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शरीर पर लाल-काले निशान हो सकते हैं इस बीमारी के लक्षण, एक कीड़े के काटने से हो जाता है बुरा हाल

तेजी से बढ़ रही है स्क्रब टायफस बीमारी, किसानों के लिए बड़ा खतरा, बीएमसी में खोला गया मध्यप्रदेश का पहला स्पोक सेंटर

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तेजी से बढ़ रही है स्क्रब टायफस बीमारी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 2:52 PM IST

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Updated : March 3, 2026 at 5:20 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट : कपिल तिवारी

सागर : खेतों में काम करने वाले किसान और जंगल में आजीविका के लिए काम करने वाले आदिवासी या वनकर्मी स्क्रब टायफस नाम की बीमारी के खतरे की जद में हैं. ये बीमारी तेजी से अपना दायरा बढ़ा रही है और खतरा इस बात का है कि इसका संक्रमण तेजी से फैलता है. ये बीमारी चिगर्स यानी मांसपिस्‍सू के काटने के कारण होती है. चिगर्स का लार्वा खून में मिलतने ही तेज बुखार, बेहोशी और सांस लेने में गंभीर समस्या भी हो सकती है और जलने जैसे निशान आ जाते हैं.

बुंदेलखंड में तेजी से फैल रहा स्क्रब टायफस

राहत की बात ये है कि अब इस बीमारी की जांच, निगरानी और इलाज के लिए मध्यप्रदेश में पहला स्कोप सेंटर खोला गया है. मध्यप्रदेश के सभी 18 मेडिकल काॅलेज में सागर के बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में इसके लिए पहला सेंटर खोला गया है. इसकी वजह ये भी मानी जा रही है कि बुंदेलखंड में इस बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. खास बात ये है कि एक मार्च से इस स्पोक सेंटर ने विधिवत तरीके से काम शुरू कर दिया है. यहां स्क्रब टायफस की जांच और निगरानी के साथ इलाज की व्यवस्था है.

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जानें स्क्रब टायफस बीमारी के बारे में (Etv Bharat)

स्क्रब टायफस बीमारी के बारे में

बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज के माइक्रोबाॅयलाजी विभाग के हैड डॉ. सुमित रावत बताते हैं, '' स्क्रब टायफस एक गंभीर संक्रामक बीमारी है और ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) बैक्टीरिया के कारण होने वाला रोग है. ये जो चिगर्स (Chiggers) छोटे लाल रंग के कीड़े के काटने से होती है. ये बड़ी और लंबी घास और झाड़ियों में पाए जाते हैं. इसके कारण तेज बुखार, ठंड लगना, सरदर्द और शरीर का दर्द और त्वचा पर लाल व काले रंग के जले जैसे निशान आ जाते हैं.''

जानकारी देते डॉक्टर सुमित रावत (Etv Bharat)

इन लोगों को स्क्रब टायफस से ज्यादा खतरा

इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा उन लोगों को होता है, जो जंगल और खेतों में काम करते हैं. जंगल में बड़ी घास और झाड़िया होती हैं और ये चिगर्स (Chiggers) का ठिकाना होती हैं. इसी तरह खेतों में भी चिगर्स (Chiggers) काफी संख्या में पाए जाते हैं. ऐसे में ऐसे लोगों को पूरी बांहों के कपड़े, फुलपेंट और लॉन्ग बूट पहनने की सलाह दी जाती है. ऐसे में जंगल या खेत से आने पर अच्छे से नहाना चाहिए और शरीर को अच्छे से पोंछना चाहिए. इसके बाद भी बुखार या ठंड लगने के अलावा शरीर लाल निशान आते हैं, तो तत्काल डाॅक्टर को दिखाएं.''

Scrub Typhus Increasing Rapidly
बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज सागर (Etv Bharat)

बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में बना प्रदेश का पहला स्पोक सेंटर

इस बीमारी के लिए राष्ट्रीय रिकेट्सियल सर्विलांस कार्यक्रम के तहत सरकार ने मध्यप्रदेश में पहला स्पोक सेंटर बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में खोला है. माना जा रहा है कि बुंदेलखंड में पिछले दिनों स्क्रब टायफस के कई इलाकों में मरीज सामने आए हैं. सागर जिले की ही बात करें, तो राहतगढ़, बंडा, शाहगढ़, रहली देवरी जैसे इलाकों में स्क्रब टायफस के मरीज पाए गए हैं.

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बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में क्या होगा काम

भारत सरकार के राष्ट्रीय रिकॉट्सयल सर्विलांस कार्यक्रम के तहत स्क्रब टायफस जैसी बीमारी की पहचान, निगरानी और इलाज के लिए देश में अलग-अलग जगहों पर स्पोक सेंटर बनाे जा रहे हैं. इसके तहत मध्यप्रदेश के तमाम मेडिकल काॅलेज में से सागर की बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में पहला सेंटर खोला गया है. इस सेंटर का प्रमुख काम बीमारी पर निगरानी रखना, संदिग्ध मरीजों की जांच करना, उनका इलाज करना और इस बात पर नजर रखना कि इसका संक्रमण तेजी से तो नहीं फैल रहा है, जिसके कारण बीमारी कहीं महामारी का रूप ना ले ले.

Last Updated : March 3, 2026 at 5:20 PM IST