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रिम्स की फार्मेसी में दवाओं की भारी किल्लत, सर्दी-खांसी, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज तक की दवाई नहीं, पैसे देकर बाहर से खरीदने को मजबूर लोग

रिम्स के दवाखाना में कई जरूरत की दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं. जिसके कारण मरीजों को परेशानी हो रही है.

RIMS pharmacy
रिम्स (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 20, 2026 at 12:06 PM IST

5 Min Read
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रिपोर्ट: उपेंद्र कुमार

रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में डॉक्टर मरीजों की जांच के बाद दवाएं लिख तो रहे हैं, लेकिन रिम्स ओपीडी डिस्पेंसरी में दवाएं नहीं मिल रही हैं. इनडोर मरीजों के लिए भी हालात लगभग ऐसे ही हैं. अस्पताल की फार्मेसी में मुफ्त दवाओं की कमी से गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है, जो पैसे की कमी के कारण दवाएं खरीद नहीं सकते.

जब ईटीवी भारत संवाददाता ने रिम्स में दवाओं की गंभीर कमी की जांच की, तो पता चला कि 19 जनवरी, 2026 को ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से लेकर एलर्जी तक की कई दवाएं उपलब्ध नहीं थीं. चाहे वह चतरा के मरीज मोहम्मद तौहीद हों, या रामगढ़ से एक मरीज को रांची लेकर विनय, या स्थानीय निवासी मनीष, सभी को रिम्स सरकारी डिस्पेंसरी से सिर्फ गैस राहत की एक दवा दी जा रही थी और सलाह दी जा रही थी कि दो जेनेरिक दवाएं और बाकी जरूरी दवाएं अस्पताल के बाहर अन्य दवाखाना में मिल जाएगी.

मरीज और रिम्स के अधिकारियों के बयान (ईटीवी भारत)

रिम्स की ओर से मरीजों को ये तो बताया जा रहा है कि दवाएं बाहर मिल जाएंगी, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि ये दवाएं बाहर पैसे से खरीदनी पड़ेंगी, जबकि सरकारी योजना के तहत रिम्स के दवाखाना में मुफ्त दवाएं देने का प्रावधान है.

अगर हम रिम्स फार्मेसी में लगे चार्ट को सही भी मानें, तो 19 जनवरी, 2026 को लिस्टेड 64 तरह की दवाओं (टैबलेट, कैप्सूल, सिरप, ड्रॉप्स) में से ज्यादातर पर "NA" (नॉट अवेलेबल) लिखा हुआ था. रिम्स ओपीडी में मरीजों के लिए सिर्फ 22 तरह की दवाएं उपलब्ध थीं.

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दवा खरीदने आए लोग (ईटीवी भारत)

ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं भी नहीं उपलब्ध

हैरानी की बात है कि जहां राज्य सरकार, केंद्र सरकार के सहयोग से, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की गंभीरता को कम करने के लिए हर जिले के सदर अस्पतालों में NCD (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) क्लिनिक चला रही है, वहीं राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की फार्मेसी में ब्लड प्रेशर, शुगर और एलर्जी जैसी बीमारियों के लिए सेटीरिजिन जैसी आम दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

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रिम्स दवाखाने में दवाओं का चार्ट (ईटीवी भारत)

बिना दवाओं के रिम्स की डिस्पेंसरी

  • ज्यादा दवाओं के सामने लिखा है नॉट अवेलेबल यानी 'NA'
  • उच्च रक्तचाप की दवा नहीं है उपलब्ध
  • किसी भी तरह की एलर्जी में इस्तेमाल की जाने वाली दवा सेट्रिजिन भी नहीं है उपलब्ध
  • कई जरूरी एंटीबायोटिक्स बाहर से खरीदने को मजबूर हैं मरीज और उनके परिजन
  • दर्द की दवा आई-ब्रूफेन देकर मरीजों को दर्द से राहत देने की स्थिति में भी नहीं है रिम्स
  • खून की कमी से जूझ रहे झारखंड के रिम्स में आयरन की गोली भी नदारद
  • विटामिन बी कॉम्प्लेक्स भी नहीं है उपलब्ध
  • छोटे बच्चों को बुखार होने पर दी जाने वाली पैरासिटामोल ड्रॉप्स भी नहीं
  • विटामिन डी, जिंक की गोलियां भी गायब
  • ज्यादातर ऑइंटमेंट नहीं है उपलब्ध

पहले से बेहतर हुई है दवाओं की उपलब्धता - फार्मेसी इंचार्ज

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों और उनके परिवारों को दवाएं ढूंढने में हो रही परेशानी भले ही जस की तस बनी हो लेकिन फार्मेसी के सीनियर इंचार्ज अमित कुमार का दावा है कि हाल ही में 16-17 तरह की दवाएं आने से स्थिति में सुधार हुआ है. हैरानी की बात है कि अमित कुमार ने यह भी कहा कि भले ही विटामिन C की दवा नहीं है, लेकिन कैल्शियम की दवा देकर उसकी कमी पूरी की जाती है.

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रिम्स दवाखाना (ईटीवी भारत)

जब ईटीवी भारत की टीम ने रिम्स चिकित्सक शिक्षक संघ के अध्यक्ष और डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ प्रभात कुमार से रिम्स फार्मेसी में दवाओं की भारी कमी के बारे में बात की, तो उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का काम मरीजों की जांच करना और उनकी बीमारी के हिसाब से दवाएं बताना है. उन्होंने कहा कि वह हर महीने अधीक्षक से दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मांग करते रहते हैं.

जब ईटीवी भारत संवाददाता ने इस पूरे मामले पर रिम्स मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. हितेंद्र बिरुआ से संपर्क किया, तो उन्होंने बस इतना कहा कि सभी जरूरी दवाएं जल्द ही रिम्स फार्मेसी में उपलब्ध होंगी. उन्होंने कहा कि जो दवाएं अभी उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए ऑर्डर दे दिए गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि जिन दवाओं के रेट फाइनल नहीं हुए हैं, उनके लिए ऑर्डर नहीं दिए गए हैं और इस काम के लिए हॉस्पिटल मैनेजर को जिम्मेदारी दी गई है.

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