तपते सूरज के बीच बढ़ा आग की घटनाओं का खतरा, भीड़ वाली जगहों पर जानें क्या हैं इंतजाम, कैसे रहें जागरुक?
गर्मियों में इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट पर लोड बढ़ने से आग लगने के चांस बढ़ जाते हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों में जागरुक होने जरूरत है. रिपोर्ट-धीरज सजवाण.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 25, 2026 at 7:01 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रकोप जारी है. बढ़ते तापमान के बीच 20 मई को देहरादून के पैनेसिया अस्पताल के आईसीयू में लगी आग ने शासन प्रशासन की आंखें खोलने का काम किया है. इस घटना में एक महिला की मौत हो गई और कई लोगों की जान पर बन आई. यही नहीं, इस आग को बुझाते हुए कुछ सुरक्षा कर्मी भी झुलस गए. बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया गया. इस घटना पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं. जिसमें आग लगने के कारणों के साथ-साथ लापरवाही के पहलू का भी खुलासा हो पाएगा.
घटना से सबक लेने की जरूरत: चीफ फायर ऑफिसर देहरादून अभिनव त्यागी ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए कहा कि, अस्पताल में आग लगने की घटना से सभी को सीख लेने की जरूरत है. अस्पताल में आग लगने की शुरुआत एसी (AC) में आग लगने से हुई थी. इस भीषण गर्मी के मौसम से हमें ये सुनिश्चित करने की जरूरत है कि लोड बेयरिंग क्षमता के अनुसार ही इलेक्ट्रॉनिक एप्लाइंसेस का इस्तेमाल करें.
हमारे घरों में जो बिजली का कनेक्शन है, उस पर जरूरत से ज्यादा लोड न डालें. एमसीबी (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के सभी उपकरण लगे होने चाहिए. अस्पताल अग्निकांड की घटना बताती है कि हमें अपने घरों में एसी (एयर कंडीशनर) की समय समय पर सर्विस करनी चाहिए. AC में कूलेंट गैस, कंप्रेसर, फिल्टर खराब होना भी, आग लगने का कारण बन सकता है. वायरिंग शॉर्ट होना या जरूरत से पतले वायर भी खतरनाक हो सकते हैं. हम सब की सार्वजनिक जिम्मेदारी है कि हम यदि घर बना रहे हैं, कोई संस्थान चला रहा हैं या फिर किसी अस्पताल का संचालन में कर रहे हैं तो इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए.
- अभिनव त्यागी, चीफ फायर ऑफिसर, देहरादून -
भीड़भाड़ वाली जगहों पर बड़ा रिस्क: देहरादून के रिस्पना पुल स्थित पैनेसिया अस्पताल में आग की घटना के बाद ईटीवी भारत की टीम ने देहरादून के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों का जायजा लिया. देहरादून के दून अस्पताल में आग की घटनाओं से बचने के क्या कुछ इंतजाम किए गए हैं, इसको लेकर हमने ग्राउंड पर जाकर व्यवस्थाओं को देखा. दून अस्पताल की 6 मंजिला ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट), ऑपरेशन बिल्डिंग में पिछले कई सालों से फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं था, लेकिन इस बार अग्निशमन विभाग की सख्ताई के बाद यहां पर फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया गया है. जिस कारण हर फ्लोर पर स्प्रिंकलर और बुश पाइप की व्यवस्था है. इसके अलावा काफी संख्या में फायर एक्स ट्यूशन भी लगे हैं.
इसी तरह देहरादून तहसील, जहां हर रोज सैकड़ों की संख्या में लोगों का आना जाना होता है, वो भी बुरे हालत में नजर आया. राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स के तीसरे फ्लोर पर तहसील मौजूद है. चौथे फ्लोर पर जिला पूर्ति अधिकारी का कार्यालय है. ये दोनों कार्यालय ऐसी जगह हैं, जहां पर हर रोज सैकड़ों लोग आते हैं. बड़ी बात यह है कि इस बिल्डिंग में कोई चालू फायर एग्जिट नहीं है. आने जाने के लिए मात्र सीढ़ियों का एक मात्र संकरा रास्ता है. जहां आपातकालीन स्थिति में निकलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है. नीचे के फ्लोर पर छोटी छोटी दुकानें, लेकिन वहां पर भी फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नजर नहीं आए.
जब ईटीवी भारत की टीम तहसील फ्लोर पर गई तो वहां भी कोई फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) नजर नहीं आया. हालांकि, एक पुराना फायर फाइटिंग सिस्टम का बुश पाइप जरूर नजर आया. लेकिन वो भी कितना काम करता है कोई नहीं जानता है.
