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बायोमेट्रिक और OTP में उलझे अन्नदाता, बिना फोन नहीं मिल रही खाद, धूप में घंटों लाइन में लगे

सीहोर में हाईटेक व्यवस्था बनी किसानों के लिए आफत, अंगूठा लगने के बाद OTP का अड़ंगा, खाद विक्रय केंद्रों पर लगी अन्नदाताओं की कतार.

Sehore mandi fertilizer issue
बायोमेट्रिक और OTP में उलझे अन्नदाता (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : June 4, 2026 at 10:00 AM IST

4 Min Read
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सीहोर: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हैं. एक तरफ मानसून की आहट है तो दूसरी तरफ खाद के लिए मची जद्दोजहद. सीहोर जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में सरकार की नई हाईटेक व्यवस्था किसानों के लिए राहत के बजाय मुसीबत का सबब बन गई है. आलम यह है कि बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा मैच होने के बाद भी जब तक मोबाइल पर आया ओटीपी दर्ज नहीं होता, तब तक किसान को खाद की बोरी नहीं मिल रही है.

मंडी स्थित खाद विक्रय केंद्र पर सुबह 8 बजे से ही किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं. घंटों इंतजार के बाद जब किसान का नंबर आता है तो नई व्यवस्था उनके सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है. किसान तुलसीराम राय ने बताया कि, ''मशीन पर अंगूठा तो लग जाता है, लेकिन फिर ओटीपी मांगा जाता है. कई बार मोबाइल घर पर होता है या नेटवर्क की समस्या रहती है. कई लोग तो तीन-चार खाते लेकर आ जाते हैं और फिर घर फोन लगाकर ओटीपी पूछते हैं, जिससे पूरी लाइन रुकी रहती है. इस प्रक्रिया के कारण खाद वितरण की गति बेहद धीमी हो गई है.''

खाद विक्रय केंद्रों पर लगी अन्नदाताओं की कतार (ETV Bharat)

न छांव, न पानी, भीषण गर्मी में परीक्षा दे रहा किसान
प्रशासनिक दावों की पोल मंडी परिसर की अव्यवस्थाएं खोल रही हैं. पारा 40 डिग्री के पार है, लेकिन खाद केंद्र पर किसानों के लिए न तो टेंट की व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए कुर्सियां. दूर-दराज के गांवों से आए किसान चिलचिलाती धूप में भूखे-प्यासे खड़े रहने को मजबूर हैं. पीने के पानी तक का उचित प्रबंध न होने से अन्नदाताओं में भारी रोष है. किसानों का आरोप है कि जिम्मेदार कर्मचारी भी दोपहर 12 बजे से पहले केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं. आलम यह है कि किसान स्वयं तो कतार में खड़े हो ही रहे हैं साथ ही जमीन के कागजात (बई) को भी कतार में जमा रहे हैं.''

मजबूरी का फायदा उठा रहे मुनाफाखोर
सरकारी केंद्रों की लेटलतीफी और सर्वर की लुका-छिपी का सीधा फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं. किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीएपी जिसकी सरकारी कीमत 1350 रुपये है बाजार में 1900 रुपये तक बेची जा रही है. वहीं यूरिया जो 270 रुपये की बोरी के लिए किसान से 350 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. किसानों का कहना है कि फार्मर आईडी और ऑनलाइन बुकिंग होने के बावजूद दुकानदार अधिक दाम मांगते हैं और विरोध करने पर खाद न देने की धमकी देते हैं.

कृषि विभाग का दावा, पर्याप्त भंडार
इधर कृषि विभाग का दावा है कि, खरीफ फसलों की बोनी की तैयारी के लिए जिले में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण है. वर्तमान में जिले में लगभग 24017 मीट्रिक टन यूरिया, 3505 मीट्रिक टन डीएपी, 7127 मीट्रिक टन एनपीके, 4856 मीट्रिक टन एसएसपी और 316 मीट्रिक टन एमओपी इस प्रकार कुल 39822 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है.

15 रुपए शुल्क निर्धारित
कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी आवश्यकता अनुसार उर्वरक अपनी सेवा सहकारी समिति अथवा मन पसंद दुकान से ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ई टोकन बुकिंग कर प्राप्त कर सकते है या ऑनलाइन केन्द्र से भी ई टोकन जारी करवा सकते है जिसका शुल्क रुपए 15 प्रति टोकन निर्धारित है. ई-विकास प्रणाली में राजस्व पट्टाधारी, वन पट्टाधारी, सिकमी किसान, शारीरिक रूप से अक्षम किसान, वृद्ध किसान, मृतक किसान के वारिस को, धार्मिक संस्थान या ट्रस्ट आदि की जमीन के लिए खाद उपलब्ध कराने हेतु सुविधा दी गयी है.

अधिकारियों का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग के एडीए अनिल जाट ने कहा, ''हमने कर्मचारियों को सुबह 8 बजे उपस्थित रहने के सख्त निर्देश दिए हैं. केंद्र पर जल्द ही छाया और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. यदि कोई निजी दुकानदार तय रेट से अधिक वसूली कर रहा है तो किसान सीधे विभाग में शिकायत करें. दोषी दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.''