शुद्ध खाने के शौक ने शुरू कराया स्टार्टअप, दो भाइयों ने खड़ा कर दिया 70 गायों का डेरी फॉर्म
शहडोल में दो भाइयों का गजब स्टार्टअप, घर की एक गाय से शुरू कर 70 गायों का बना दिया फॉर्म, 100 गायों का है टारगेट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 2:20 PM IST
शहडोल: इसे कहते हैं शौक को ही रोजगार बना देना. शहडोल जिले के दो भाइयों ने गांव में ही एक ऐसा स्टार्टअप शुरू कर दिया, जो अब लोगों के लिए एक मॉडल बन चुका है. इससे न केवल वो खुद अच्छी आय हासिल कर रहे हैं, लोगों को शुद्ध चीजें भी अवेलेबल करा रहे हैं. गौ सेवा भी कर रहे हैं, साथ में कई लोगों को रोजगार भी दे रखा है. अब उनका ये स्टार्टअप दूसरे युवाओं के लिए भी कुछ अलग हट के करने की प्रेरणा बन रहा है.
शौक को बना दिया स्टार्टअप
शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर है नरगी गांव. इस गांव में दो भाइयों ने गजब का स्टार्टअप शुरू कर दिया है. आशीष कुमार गुप्ता और अजीत गुप्ता का ये स्टार्टअप अब दूसरे युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा बन रहा है. आशीष गुप्ता बताते हैं कि "उनके पिताजी पहले एक गाय रखते थे. उससे साइड खर्च चलाने के लिए गांव में ही कुछ दूध बेच देते थे. घर में शुरू से ही दूध हो रहा था तो शुद्ध खाने का शौक था. उसी शौक को उन्होंने अपना स्टार्टअप बना दिया और खुद तो पैसे कमा ही रहे हैं, साथ में गांव में 10 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रखा है."
आशीष गुप्ता बताते हैं कि जब वह शहडोल पहुंचे और उन्होंने बजरंग डेरी शुरू की थी तो उन्हें इस बात की काफी कमी महसूस हो रही थी कि खुद की गाय हो, खुद का पूरा स्ट्रक्चर सेटअप हो और घर से ही दूध निकालें तो इस बिजनेस को और गति दिया जा सकता है. ऐसे में एक बड़ा स्टार्टअप खड़ा करने की सोची. इसकी शुरुआत उन्होंने दो से ढाई साल पहले से ही कर दी थी और आज उनकी सोच फली भूत होती दिख रही है.
अभी 70 से ज्यादा गाय, 100 गाय का लक्ष्य
आशीष गुप्ता के डेरी फार्म में अभी अलग-अलग नस्ल की 70 से ज्यादा गाय हैं. अब उनके छोटे-छोटे बछड़े भी हो गए हैं. आशीष का लक्ष्य है कि उनके इस डेरी फॉर्म में 100 गाय हो जाएं. इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं. हालांकि उनका कहना है कि अभी वह कोशिश कर रहे हैं कि जो नई जेनरेशन इन गायों से तैयार हो रही है उन्हीं से इन सब गायों का लक्ष्य पूरा किया जाए और अब गाय खरीदनी न पड़े. क्योंकि अच्छी नस्ल की एक गाय लिए भी लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं. इसलिए बजट भी बिगड़ता है और खर्च भी ज्यादा आता है. आशीष का मानना है की बड़ा सेटअप तैयार करने के लिए कम से कम 100 गाय होनी जरूरी है जिससे पर्याप्त दूध का उत्पादन हो सके.

आशीष कहते हैं कि उनके यहां एचएफ, साहिवाल और मिक्स ब्रीड गायों की संख्या ज्यादा है. उनका मानना है कि जो यह मिक्स ब्रीड नस्ल की गाय होती हैं इनका दूध बहुत अच्छा होता है क्वालिटी वाला होता है और इसीलिए उनकी संख्या वो अपने डेरी फार्म में ज्यादा बढ़ा रहे हैं. हालांकि गायों के अलावा उनके डेरी फार्म में एक दो भैंस भी हैं.
एक दिन में कितने दूध का प्रोडक्शन
आशीष गुप्ता के भाई अजीत गुप्ता इस डेरी फार्म का पूरा काम देखते हैं और कर्मचारियों से काम भी करवाते हैं. वो बताते हैं की सुबह 4 बजे से गायों की सेवा में वह लग जाते हैं. पहले उन्हें चारा देते हैं, फिर सुबह 5 बजे से दूध निकालना शुरू कर देते हैं, क्योंकी इतनी गायों से दूध निकालना भी एक चुनौती होता है. अजीत गुप्ता अकेले ही सभी गायों से दूध निकालते हैं. उनका मानना है कि मशीन से दूध निकालना सही नहीं है. अभी वर्तमान में यहां 45 से ज्यादा गाय दूध दे रही हैं जिनसे करीब 600 लीटर से ज्यादा दूध अभी उनके डेरी फार्म में हर दिन निकल रहा है. सभी गायों से दूध निकालने में लगभग 2 से 3 घंटे का वक्त लग जाता है. शाम को 4 बजे से एक बार फिर से उन्हें चारा देना शुरू कर देते हैं और 5 बजे शाम से फिर से दूध निकालना शुरू कर देते हैं.

खेत में बना दिया फॉर्म
आशीष गुप्ता ने इस डेरी फार्म के स्टार्टअप को शुरू करने के लिए अपने खेत को ही चुना. आम के बगीचे के बीच में ही उन्होंने फॉर्म लगा रखा है. ऐसे में आम की छांव भी इन गायों को मिलती है. वह गाय के लिए चारा भी लगा लेते हैं. इसके अलावा गायों से जो गोबर का प्रोडक्शन हो रहा है, अभी तो खेतों के लिए ही बेच देते हैं. लेकिन आगे चलकर इससे भी कुछ प्रोडक्ट बनाने की उनकी तैयारी चल रही है.
कितना खर्च कितनी आमदनी
अब सवाल उठता है इतना बड़ा स्टार्टअप तो शुरू कर लिया लेकिन क्या इससे आमदनी होती है. हालांकि, आशीष गुप्ता इसे लेकर काफी खुश भी हैं कि उन्होंने जिस तरह से सोचा था रिजल्ट भी उससे बेहतर मिल रहा है. आशीष गुप्ता बताते हैं कि दो ढाई साल से उन्होंने इस सेटअप को लगाना शुरू किया था और अभी जाकर 1 महीने पहले उनका पूरा सेटअप कंप्लीट हो पाया है. कुछ-कुछ काम बचे हुए हैं, तो अभी यह क्लियर नहीं हो पा रहा है कि कितना खर्च लग रहा, कितना मुनाफा हो रहा है. लेकिन इस काम की गति को देखकर और मारकेट रिस्पांस को देखकर वो काफी खुश और उत्साहित हैं.

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आशीष बताते हैं कि इस फॉर्म को लगाने के लिए वो कई सालों से धीरे-धीरे करके लगे हुए हैं और कई सालों में वो करोड़ों रुपए की लागत लगा चुके हैं. इसमें कुछ लोन भी ले रखा है, तब जाकर वह यहां तक पहुंच सके हैं. उनका मानना है कि सेटअप पूरी तरह से जब कंप्लीट हो जाएगा तो और अच्छी कमाई होगी.

