कोटा, जयपुर, अजमेर में बसों की हड़ताल का मिला-जुला असर, यात्री परेशान
बस ऑपरेटरों की हड़ताल का कोटा और हाड़ौती में मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है.

Published : February 24, 2026 at 3:11 PM IST
कोटा/जयपुर : प्रदेश में बस ऑपरेटरों की हड़ताल है, जिसमें कोटा और हाड़ौती संभाग के ऑपरेटर भी शामिल हैं. मंगलवार को इसका मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है. निजी बस ऑपरेटर की कुछ बसें बंद रहीं, जबकि कई रूट पर बसें दौड़ रह थी. अधिकांश बस स्टैंड पर खड़ी रही हैं. इनमें स्टेट कैरिज से लेकर स्लीपर कोच और नाइट सर्विस वाली बसें भी शामिल हैं. वहीं, जयपुर और अजमेर में भी प्राइवेट बसों की हड़ताल का असर दिखाई दिया.
कोटा के बस ऑपरेटर अशोक चांदना का कहना है कि हाड़ौती संभाग की करीब 500 से ज्यादा बसें इस हड़ताल में बंद हैं. यात्रियों का कहना है कि अपने सफर को एक-दो दिन टालना पड़ेगा. वहीं, शादी-विवाह का सीजन भी चल रहा है. इसके चलते जाना भी कई जगह पर महत्वपूर्ण है. कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी जॉब ज्वाइन करने के लिए जाना है, हड़ताल की जानकारी भी नहीं थी, इसलिए भी समस्या है. कई घंटे तक लोग बस स्टैंड पर इंतजार करते भी नजर आए.
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बसों का रिजर्वेशन किया गया बंद : स्लीपर कोच बस के ऑपरेटर अशोक चांदना का कहना है कि सभी बस संचालकों ने पूरे राजस्थान में ही इंटरसिटी चलने वाली स्लीपर कोच बेसन का रिजर्वेशन बंद कर दिया है. इसमें एसी और वोल्वो सभी श्रेणी की बसें शामिल हैं. इन बसों में ही अधिकांश यात्री राजस्थान में सफर करते हैं. पहले से हो रही बुकिंगों का पैसा भी वापस रिफंड किया जा रहा है. कोटा से ही लाखों रुपए का किराया रोज बस ऑपरेटर रिफंड कर रहे हैं. ये बसें कोटा से उदयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, पाली, सिरोही, जैसलमेर, जयपुर व जालौर के लिए जाती हैं. राज्य के बाहर अहमदाबाद, दिल्ली, गोरखपुर, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, कानपुर व लखनऊ सहित कई शहरों में भी सेवाएं हैं.
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न्यू बॉडी कोड से भी समस्या : बस ऑपरेटर अशोक चांदना का कहना है कि बस वालों के बिना नियम व कानून चालान बनाएं जा रहे हैं. वाहनों में लगेज व छत पर कैरियर नहीं हैं. गाड़ियों की फिटनेस हो नहीं रही है, फिर कैसे गाड़ी चलाई जाए? दूसरी तरफ न्यू बॉडी कोड लागू किया है, जिसमें से पहले से बनी हुई बसों को सरकार चलने से रोक रही है. हमारी मांग है कि जिन बसों से सरकार ने टैक्स लिया है और जिनको परमिशन पहले से मिली हुई है, उन्हें चलने दें. अब जो नई बस बन रही है, उन्हें न्यू बॉडी कोड से बनाया जाए. पुरानी बसों के लिए एक समय निर्धारित कर दिया जाए. उसके बाद इन बसों की फिटनेस और टैक्स लेना बंद कर दिया जाए ताकि वह अपने आप बंद हो जाएं.

