बस्तर में शिक्षा व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, स्कूल भवनों का होगा कायाकल्प, मंत्रोच्चार पर भी शिक्षा मंत्री ने दिया बयान
मंत्री गजेंद्र यादव ने बस्तर में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की बात कही है. वहीं मंत्रोच्चार को उन्होंने पुस्तकीय ज्ञान से अलग शिक्षा कहा.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 1, 2026 at 8:11 PM IST
जगदलपुर : बस्तर की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. स्कूल शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नक्सल प्रभावित बस्तर में अब विकास के साथ-साथ शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही हैं. जर्जर स्कूल भवनों के कायाकल्प से लेकर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने और संस्कार शिक्षा को बढ़ावा देने तक सरकार कई स्तरों पर काम करने का दावा कर रही है.
बस्तर संभाग के स्कूलों का मंगवाया गया ब्यौरा
मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि बस्तर संभाग के सभी पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है. जिन स्कूल भवनों की हालत जर्जर है, उनकी सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से मरम्मत और नए भवनों के निर्माण के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराई जाएगी.

पहले भी कई स्कूलों के लिए मरम्मत मद में राशि जारी की गई थी और अब जिन संस्थानों को आवश्यकता होगी, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य केवल भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधारभूत सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार हो सके- गजेंद्र यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री
शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं
स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर उठ रहे राजनीतिक और सामाजिक विवाद पर भी मंत्री ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार की व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी. शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों का विकास भी उतना ही आवश्यक है.

प्रवेश से कोई भी छात्र नहीं होगा वंचित
वहीं सरकारी स्कूलों में प्रवेश को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि यदि कहीं परीक्षा परिणाम या अन्य कारणों का हवाला देकर किसी बच्चे को प्रवेश देने से इनकार किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों में तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे. सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है कि किसी भी सरकारी स्कूल में किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा.
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