'ससुराल जाकर भी झूठ बोल आए मुख्यमंत्री, 4 साल के कार्यकाल में ही 51 हजार करोड़ का कर्ज ले चुके हैं'
विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी विधायक सतपाल सत्ती ने बेरोजगारी और कर्ज के मुद्दे पर सीएम सुक्खू को घेरा. पढ़ें पूरी खबर.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 1:47 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान बेरोजगारी के मुद्दे पर चर्चा हुई. मंगलवार को नियम 130 के तहत लाई गई इस चर्चा का दूसरा दिन था. चर्चा में भाजपा के वरिष्ठ नेता और ऊना सदर से विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भाग लिया। इस दौरान सतपाल सत्ती ने हर साल एक लाख नौकरियों के वादे के साथ-साथ कर्ज के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को लपेट दिया. सतपाल सत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल में 51,000 करोड़ का लोन ले चुके हैं. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दे डाली कि जनता के बीच कर्ज का रोना न रोया करें.
सतपाल सत्ती ने कर्ज के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया. सतपाल सत्ती ने कहा कि सरकार में आते ही मुख्यमंत्री ने कर्ज का रोना शुरू कर दिया. सीएम सुक्खू पूर्व की जयराम सरकार पर 75 हजार करोड़ का कर्ज छोड़कर जाने की बात कहकर प्रदेश में झूठ फैला रहे हैं. कर्ज का यह आंकड़ा पूर्व की सभी सरकारों का है. मुख्यमंत्री अपने लगभग 4 साल के कार्यकाल में ही 51 हजार करोड़ का कर्ज ले चुके हैं. लेकिन, जनता को इसका हिसाब नहीं दे रहे हैं. पूर्व जयराम ठाकुर की सरकार में कर्ज था तो हिमकेयर, सहारा और गरीब कल्याण की योजनाएं भी थीं, लेकिन वर्तमान सरकार में योजनाएं भी बंद हैं और लोगों को नौकरियां भी नहीं मिल रही हैं. सतपाल सत्ती ने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे जनता के बीच कर्ज का रोना न रोया करें.
इस दौरान सतपाल सत्ती ने देहरा दौरे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री पर चुटकी ली. सतपाल सत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री ससुराल गए थे, वहां भी झूठ बोलकर आए. मुख्यमंत्री ने धर्मपत्नी के साथ पहले मंदिर में पूजा-अर्चना भी की, लेकिन मंच पर से झूठ के अंबार लगा दिए.
मुख्यमंत्री ने केंद्र में बड़े-बड़े नेताओं की नहीं चलने दी
सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि प्रदेश में नौकरियों पर भी प्रतिबंध है. सरकार ने 3 साल सबोर्डिनेट सिलेक्शन बोर्ड का बहाना बनाकर ही निकाल दिए. मुख्यमंत्री पर हल्के-फुल्के अंदाज में निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बातें घुमाने में तेज हैं. इसीलिए, मुख्यमंत्री केंद्र से ही एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और कांग्रेस में विभिन्न पदों पर नियुक्ति ले लेते थे और इस मामले में उन्होंने बड़े-बड़े नेताओं की भी केंद्र में चलने नहीं दी. मुख्यमंत्री को लगता है अब वो भाजपा की भी नहीं चलने देंगे, लेकिन भाजपा का मुद्दा जनता के बीच है. मुख्यमंत्री बीजेपी के नेताओं को डरा-धमका कर पीछे हटाने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन इस लोकतांत्रिक देश में जनता को डराया नहीं जा सकता.

