Turmeric for Health : आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है हल्दी, एंटीबायोटिक तत्व के रूप में बेहतर विकल्प
सर्दी के मौसम में बुखार-जुकाम सामान्य बात है. बात करें आयुर्वेद से जुड़े तत्वों की तो हल्दी की सब्जी सर्दी में गुणकारी बताई जाती है.

Published : January 7, 2026 at 4:09 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 4:25 PM IST
बीकानेर: दैनिक जीवन में हमारे आसपास ऐसी कई खाने-पीने की वस्तुएं होती हैं, जो ने केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं, बल्कि आयुर्वेदिक तत्वों और गुणों से भी भरपूर होती हैं. सर्दी के मौसम में गीली हल्दी (कच्ची हल्दी) अपने आप में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
जायका और सेहत : सर्दी में गीली हल्दी (कच्ची हल्दी) राजस्थान और खासतौर से पश्चिमी राजस्थान में सब्जी के रूप में लोगों की पहली पसंद है. देसी घी में मसाले के साथ बनने वाली इस सब्जी का जायका न सिर्फ जुबान के लिए लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिए भी यह फायदेमंद है.
आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर : वैसे तो हमारी रसोई में हल्दी का अपना ही अलग महत्व है और हल्दी के बारे में कहा जाता है कि यह अपने आप में एंटीबायोटिक है. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में हल्दी को महत्व दिया गया है. हालांकि, सुखी से हल्दी का एक मात्र से ज्यादा सब्जी में होना संभव नहीं है और दूध के अलावा दूसरे उपयोग के रूप में इस शरीर में लेना संभव नहीं है, लेकिन गीली हल्दी सब्जी के रूप में नियमित तय मात्रा में खाना फायदेमंद रहता है.

बीकानेर के आचार्य चौक में आयुर्वेद शाला के वैद्य पारसचंद जैन कहते हैं कि हल्दी शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का काम करती है. शरीर में सूजन कम करना, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, त्वचा को निखारना, पाचन सुधारने के दृष्टिकोण से हल्दी का बहुत उपयोग है. साथ ही शरीर के लिए भी गुणकारी है.

500 रुपये किलो : हल्दी विक्रेता राज कहते हैं कि कच्ची हल्दी 70 से 80 रुपये किलो बाजार में इस वक्त मिल रही है और सर्दी के दिनों में सब्जी में हल्दी की डिमांड ज्यादा हो जाती है. वहीं, कैटरिंग का काम करने वाले खड़ग सिंह वैद्य कहते हैं कि देसी घी में बनने वाली हल्दी की सब्जी 500 रुपये प्रति किलो में तैयार होती है. बिना प्याज लहसुन खाने वाले लोग भी इस हल्दी के दीवाने हैं.

तय मात्रा से ज्यादा नहीं : हल्दी की तासीर यानी इसके अंदर के तत्व में गर्मी होती है. ऐसे में एक निश्चित मात्रा जो 50 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और सर्दी के दिनों में यदि इसे नियमित खाया जाए तो यह गुणकारी होती है. गर्म तत्व होने के चलते ज्यादा खाने से यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को तेज कर देती है और उससे नुकसान होने का डर रहता है.
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