित करती है. ये एक तरह का राष्ट्रीय सम्मान है, जो अपने आप में ही बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है. ये पुरस्कार पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय हर वर्ष विश्व हाथी दिवस के अवसर पर देता है. जिसमें वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों के सराहनीय कार्यों को मान्यता देना होता है.

गज गौरव अवॉर्ड मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि

इस बार गज गौरव अवॉर्ड 2026 का आयोजन आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित किया गया, हालांकि ये अवार्ड 13 अगस्त को दिया गया. जो कि आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने दिया है. जिसमें शहडोल के दक्षिण वन मंडल के बुढार रेंज में तैनात तत्कालीन वनरक्षक सम्हारुद्दीन बैगा और बुढार रेंज के वनरक्षक राजेश बैगा को संयुक्त तौर पर गज गौरव अवॉर्ड दिया गया है. जो शहडोल में पहली बार किसी वनकर्मी को मिला है.

Andhra Deputy CM Pawan Kalyan
वन कर्मी सम्हारुद्दीन और राकेश को मिला गज गौरव अवॉर्ड 2026 (ETV Bharat)

ये शहडोल और पूरे मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इस साल मध्य प्रदेश में सिर्फ शहडोल के ही इन 2 वनकर्मियों को संयुक्त तौर पर गज गौरव अवॉर्ड संयुक्त तौर पर दिया गया है.

क्यों दिया गया ये अवॉर्ड

आखिर शहडोल जिले के सम्हारुद्दीन बैगा और राकेश बैगा को ही ये अवार्ड क्यों दिया गया, इसे लेकर बताया जा रहा है कि इन दोनों वनकर्मियों ने शहडोल क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन में असाधारण समर्पण दिखाया है. मानव हाथी संघर्ष प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

Gaj Gaurav Award 2026
गज गौरव अवॉर्ड 2026 (ETV Bharat)

2025-26 के दौरान बुढ़ार रेंज में हाथियों के झुंडों की आवाजाही और लंबे समय तक मौजूदगी के दौरान उन्होंने जन सुरक्षा सुनिश्चित करने और हाथियों की सुरक्षित आवास को सुगम बनाने के लिए लगातार दिन रात निगरानी की, गहन रात्रि गश्त और स्थानीय समुदायों के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित किया.

प्रतिबद्धता, साहस और प्रभावित संघर्ष को मिला सम्मान

इन दोनों ने क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया और हाथियों की गतिविधियों के बारे में समय पर जानकारी भी दी. कमजोर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने में सहायता की और प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिलाने के लिए राजस्व विभाग के साथ समन्वय किया. दोनों के समय पर हस्तक्षेप और निरंतर जमीनी उपस्थिति में हाथियों को अनूपपुर क्षेत्र की ओर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने में मदद की.

इसके अलावा स्थानीय निवासियों की संपत्ति को होने वाले नुकसान को भी कम किया. उनकी प्रतिबद्धता साहस और प्रभावित संघर्ष निवारण प्रयासों के साथ ही हाथी संरक्षण को मजबूत किया है. स्थानीय निवासी और हाथियों के बीच शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को बढ़ावा दिया है.

अवॉर्ड की खुशी

अवार्ड मिलने के बाद 36 वर्षीय सम्हारुद्दीन बैगा और 30 वर्षीय राकेश बैगा दोनों बेहद खुश हैं. राकेश बैगा अभी भी बुढार रेंज में पदस्थ हैं. वहीं सम्हारुद्दीन बैगा शहडोल साउथ के बुढार रेंज के खोह में कुछ साल पहले तक ड्यूटी किये थे. वह अब शहडोल नरसराहा डिपो में पदस्थ हो चुके हैं. सम्हारुद्दीन बैगा बताते हैं कि इस अवॉर्ड के मिलने के बाद बड़ी खुशी हो रही है.

कठिन काम करने में मजा

सम्हारुद्दीन बैगा ने बताया, "अगर अच्छे कार्य को प्रोत्साहित किया जाए तो और बेहतर करने का मनोबल बढ़ता है. बिना अधिकारियों के मार्गदर्शन के यह संभव नहीं हो सकता था. शहडोल में जिस तरह से हाथी आते हैं चले जाते हैं, इसका प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन मुझे ऐसे कार्य को करने में मजा आता है. इसलिए जब भी मुझे मौका मिला तो मैंने काम को पूरी शिद्दत के साथ किया. इसके लिए दिन-रात मेहनत की और इस कार्य को बखूबी निभाया."

शहडोल संभाग हाथियों का गढ़

शहडोल संभाग पिछले कुछ सालों से हाथियों का गढ़ बन चुका है. बांधवगढ टाइगर रिजर्व तो हाथियों के लिए फेमस है. यहां इनकी एक बड़ी आबादी फल-फूल रही है. यहां हाथियों की संख्या में लगातार इजाफा भी हो रहा है. बांधवगढ टाइगर रिजर्व इनका प्रबंधन भी अब बेहतर तरीके से कर रहा है.

वहीं शहडोल के बाणसागर के बैक वाटर वाले एरिया में भी 25 हाथियों का एक झुंड है. यहां भी एक बड़ी हाथियों की आबादी फल फूल रही है और पिछले डेढ़ साल से रह रही है. इसके अलावा भी लगातार यहां हाथियों का मूवमेंट छत्तीसगढ़ से बना रहता है और शहडोल जिले के अलग-अलग जगह पर इनका मूवमेंट देखने को मिलता है. ऐसे में यहां हाथियों के प्रबंधन की बहुत जरूरत है.