पलटन बाजार जैसे इलाके सबसे बड़ी चुनौती: देहरादून चीफ फायर अधिकारी अभिनव त्यागी ने बताया कि, इस गर्मी के मौसम में देहरादून शहर में आग की घटनाओं की सबसे बड़ी चुनौती पलटन बाजार जैसे इलाकों में है. जहां दुकानें और बिजली की तारों का जाल सबसे बड़ी चुनौती है. गर्मियों में छोटी-छोटी दुकानों में लोग गर्मी से बचने के लिए कई इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जिस वजह से बिजली कनेक्शन पर लोड बढ़ जाता है. विशेष तौर पर पलटन बाजार के व्यापारियों से अपील की है कि वो अपने बिजली के कनेक्शन को देखें और इन बातों का ध्यान रखें.
आग की घटनाओं के लिए कितना तैयार अग्निशमन विभाग?: चीफ फायर ऑफिसर अभिनव त्यागी बताया कि,
अब तक के अनुभव के अनुसार, आगजनी की हर एक घटना की अलग चुनौती होती है. हर एक घटना के लिए अलग एक्शन प्लान बनता है. अग्निशमन के संसाधन और उपकरण का ज्ञान तो काम आता है लेकिन मौके पर सिचुएशन हमेशा चुनौतीपूर्ण होती है. देहरादून अग्निशमन के पास पर्याप्त मात्रा में उपकरण मौजूद हैं.
- अभिनव त्यागी, चीफ फायर ऑफिसर, देहरादून -
देहरादून अग्निशमन के संसाधन:
- फायर टेंडर में पानी के 9 बड़े ट्रक और इंडस्ट्रियल केमिकल आग के लिए 5 फॉर्म ट्रक.
- मिनी फायर टेंडर की 6 की छोटी गाड़ियां.
- 10 फायर बाइक.
- 1 वॉटर ब्राउजर.
- एक मल्टीपरपज टेंडर.
- बहुमंजिला इमारतों में आग की घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए हाइड्रोलिक मशीन जिसकी अधिकतम हाइट 32 मीटर तक है.
हर बिल्डिंग में एंट्री से पहले देखें फायर एग्जिट: चीफ फायर ऑफिसर अभिनव त्यागी ने बताया कि, अमूमन आम लोग इस तरह की घटनाओं के दौरान पैनिक हो जाते हैं. लेकिन जागरूकता के दृष्टिकोण से ये महत्वपूर्ण है कि हम जब भी किसी बड़े होटल में या बड़े मॉल में जाए तो एंट्री पर लगे एग्जिट प्लान को जरूर देखें. हर बड़े भवन के प्रवेश द्वार पर एग्जिट प्लान लगा रहता है.
जागरुकता के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है. इसके अलावा अग्निशमन विभाग समय समय पर फायर सेफ्टी ऑडिट करवाती है. इसमें फायर फाइटिंग इक्यूपमेंट की क्षमता और कार्यशीलता के अलावा सेफ्टी एग्जिट की जांच करता है कि कहीं पर एग्जिट बंद तो नहीं है या कोई ऐसा सामान तो नहीं रखा है जिससे जरूरत पड़ने पर ये खुले ही ना. फायर सर्विस का प्रयास रहता है कि हर तीन साल में एक बार बड़े भवनों का सेफ्टी ऑडिट किया जाए-
- अभिनव त्यागी, चीफ फायर ऑफिसर, देहरादून -
फायर सेफ्टी का उल्लंघन करने वालों पर सख्ताई की जरूरत: चीफ फायर ऑफिसर अभिनव त्यागी ने बताया कि,
प्रदेश में 2016 फायर सर्विस एक्ट लागू है. इनके अंतर्गत ही सभी कार्रवाई की जाती है. हॉस्पिटल में यदि फायर मानक पूरे नहीं होते हैं तो स्वास्थ्य विभाग क्लिनिकल स्टेबलिश एक्ट के तहत कार्रवाई करने में सक्षम है. हालांकि, अफसोस की बात है कि अग्निशमन विभाग के पास नोटिस देने के अलावा किसी भी तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है. इसके लिए 3 नोटिस के बाद जिलाधिकारी को इस संबंध में कार्रवाई के लिए लिखा जाता है. लेकिन जिलाधिकारी की व्यस्तता के चलते ये मामले अक्सर ठंडे बस्ते में पड़े रहते हैं. पिछले महीने अग्निशमन विभाग ने 63 ऑडिट किए, जिसमें एक दर्जन के करीब मामलों में नोटिस की कार्रवाई हुई है.
- अभिनव त्यागी, चीफ फायर ऑफिसर, देहरादून -
अस्पतालों में बनेंगे हीट स्ट्रोक रूम: देहरादून समेत अन्य जिलों में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. ऐसे में उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने बताया कि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तुरंत और बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से हीट स्ट्रोक रूम स्थापित किए जाएंगे. इस रूम में आइस पैक आईवी फ्लूड, ओआरएस सॉल्यूशन जरूरी दवाइयां और वेंटिलेटर जैसी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही है. इसके साथ ही अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी हीट स्ट्रोक से संबंधित उपचार और आपातकालीन प्रबंधन के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.
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