पीला सोना की खेती करेगी मालामाल, किन किस्मों का करें चयन, छू भी न सके चारकोल रॉट
मध्य प्रदेश के किसानों को कृषि वैज्ञानिक की सलाह, बारिश के समय कैसे करें सोयाबीन की खेती, अच्छी फसल के साथ होगी कमाई, पढ़े खबर. शहडोल से अखिलेश शुक्ला की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 7, 2026 at 2:44 PM IST
|Updated : July 7, 2026 at 4:10 PM IST
शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल में भले ही जून का शुरुआती महीना सूखा रहा हो, लेकिन आखिर में शुरू हुई बारिश का दौरा जुलाई के महीने में थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि अभी जो बारिश हो रही है, ये किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. किसानों की खेती के लिए यह बारिश एकदम सही है. शहडोल जिले में भले ही धान की खेती सबसे ज्यादा बड़े रकबे में की जाती है, लेकिन कई किसान सोयाबीन की भी खेती करते हैं. जो किसान सोयाबीन की खेती करते हैं, उन्हें इस बार किस्मों के चयन में खास ध्यान रखना होगा, जिससे चारकोल रॉट जैसे बीमारियों से अपने सोयाबीन की फसल को बचा सकते हैं.
सोयाबीन की खेती से होगी कमाई
सोयाबीन को पीला सोना के नाम से भी जाना जाता है. किसानों के लिए इसे कैश क्रॉप भी कहा जाता है, क्योंकि कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है. मध्य प्रदेश के लिए इसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी मानी जाती है. शहडोल में सोहागपुर ब्लॉक के 25 से 30 गांव के किसान सोयाबीन की खेती करते हैं और इसी सोयाबीन की खेती में पिछले कई दशक से वह समृद्ध भी हुए हैं. ऐसे में सोयाबीन की खेती आर्थिक मजबूती के लिए भी शहडोल में अपनी पहचान रखती है. इसे कमाई करने वाली फसल भी माना जाता है.
सोयाबीन की खेती कैसे करें ?
कृषि वैज्ञानिक डॉ बी के प्रजापति बताते हैं कि "सोयाबीन की खेती के लिए गर्म और नम जलवायु बेहतर होती है. जहां भी किसान सोयाबीन की खेती करना चाहता है. वहां इस बात का ध्यान रखे कि दोमट मिट्टी या काली भारी मिट्टी हो तो बहुत ही अच्छी बात है. ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो और मिट्टी का पीएच मान 6.500 से 7.50 के बीच होना चाहिए. कोशिश करें कि जल भराव वाले खेतों में इसकी खेती न करें, क्योंकि इसे बहुत पानी की आवश्यकता नहीं होती है. जहां ज्यादा जल भरा होगा वहां ये गल जाएगी.
मिट्टी को तैयार करने के लिए कोशिश करें कि जैसे ही बारिश हो दो-तीन बार कल्टीवेटर से जुताई कर लें, मिट्टी को भुरभुरी कर लें, और फिर बुवाई करके हल्का पाटा लगा दें. जिससे बीज पूरी तरह से मिट्टी में दब जाए, इसके बुवाई के लिए 15 जून से 15 जुलाई का वक्त बेहतर माना जाता है. अभी शहडोल में भी बारिश हो रही है, तो किसान घबराएं नहीं थोड़ा इंतजार कर लें, और जैसे ही बारिश थोड़ी मोहलत दे तो इसकी बुवाई शुरू कर दें.

कुछ किसान जहां पर अभी कम बारिश हुई है तो किसान बुवाई भी कर रहे हैं. कोशिश करें कि बुवाई से पहले बीज को उपचारित कर लें, उसके बाद ही बुवाई करें, और बीज की मात्रा की बात करें तो छोटे दाने वाली किस्म के लिए 70 से 75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और बड़े दाने वाली किस्म के लिए 80 से 85 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होगी.
सोयाबीन की कौन सी किस्में बेस्ट
कृषि वैज्ञानिक प्रजापति बताते हैं कि शहडोल में सोयाबीन की खेती लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर होती है. जिले में कई किसान सोयाबीन की खेती करते हैं, कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि किसानों को ये सलाह है कि सोयाबीन की जो किस्म है, जैसे जवाहर सोयाबीन 2029, जवाहर सोयाबीन 2034, जवाहर सोयाबीन 2069, जवाहर सोयाबीन 2116, इसी प्रकार से एनआरसी 150 है, यह जो सोयाबीन की किस्में हैं, ये मुख्य रूप से चारकोल रॉट जैसे बीमारियों से प्रतिरोधी किस्में होती हैं.

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मशीन से करें बुवाई, होगा लाभ
वे बताते हैं कि हमारे क्षेत्र में किसान अब तक इस फसल की बुवाई छिड़काव विधि से करते थे. इसमें भी किसानों को सलाह है, कि जो अभी दलहन और तिलहन की फसलें हैं, जिसमें सोयाबीन तिलहनी फसल है, इसकी बुवाई आप रिज बेड प्लांटर मशीन या ब्रॉड बेड फेरो मशीन से करते हैं, तो लाभ होगा. मान लीजिए कि अत्यधिक बारिश अगर कम समय में होती है, तो उसमें नाली के माध्यम से पानी निकासी हो जाएगी और पानी भराव ना होने की स्थिति में आपकी फसल बच जाएगी. अगर कम बारिश होती है, तो भी फायदेमंद है. इसमें नमी संरक्षित रहेगी तो आपकी फसल लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी."