यात्रियों को करना पड़ रहा इंतजार : कोटा से श्योपुर, शिवपुरी, इटावा, सांगोद, छीपाबड़ौद, बारां, चेचट, रामगंज मंडी, बूंदी, नैनवा, लाखेरी व इंद्रगढ़ सहित कई रूट पर लोक परिवहन व स्टेट कैरिज बसें नहीं चल रही हैं. इनमें से कई रूट ऐसे हैं, जिनमें रोडवेज की बसें भी नहीं जाती हैं. इसके चलते यात्रियों को इंतजार करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ आम दिनों की तरह यात्री पहले बड़ तिराहे के नजदीक प्राइवेट बस स्टैंड पहुंचते हैं. बस की हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद रोडवेज बस स्टैंड जा रहे हैं. ऐसे में उन्हें ऑटो या टैक्सी का खर्चा भी उठाना पड़ रहा है. हड़ताल का असर रोडवेज की बसों में कुछ ही यात्रीभार देखने को मिला. रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों की संख्या आम दिनों की संख्या में मंगलवार को ज्यादा नजर आ रही है, लेकिन रोडवेज ने बसें नहीं बढ़ाई हैं. रोडवेज के चीफ मैनेजर कोटा अजय कुमार मीणा का कहना है कि ज्यादा यात्री बाहर नहीं बढ़ा है, अधिकांश निजी बसें चल रही थी, इसलिए रोडवेज और निजी बसों दोनों में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है.

हड़ताल से यात्रियों को हुई परेशानीः प्राइवेट बसों की हड़ताल से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. ऑपरेटरों की ओर से सोमवार रात 12 बजे से प्राइवेट बसों का चक्का जाम कर दिया गया. परिवहन विभाग की कार्रवाई के विरोध में ऑल राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस आपरेटर एसोसिएशन की हड़ताल को प्रदेश भर के सभी बस संगठनों का समर्थन मिला है.
प्राइवेट बसों की हड़ताल का असर जयपुर, उदयपुर, सीकर, समेत विभिन्न शहरों में देखने को मिला है. सीकर में खाटूश्यामजी का मेला चल रहा है. मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं. वापस जाने के लिए बस नहीं मिलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इससे रोडवेज बसों पर यात्री भार ज्यादा बढ़ गया है. जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर समेत विभिन्न इलाकों में प्राइवेट बस स्टैंड पर यात्री बसों का इंतजार करते हुए नजर आए.
ऑल राजस्थान कांट्रेक्ट कैरिज बस आपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के मुताबिक परिवहन विभाग की ओर से नियमों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है. नए मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों को पुरानी बसों पर लागू किया जा रहा है. परिवहन विभाग की ओर से एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है. आरटीओ की कार्रवाई में आरसी को भी सस्पेंड किया जा रहा है. परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई के दौरान यात्रियों को भी बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है.
उन्होंने बताया कि प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने सोमवार रात 12 बजे से हड़ताल शुरू कर दी. प्राइवेट बसों की हड़ताल के चलते प्रदेश भर में प्राइवेट बसों का संचालन बंद हो गया. प्राइवेट बसों के संचालन बंद होने से आम यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्राइवेट बस ऑपरेटरों का कहना है कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन जारी रहेगा.
प्राइवेट बस ऑपरेटरों की मांगः प्राइवेट बस ऑपरेटरो की मांग है कि परिवहन विभाग की कार्रवाई में गलत चालान नहीं बनाई जाए. बसों की आरसी सस्पेंड नहीं की जाए. पुरानी गाड़ियों पर धारा 153 के तहत कार्रवाई नहीं की जाए, सवारी से भरी बसों के यात्रियों को रास्ते में नहीं उतारा जाए. बस और टैक्सी में लगेज करियर दोबारा लगाने की अनुमति दी जाए.
...तो प्राइवेट बसें नहीं देंगेः अजमेर प्राइवेट बस एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के तहत सभी प्राइवेट बसें बनी हुई है, लेकिन राज्य सरकार और परिवहन विभाग की गलत नीतियों के कारण प्राइवेट बस खड़ी कर दी है. कोई नई बुकिंग नहीं ली जा रही है. अजमेर संभाग के सभी जिलों से आए प्राइवेट बसों के मालिकों की बैठक हुई. इसमें चक्का जाम को और प्रभावी बनाने के अलावा सड़क पर कोई प्राइवेंट बस नहीं चले इसके लिए समझाइश का दौर जारी है. उन्होंने बताया कि सरकार जब तक उनकी मांग नहीं मान लेती तब तक उनकी बसों के चक्के जाम ही रहेंगे. गुप्ता ने बताया कि प्राइवेट बस ऑपरेटर सभी हड़ताल पर हैं, ऐसे में 28 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी की सभा में लोगों के आने जाने के प्राइवेट बसें नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि बसें चाहिए तो राजस्थान रोडवेज से लें.

