सौरभ भारद्वाज का आरोप, आवारा कुत्तों के फरमान का विरोध करने पर टीचर्स हो रहे सस्पेंड
सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर पोस्ट कर बीजेपी सरकार से सवाल किए.

Published : January 3, 2026 at 3:21 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों से आवारा कुत्तों की निगरानी कराने के आदेश को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि इस आदेश का विरोध करने वाले एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार पैनिक मोड में है और अपने तुगलकी फरमान के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश कर रही है. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार पहले ही इस अजीब आदेश को लेकर एक्सपोज हो चुकी है, जिसमें शिक्षकों को आवारा कुत्तों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी. अब घबराहट में सरकार विरोध करने वाले शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रही है. शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय की विजिलेंस ब्रांच ने एसबीवीएम सुभाष नगर के टीजीटी (हिंदी) शिक्षक संत राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
भाजपा सरकार ने “आवारा कुत्तों” वाला ऑर्डर अभी तक वापिस नहीं लिया है , मगर टीचर को सस्पेंड कर दिया ।
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) January 2, 2026
इस टीचर ने सरकार के निर्देश की निंदा की थी
कुछ दिनों पहले इन्ही की ABVP की छात्र नेता ने अपने प्रोफेसर को थप्पड़ मारा था , वीडियो वायरल करके और अपमानित किया । मगर सरकार ने उस… pic.twitter.com/3gz1Vat4HA
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निलंबन आदेश साझा करते हुए सवाल उठाया कि सरकार ने अब तक आवारा कुत्तों वाला आदेश वापस नहीं लिया, लेकिन शिक्षक को सस्पेंड कर दिया गया.

सौरभ भारद्वाज ने तुलना करते हुए कहा कि हाल ही में एबीवीपी की एक छात्र नेता द्वारा प्रोफेसर के साथ मारपीट और अपमान का वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन उस मामले में न तो छात्र नेता को सस्पेंड किया गया और न ही कोई सख्त कार्रवाई हुई. इससे साफ है कि यह सरकार शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ काम कर रही है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक ने केवल अपने पेशे की गरिमा और बच्चों के हित की बात की थी. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कोई शिक्षक सरकारी आदेश पर सवाल भी नहीं उठा सकता. पहले विपक्षी नेताओं पर एफआईआर और अब शिक्षकों पर कार्रवाई यह साफ तौर पर डराने की राजनीति है. उन्होंने इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद से जवाब मांगते हुए कहा कि दिल्ली की जनता और शिक्षक इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
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