रिम्स में MBBS से लेकर PG तक हर बैच में कुछ स्टूडेंट्स गुजर रहे डिप्रेशन से, सुसाइड केस के बाद डीन का चौंकाने वाला बयान
रिम्स में एमबीबीएस छात्र आत्महत्या की घटना के बाद प्रबंधन और छात्र सदमे में हैं. इस बीच डीन ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है.

Published : May 17, 2026 at 5:50 PM IST
रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस(RIMS) में 16 मई को MBBS द्वितीय वर्ष के प्रतिभावान छात्र की खुदकुशी के बाद रिम्स के बॉयज हॉस्टल में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है. अपने एक होनहार दोस्त को खोने के सदमे से छात्र उभरे नहीं हैं. वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि NEET जैसे कठिन प्रतियोगिता परीक्षा पास कर RIMS जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में नामांकन होने के बाद ऐसा क्यों है कि मेडिकल स्टूडेंट हॉस्टल के अपने कमरे में आत्महत्या कर लेते हैं. दूसरों के जीवन को बचाने के लिए मेडिकल क्षेत्र को अपना करियर बनाने वाले युवा क्यों डॉक्टर बनने की राह को बीच में छोड़ आत्महत्या करने को सोच लेते हैं?
इस संबंध में रिम्स के डीन(स्टूडेंट्स वेलफेयर) डॉ. शिव प्रिय कहते हैं कि मेडिकल खासकर MBBS की पढ़ाई में हमेशा अच्छा करते रहने का तनाव तो होता ही है. इस बात को समझते हुए नेशनल मेडिकल काउंसिल(NMC) ने मेडिकल स्टूडेंट्स को डिप्रेशन से बचाने के लिए कई तरह की कोशिशें भी की हैं.
रिम्स में कई मेडिकल स्टूडेंट डिप्रेशन के शिकार
इस दौरान डॉ. शिव प्रिय एक बेहद चौंकाने वाली बात भी कही. उन्होंने कहा कि रिम्स में MBBS प्रथम वर्ष से लेकर पीजी तक के करीब-करीब हर बैच में कुछ बच्चे ऐसे हैं जो डिप्रेशन के शिकार हैं. इसमें से कई का इलाज तो रिनपास और सीआईपी में भी चल रहा है. ऐसे छात्रों पर खास नजर भी रखी जाती है.
डीन(छात्र कल्याण) के अनुसार परेशानी ऐसे बच्चों को लेकर होती है जिसकी समस्या के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है. वह बताते हैं कि NMC की गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल के हर स्टूडेंट से फैकल्टी का कोई न कोई एक टीचर अटैच होता है. बावजूद इसके कुछ-कुछ अंतराल पर रिम्स में मेडिकल स्टूडेंट्स की आत्महत्या करने की घटना झकझोर देती है.
सिर्फ कठिन पढ़ाई ही डिप्रेशन की वजह नहीं
रिम्स के डीन(छात्र कल्याण) से जब पूछा गया कि क्या सिर्फ मेडिकल की कठिन पढ़ाई ही है छात्रों में डिप्रेशन की वजह है. इस सवाल के जवाब में डॉ. शिव प्रिय कहते हैं कि मेरा अब तक का अनुभव यह कहता है कि मेडिकल की कठिन पढ़ाई में लगातार अच्छा करने का एक स्वाभाविक दबाव तो रहता ही है, लेकिन पर्सनल और रिलेशनशिप भी डिप्रेशन का एक बड़ा कारण है. क्योंकि यह उम्र ही ऐसी होती है जब वो एक-दूसरे का साथ खोजते हैं.
MBBS में एडमिशन के बाद ही होती है काउंसलिंग
डॉ. शिव प्रिय कहते हैं कि स्ट्रेस-डिप्रेशन को दूर करने के लिए रिम्स में हर दिन योगा-मेडिटेशन की क्लास तो नहीं होती है, लेकिन MBBS में नामांकन के बाद छात्रों को काउंसलिंग जरूर होती है. वह बताते हैं कि समय-समय पर रिम्स के स्टेडियम ग्राउंड में योगाभ्यास का कार्यक्रम भी होता है, लेकिन उसमें बहुत कम बच्चे ही पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बच्चों को तनाव इस हद तक न हो कि वह डिप्रेशन में बदल जाए इसके लिए योग और मेडिटेशन की क्लास शुरू की जाएगी.
रिम्स के छात्र लगातार कर रहे सुसाइड
पिछले कुछ वर्षों में राज्य के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जहां स्टूडेंट डिप्रेशन का शिकार होकर आत्महत्या कर रहे हैं. अक्टूबर 2024 में भी प्रेम प्रसंग में पीजी दूसरे वर्ष के छात्र-छात्रा ने हॉस्टल की छत से छलांग लगा दी थी. इसी तरह नवंबर 2023 में रिम्स में मेडिकल स्टूडेंट का शव जला हुआ मिला था. उससे पहले भी इस तरह की कई घटनाएं रिम्स में हुई हैं. इस तरह की घटनाओं से अब रिम्स प्रबंधन भी परेशान है.
पैरेंट्स भी बच्चों के संपर्क में रहेंः रिम्स निदेशक
रिम्स के निदेशक डॉक्टर राजकुमार ने कहा कि स्टूडेंट के बीच लगातार ऐसी घटना बढ़ रही है. बच्चे स्ट्रेस में रह रहे हैं. ऐसे में उनके पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी है कि वह लगातार अपने बच्चों से संपर्क में रहें और उनसे बातचीत करते रहें. अगर बच्चों के व्यवहार में थोड़ा भी एब्नार्मलिटी दिखे तो बच्चे को या तो घर लेकर जाएं या कॉलेज प्रबंधन को बताएं, ताकि उस बच्चे के चारों तरफ अच्छा माहौल बनाकर उसे सुरक्षित किया जा सके.
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