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तपती दुपहरी में प्राकृतिक एसी, सीहोर के स्कूल में मां की बगिया बनी पाठशाला

सीहोर में बांस और हरी-भरी बेलों से तैयार किया इको फ्रेंडली ग्रीन हाउस, टायर-लकड़ी की कुर्सियां, झोला लाइब्रेरी स्कूल में लग रही समर क्लास.

SEHORE MAA KI BAGIYA
सीहोर के स्कूल में मां की बगिया बनी पाठशाला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 28, 2026 at 9:10 PM IST

3 Min Read
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सीहोर: एक तरफ जहां सीहोर में तापमान 42 डिग्री के पार जा चुका है, वहीं यहां का एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है, जहां बच्चे इस चिलचिलाती धूप में भी बड़े चाव से पढ़ाई और खेलकूद का आनंद ले रहे हैं. यह मुमकिन हुआ है, सीहोर के शासकीय माध्यमिक विद्यालय महुआखेड़ी तकीपुर की एक बेहद अनूठी और खूबसूरत पहल से. यहां चल रहे समर कैंप के दौरान परिसर में विकसित की गई ‘मां की बगिया’ बच्चों की नई और पसंदीदा पाठशाला बन गई है.

बता दें महुआखेड़ी तकीपुर स्कूल की इस बगिया में एक विशेष इको-फ्रेंडली ग्रीन हाउस तैयार किया गया है. बांस से बनाई गई इस खूबसूरत झोपड़ी की छत को हरी-भरी प्राकृतिक बेलों से ढंका गया है, जिसके चारों तरफ घने और छायादार पेड़ लगे हैं. कमाल की बात यह है कि बाहर चाहे जितनी भी लू और तपिश हो, इस प्राकृतिक झोपड़ी के नीचे का तापमान हमेशा सामान्य और ठंडा बना रहता है. यह जगह बिना किसी बिजली के भी बच्चों को प्राकृतिक एसी जैसी शीतलता का अहसास कराती है.

स्कूल में मां की बगिया बनी पाठशाला (ETV Bharat)

क्या खास है ‘मां की बगिया’ की पाठशाला में

यहां बच्चों के बैठने के लिए कोई पारंपरिक बेंच या कुर्सियां नहीं हैं. कबाड़ से जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुराने टायरों, बेकार लकड़ी और बांस की मदद से बेहद रंग-बिरंगी और आकर्षक कुर्सियां बनाई गई हैं, जो बच्चों को खूब लुभाती हैं.

पक्षियों का चहचहाता कोना

बगिया के एक हिस्से को पूरी तरह पक्षियों के संरक्षण के लिए समर्पित किया गया है. यहां मिट्टी के सकोरों में नियमित रूप से दाना-पानी रखा जाता है. स्कूल परिसर के पेड़ों पर भी पानी के बर्तन बांधे गए हैं. पक्षियों के बैठने के लिए बांस के सुंदर झूले लगाए गए हैं, जिससे यहां दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट गूंजती रहती है. इस ग्रीन हाउस झोपड़ी के ठीक नीचे एक छोटी पौध नर्सरी भी विकसित की गई है. यहां अलग-अलग तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी बच्चों ने खुद संभाल रखी है.

SEHORE MAA KI BAGIYA SUMMER CLASSES
सीहोर में मां की बगिया बनी पाठशाला (ETV Bharat)

झोला लाइब्रेरी से नवाचारी शिक्षण और संस्कार

इस प्राकृतिक माहौल में बच्चे सिर्फ खेल ही नहीं रहे, बल्कि ज्ञान भी अर्जित कर रहे हैं. यहां बच्चों के लिए झोला लाइब्रेरी की शुरुआत की गई है. बच्चे इस झोले से अपनी पसंद की प्रेरक कहानियां, कविताएं और कॉमिक्स निकालते हैं और पेड़ों की छांव में बैठकर पढ़ते हैं. इसके अलावा समर कैंप में चित्रकला और कई तरह की खेल गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं.

बच्चों में जाग रही पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता

इस पहल को धरातल पर उतारने वाले विद्यालय के शिक्षक सतीश त्यागी ने बताया कि "हमारा उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से प्रकृति से जोड़ना है. समर कैंप के दौरान बच्चे अपनी मर्जी से और बड़े उत्साह के साथ पौधों में पानी डालते हैं और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं. इस अनूठी पहल से नन्हे-मुन्ने बच्चों में पेड़, पौधे और बेजुबान पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता और प्रेम का विकास हो रहा है."

महुआखेड़ी तकीपुर स्कूल की यह मां की बगिया आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है. जो यह साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत दोनों बदली जा सकती है.