उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति नियमों की उड़ रही धज्जियां! वापस आने को तैयार नहीं अधिकारी
उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति नियमों का नहीं हो पा रहा पालन, सालों से जमे अधिकारियों को मूल विभाग में वापस लाना हुआ मुश्किल, रिपोर्ट- नवीन उनियाल

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 6, 2026 at 3:46 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में सरकार ने प्रतिनियुक्ति को लेकर नियम तो बनाए, लेकिन इनका पालन कराने की हिम्मत नहीं दिखाई. स्थिति ये है कि विभिन्न विभागों में सालों से अधिकारी प्रतियुक्ति बने हुए हैं और इन्हें मूल विभाग में वापस लाना मुश्किल सा हो गया है. ये बात किसी एक विभाग की नहीं है. बल्कि राज्य के ऐसे तमाम विभाग हैं, जहां इसी तरह के हालात बने हुए हैं.
उत्तराखंड में सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्ति व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करना और विभिन्न परियोजनाओं में अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन अब यही व्यवस्था कई विभागों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. सरकार ने प्रतिनियुक्ति को लेकर स्पष्ट नियम और समय-सीमा तो तय की, लेकिन इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में शासन और विभाग अब तक प्रभावी साबित नहीं हो पाए हैं.
सिंचाई विभाग ने प्रतिनियुक्ति पर गए अपने कई अभियंताओं को वापस बुलाने को लिखी चिट्ठी: नतीजा ये है कि कई अधिकारी और अभियंता सालों से प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं और उनका मूल विभाग में लौटना लगभग असंभव होता जा रहा है. हाल ही में सिंचाई विभाग ने प्रतिनियुक्ति पर गए अपने कई अभियंताओं को वापस बुलाने के लिए शासन स्तर से लेकर विभागीय स्तर तक पत्राचार किया.
विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि जिन अभियंताओं का प्रतिनियुक्ति कार्यकाल पूरा हो चुका है, उन्हें बिना किसी देरी के अपने मूल विभाग में वापस लौटना होगा. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब ऐसे निर्देश जारी किए गए हों. इससे पहले भी कई बार पत्र लिखे गए, चेतावनियां दी गईं और वापसी के निर्देश जारी किए गए, लेकिन उनका अपेक्षित असर देखने को नहीं मिला.

कई अभियंता अपने मूल विभाग में लौटने को तैयार नहीं: स्थिति ये है कि तमाम निर्देशों और पत्राचार के बावजूद कई अभियंता अब तक अपने मूल विभाग में लौटने को तैयार नहीं हैं. खासतौर पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) और हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) जैसे संस्थानों में ऐसे कई अभियंता सालों से कार्यरत हैं, जिनकी प्रतिनियुक्ति अवधि काफी पहले समाप्त हो चुकी है. इसके बावजूद वे बिना किसी नए आदेश या स्पष्ट स्वीकृति के वहीं काम कर रहे हैं.
शासन की ओर से इन अधिकारियों और अभियंताओं को तय समय-सीमा के भीतर वापस लौटने के निर्देश दिए गए थे. यहां तक कि समय पर वापसी नहीं करने की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश मामलों में अधिकारी अपने मूल विभाग में नहीं लौटे. इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि सरकार के बनाए गए नियमों का पालन कराने में ही प्रशासन सफल नहीं हो पा रहा है, तो फिर इन नियमों की प्रभावशीलता कितनी रह जाती है.

सिंचाई विभाग में यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर दिखाई देती है. विभाग के कई अभियंता सालों पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत अन्य परियोजनाओं और संस्थाओं में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए थे, लेकिन उसके बाद उन्होंने मूल विभाग की ओर वापस लौटने की कोई इच्छा नहीं दिखाई. विभाग की ओर से कई बार पत्र लिखे गए और कार्रवाई का संकेत भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश अधिकारी अपने वर्तमान पदों पर बने रहे.
मूल विभागों में गहराती जा रही अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी: इसी तरह जलागम विभाग में भी सालों से कृषि विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे हैं. इनमें से कई अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति कार्यकाल समाप्त हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन उन्हें वापस लाने के प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं. इससे मूल विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी का संकट भी गहराता जा रहा है.
जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कही ये बात? वहीं, जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा का कहना है कि जो अधिकारी विभाग के लिए जरूरी हैं. उन्हें उनकी क्षमता के मुताबिक जिम्मेदारी देनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये भी माना कि प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप संचालित किया जाना जरूरी है.

दरअसल, प्रतिनियुक्ति को लेकर सबसे बड़ा विवाद तब पैदा होता है, जब अधिकारी और कर्मचारी अपने मूल विभाग की तुलना में प्रतिनियुक्ति वाले विभागों या संस्थाओं में काम करना ज्यादा सुविधाजनक समझते हैं. बेहतर कार्य परिस्थितियां, बड़े प्रोजेक्ट, शहरी क्षेत्रों में तैनाती और अन्य प्रशासनिक कारण भी इसके पीछे महत्वपूर्ण वजह माने जाते हैं. यही कारण है कि कई अधिकारी अपने मूल विभाग में लौटने से बचते दिखाई देते हैं.
क्या बोले सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम? इस पूरे मामले पर जब ईटीवी भारत ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम से बातचीत की तो उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग के कई अभियंता प्रतिनियुक्ति पर हैं और उनमें से कई का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है.

हालांकि, प्रमुख सचिव सुंदरम ने ये भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति अवधि को नियमों के अनुसार बढ़ाया जाता है, तो विभाग को उससे कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन जिन अधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, उन्हें या तो विधिवत विस्तार लेना होगा या फिर अपने मूल विभाग में वापस लौटना होगा.
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