जंगल में बाघ के हमले से कैसे बचें? वन विभाग ने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में दिए शानदार टिप्स
पेंच टाइगर रिजर्व में चरवाहों को जंगली जानवरों से बचने की स्पेशल ट्रेनिंग. बताया कि कैसे बाघ को चकमा दे सकते हैं.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 4, 2026 at 2:23 PM IST
सिवनी : बारिश के मौसम में ग्रामीण खासकर चरवाहे अपने पशुओं को जंगल के आसपास चराने पहुंचते हैं. इस दौरान कई बार ऐसी घटना होती है, जिसमें जंगली जानवर पीछे से हमला कर कर देते हैं. ऐसे हमलों से वन विभाग चिंतित है. क्योंकि चरवाहे भी जंगल के रखवाले के साथ वन विभाग के सहयोगी भी होते हैं. वन विभाग ने चरवाहों को बताया कैसे वे बेहतर तरीके से जंगल की रखवाली के साथ जंगली जानवरों से खुद का संरक्षण कर सकते हैं.
सम्मेलन में 100 चरवाहे शामिल
पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के खवासा, रूखड एवं अरी बफर परिक्षेत्र के गांवों के चरवाहों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें 100 चरवाहे शामिल हुए, सभी चरवाहों को पावर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से जंगल में जानवर चराते समय बरती जाने वाली सावधानियां, वन्यप्राणियों से सुरक्षा एवं बचाव, वन विभाग के नियमों का पालन एवं आपसी समझ, संबंधों को बढ़ाना, मुखबिरी इत्यादि विषयों पर जागरूक किया गया. चरवाहों की सुरक्षा हेतु पेंच प्रबंधन की तरफ से सभी चरवाहों को ध्वनि संयंत्र, छाता, गमबूट, गमछा वितरित किया गया.
चरवाहों को मुखौटे वितरित
वन विभाग ने चरवाहों को मुखौटे भी दिए. उन्हें बताया गया कि अधिकतर बाघ और दूसरे जंगली जानवर पीछे से हमला करते हैं. मुखौटा लगा रहेगा तो जंगली जानवर आसानी से हमला नहीं कर पाएंगे. बाघ हमारे दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त हैं. जनपद पंचायत कुरई के अध्यक्ष लोचन मर्सकोले ने चरवाहों को बताया "वन्यप्राणी द्वंद के समय बरती जाने वाली सावधानियां जरूरी हैं. बाघों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है." उपसंचालक पुनीत गोयल ने चरवाहों को नियम पालन तथा सुरक्षा एवं पुरानी जड़ी-बूटी के संरक्षण के विषय में बताया.
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चरवाहों को बफर गेट से कराई सफारी
कार्यक्रम के बाद चरवाहों को खवासा बफर गेट से सफारी भी कराई गई. उन्हें बताया गया कि जंगल में प्रवेश करते समय अत्यंत सावधानी रखे. नियमों का पालन करें. चरवाहों की जिंदगी जानवर और जंगल के बीच में ही गुजरती है. इसलिए उन्हें जंगल के चप्पे-चप्पे की जानकारी के साथ ही यहां के पेड़-पौधे और बायोडायवर्सिटी की बारीकी से जानकारी होती है. चरवाहा वन विभाग और टाइगर रिजर्व के लिए मुखबिरी का काम भी करते हैं. मुखबिरी करने वाले चरवाहों को सम्मानित भी किया जाता है. इसकी जानकारी वन विभाग गोपनीय रखता है.

