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सतना में HIV कांड के बाद ब्लड बैंक खाली, प्रभारी ने रक्तदान कर पब्लिक का डर किया दूर

सतना जिला अस्पताल में HIV कांड के बाद ब्लड में आई कमी, ब्लड बैंक प्रभारी ने किया ब्लड डोनेट, लोगों से की रक्तदान की अपील.

SATNA 6 CHILD HIV POSITIVE
सतना जिला अस्पताल में ब्लड में आई कमी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 4:10 PM IST

4 Min Read
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सतना: जिला चिकित्सालय में बीते माह थैलेसीमिया से मासूम बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया था. इसके बाद मामले पर कार्यवाही और जांच चली. अब ब्लड बैंक में काफी सुधार हो चुका है. लेकिन बड़ी बात यह है कि अब ब्लड बैंक में रक्तदान करने वालों की कमी आ चुकी है. लोग ब्लड डोनेट करने से डर रहे हैं. जिसको देखते हुए नवागत ब्लड बैंक प्रभारी ने खुद रक्तदान किया. जिसके बाद डॉक्टर भी इसमें बढ़ चढ़कर कर हिस्सा ले रहे हैं.

बच्चों को चढ़ाया एचआईवी पॉजिटिव ब्लड
मध्य प्रदेश के सतना जिले के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में बीते माह 16 दिसंबर को एक बड़ा मामला सामने आया था. जिसमें यह खुलासा हुआ था कि, जिले के 6 थैलेसीमिया से पीड़ित मासूम बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया था. जिसको लेकर यह मामला पूरे देश भर में मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ था. इस मामले पर लगातार केंद्र और स्टेट की टीम द्वारा जांच की गई. जांच में ब्लड बैंक प्रभारी सहित दो टेक्नीशियनों को निलंबित कर दिया गया, और आगे की जांच में टीमें जुटी हुई हैं.

ब्लड बैंक प्रभारी ने किया ब्लड डोनेट (ETV Bharat)

सतना जिला चिकित्सालय में ब्लड की कमी
इस मामले के बाद सतना जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में रक्तदान की काफी कमी आ गई है. जिसके चलते नवागत ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर अंकिता पांडेय ने खुद रक्तदान किया. उन्होंने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को रक्त देने के लिए ब्लड डोनेट किया. उनकी इस पहल के बाद जिला अस्पताल के डॉक्टर भी अब एक-एक करके रक्तदान करने के लिए आगे आने लगे हैं.

हर माह 8 से 9 सौ यूनिट ब्लड की खपत
ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर अंकिता पांडेय ने बताया कि, ''हमारे पास वर्तमान में 7 से 8 यूनिट ब्लड रक्त कोष में रखा हुआ है. रक्त की काफी कमी आ चुकी है. अगर वर्ष 2025 की बात करें तो 11 हजार यूनिट के लगभग 1 साल में ब्लड की खपत है. यानी माह में करीब 8 से 9 सौ यूनिट ब्लड की खपत होती है. जिनमें से हमारे पास थैलेसीमिया से पीड़ित 57 बच्चे रजिस्टर्ड हैं, जिन्हें नियमित रूप से ब्लड चढ़ाया जाता है. इसके अलावा हमारे जिला अस्पताल के गायनिक विभाग में नॉर्मल या सीजर प्रसव में ब्लड जाता है.

कैंसर और सिकलसेलिनिया जैसी गंभीर बीमारी के लिए भी रक्त की काफी आवश्यकता होती है. हमारी सभी लोगों से अपील है कि पूर्व में जो चीज सामने आई थी अब उसमें सुधार हो चुका है. अब रक्तदान करने वाले लोगों की संपूर्ण दस्तावेज एवं मानकों के आधार पर जांच की जाती है. उसके आधार पर रक्तदान कराया जाता है. इसलिए आप लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान जरूर करें, क्योंकि रक्तदान से आप किसी की आखिरी उम्मीद में खरे उतर सकते हैं. उसका जीवन भी बचाया जा सकता है.''

डॉक्टरों ने किया रक्तदान
शनिवार को जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज सिंह और उनकी पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ नीलम सिंह खुद ब्लड बैंक आकर रक्तदान किया. डॉ. मनोज सिंह का कहना है कि, ''पूर्व में एचआईवी के घटनाक्रम के बाद लोग रक्तदान करने से डर रहे हैं. लेकिन वर्तमान में सारी गतिविधियों पर सुधार हो चुका है, और लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान करें. आज हम सपत्नीक रक्तदान करने आए हैं और जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों एवं स्टाफ से भी रक्तदान करने की अपील करते हैं.''