महाभारत काल से जुड़ी है ये रहस्यमयी गुफा, भगवान का प्रकृति करती है अभिषेक
छतरपुर में स्थित मोनासैया गुफा का महाभारत काल से खास नाता. सावन में धर्म-आस्था और अध्यात्म के साथ बहता है झरना. मनोज सोनी की-रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 10, 2026 at 10:03 AM IST
छतरपुर: मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र आज भी प्राचीन धार्मिक स्थानों को बखूबी संजोए हुए हैं. यहा एक ऐसा स्थान भी है, जो महाभारत काल से जुड़े होने की गवाही देता है. ये क्षेत्र है छतरपुर की मोनासैया की प्राचीन गुफा, जहां कभी पांडवों ने अपना समय बिताया था. इसी स्थान पर हर साल सावन के महीनों में भक्तों का तांता लगता है. साधु-संत तपस्या कर सिद्धि पाने के लिए यहां अपना डेरा जमाए रहते हैं. मान्यता है कि यहां भोले नाथ के दर्शन मात्र से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
भगवान का प्रकृति करती है अभिषेक
छतरपुर आदिकाल से ऐतिहासिक, प्राचीन, धर्मिक और आस्था का केंद्र रहा है. यहां आज भी महाभारत काल से जुड़े कई ऐसे स्थान हैं, जहां देश-दुनिया भर के लोग घूमने और इतिहास जानने आते हैं. इसमें जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर भीषण जंगल में मोनासैया की प्राचीन और रहस्यमयी गुफा भी शामिल है. जहां साक्षात भोलेनाथ गुफा में विराजमान है, जिनका पूरे महीने प्रकृति अभिषेक करती है.
सावन में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
मोनासैया में पूरे साल भक्तों का जमाबड़ा लगा रहता है, लेकिन सावन के महीनों में इसकी रंगत बदल जाती है. यहां आस्था, धर्म, अध्यात्म और झरना एक साथ बहता है. जिससे भक्तों को भक्ति के साथ सुकून देता है.
सिद्धी के लिए दिन-रात तपस्या
मोनासैया गुफा के पुजारी साधु सेवक दास त्यागी कहते हैं, '' पिछले 60 सालों से हम यहां तपस्या कर रहे हैं. हमारे गुरु चतुरदास त्यागी भी इसी स्थान पर तपस्या करते थे और वह 111 साल तक जीवित रहे. उनके साथ कई अन्य साधू भी सिद्धी के लिए दिन-रात तपस्या किया करते थे. आज हम लोग इस प्राचीन स्थान की सेवा कर रहे हैं और यही तप करते हैं.''

गुफा तक जाने का दुर्गम रास्ता
गुफा तक जाने का कोई रास्ता नहीं है, श्रद्धालु करीब 2 किमी तक पथरीले रास्ते पर पैदल चलकर भोले नाथ के दर्शन करते हैं. जंगली इलाका होने और बिजली नहीं होने के कारण भक्तों को यहां सूरज ढ़लने से पहले ही बाहर निकलना होता है. उसके बाद गुफा बिल्कुल खाली हो जाता है. शाम होते ही साधु-संत तप में लीन हो जाते हैं.

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इतिहास विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर एनके जैन कहते हैं, "बुंदेलखंड का एक गौरवशाली इतिहास रहा है. यहां आज भी महाभारत काल से जुड़े कई साक्ष्य मौजूद हैं. बड़ामलहरा इलाके का भीम कुंड और अर्जुन कुंड की गहराई कोई नहीं नाप सका है. उन्हीं में से एक मोनासैया की प्राचीन गुफा है. पुराने लोगों और किवदंतियों के मुताबिक कभी इन स्थानों पर पांडवों ने अपना वनवास बिताया था. अगर सरकार इन स्थानों का विकास कर दे तो पर्यटन के हिसाब से बहुत ही खूबसूरत और प्राचीन स्थल है. पर्यटकों की आवक भी बढ़ जाएगी और आने वाली पीढ़ी ऐसे स्थानों के इतिहास जान पाएंगे, यहां प्रकृति खुद अपना श्रृंगार करती है."

