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छत्तीसगढ़ सरकार के साथ एसईसीएल का जॉइंट वेंचर, तैरने वाले सोलर प्लांट के साथ कोल गैसीफिकेशन की प्लानिंग

कोयला उत्पादन के साथ अब 626 मेगावाट ग्रीन एनर्जी की तरफ एसईसीएल ने कदम बढ़ाया.

SECL Chhattisgarh
एसईसीएल का जॉइंट वेंचर (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 26, 2026 at 8:56 PM IST

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Updated : February 26, 2026 at 9:04 PM IST

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कोरबा: भारत सरकार के कोल इंडिया लिमिटेड(CIL) की सबसे बड़ी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड(SECL) फ्लोटिंग सोलर और सरफेस कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स की दिशा में ठोस योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ जॉइंट-वेंचर्स की तैयारी की जा रही है.

ग्रीन एनर्जी और कोल गैसीफिकेशन के लिए जनरेशन कंपनी से जारी है चर्चा

एसईसीएल के पीआरओ सनीष चंद्र ने ETV भारत को बताया कि एसईसीएल वित्तीय वर्ष 2027-28 तक 626 मेगावाट सोलर एनर्जी की क्षमता विकसित करना चाहती है. सोलर के साथ ही कोल गैसीफिकेशन पर जॉइंट वेंचर रेवेन्यू-शेयरिंग मोड में विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा.

एसईसीएल के पीआरओ सनीष चंद्र (ETV Bharat Chhattisgarh)

जनरेशन कंपनी के साथ चल रही बातचीत

सनीष चंद्र ने बताया कि ग्रीन एनर्जी के विस्तार और कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत जारी है. पावर जनरेशन कंपनी से सकारात्मक चर्चा हुई है. छत्तीसगढ़ में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट और गैसीफिकेशन की परियोजनाओं पर कार्य प्रस्तावित है. फ्लोटिंग(तैरने वाले) सोलर के विषय में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के साथ एसईसीएल के अधिकारी बातचीत कर मंथन कर रहे हैं. इन सभी परियोजनाओं पर आने वाले समय में हजारों करोड़ रुपए का निवेश किया जाना है. जो रेवेन्यू शेयर्ड मॉडल पर आधारित होगा. इस पर विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी.

बड़े रिजर्वायर के साथ बंद खदानों का इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ में बड़े रिजर्वायर मौजूद हैं. जिनका उपयोग फ्लोटिंग सोलर के लिए किया जा सकता है. इस पूरी परियोजना के लिए पर एक विस्तृत पॉलिसी राज्य में बनाई जाएगी. बता दें कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कोल इंडिया लिमिटेड के इस तरह के प्रोजेक्ट्स संचालित हैं. उन सभी में भी एसईसीएल अपना योगदान सुनिश्चित कर सकती है. सोलर पावर प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए बंद खदानों का इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जाएगा.

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कोरबा में एसईसीएल (ETV Bharat Chhattisgarh)

कोल गैसीफिकेशन परियोजना पर भी विचार

एसईसीएल और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच कोल गैसीफिकेशन ज्वाइंट वेंचर के विषय में भी बातचीत चल रही है. छत्तीसगढ़ सरकार भी कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है. इस परियोजना पर एसईसीएल और छत्तीसगढ़ सरकार के पावर जनरेशन कंपनी के अधिकारियों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई है. सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाकर इस परियोजना का भी विस्तार किया जा सकता है.

कोल गैसीफिकेशन क्या है

कोयला या कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को हवा, ऑक्सीजन या भाप के साथ मिलाकर उच्च तापमान और दबाव पर आंशिक रूप से जलाकर सिंथेटिक गैस(Syngas) में बदला जाता है. इस प्रक्रिया में कोयले को सीधे जलाने के बजाय, उसे गैसीय ईंधन में परिवर्तित किया जाता है. इस प्रक्रिया में पारंपरिक तौर पर कोयले को जलाने की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है. जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, और पेट्रोलियम विकल्पों के रूप में किया जाता है.

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ग्रीन एनर्जी और कोल गैसीफिकेशन पर ज्वाइंट वेंचर (ETV Bharat Chhattisgarh)

पूरी परियोजना पर 4000 करोड़ रुपए निवेश का प्लान

खदान से निकाले गए कोयले को गैस में बदलने के लिए एक खास सेट-अप बनाना इस परियोजना में शामिल है. ग्रीन एनर्जी के विस्तार में एसईसीएल ने प्लान बनाया है. विश्व के विकसित देश कोयला आधारित पावर प्लांट के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन भारत में अभी कोयला आधारित पावर प्लांट ही बिजली उत्पादन का प्राथमिक सोर्स है. अब एसईसीएल ने ग्रीन एनर्जी की तरफ कदम बढ़ाने की शुरुआत की है. एसईसीएल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ग्रीन एनर्जी और कोल गैसीफिकेशन सहित इनसे जुड़ी अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर इस वर्ष कुल मिलाकर 4000 करोड़ रुपए के निवेश का प्लान है.

इन परियोजनाओं पर कार्य

एसईसीएल द्वारा वर्तमान में मध्य प्रदेश के शारदा OC सोहागपुर इलाके में 9.84 करोड़ रुपये की लागत से 1.5 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जाएगा. जो प्रक्रिया में है, जोहिला फेज II में 420 करोड़ रुपये का 60 मेगावाट का ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट लगेगा जबकि हसदेव में 322 करोड़ रुपये का 46 मेगावाट का प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है.

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Last Updated : February 26, 2026 at 9:04 PM IST