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क्या भारत में भी ZEN-Z बगावत कर सकता है? क्या बोले ABVP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

भारत की नई जेनरेशन में देशप्रेम की भावना है. इसे कोई भ्रमित नहीं कर सकता. क्योंकि भारत की युवा संस्कृति व परंपरा से जुड़े हैं.

India Gen Z direction
भारत की नई जेनरेशन में देशप्रेम की भावना (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 5, 2026 at 3:02 PM IST

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सतना : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी सोमवार को सतना पहुंचे. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा "भारत का जेन-जी (ZEN-Z) भारत माता की जय का विचार है. भारत की ZEN-Z राष्ट्रभक्ति युवा है. उसको भ्रमित करना बहुत ही कठिन है. यहां के युवा कभी बगावत नहीं कर सकते. बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश में युवाओं को लोगों ने भ्रमित किया. यहां ऐसा करना संभव नहीं है."

भारत का युवा देश के साथ खड़ा है

एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी का कहना है "यह जेन जी शब्द थोड़ा फैशनेबल है. जिनका जन्म सन् 2000 के बाद हुआ, यानी इंटरनेट के जमाने में हुआ, उनकी इनफॉरमेशन बहुत फास्ट है. एक टर्मिनोलॉजी आ गई जेनरेशन जी. भारत के जनरेशन जी में आप देखिए, भारत के राष्ट्रीय विचार हैं. दिल्ली, हैदराबाद, चंडीगढ़ एवं उड़ीसा विश्वविद्यालय में विद्यार्थी परिषद के ही अध्यक्ष बने हैं. इसी से पता चल रहा है कि भारत का युवा भारत के विचार के साथ है."

एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी (ETV BHARAT)

भारत की युवा पीढ़ी त्याग की परंपरा मानती है

रघुराज किशोर तिवारी ने कहा "देशभर में लेफ्ट विचारधारा भ्रमित करने का काम करती है. भारत में जाति विद्वेष फैलाने का काम करता है, ऐसे प्रयास कभी सफल नहीं हो सकता. क्योंकि हमारे देश का युवा पीढ़ी में त्याग की परंपरा है. देश के पूर्वजों का जो वैभवशाली इतिहास है, उस पर गर्व करता है और उसके अनुसार चलने का प्रयास करता है.

"आज जेन जी के युवाओं के प्रयास के कारण भी भारत आज चौथी इकोनॉमी बन गया है. इकोनॉमी में भारत अब जापान से आगे आ गया है. अगले साल हम तीसरे स्थान पर आ जाएंगे. यह सब यूथ के कारण हो रहा है."

इंदौर कांड की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए

रघुराज किशोर तिवारी ने इंदौर में दूषित पानी को लेकर कहा "वैसे विद्यार्थी परिषद छात्रों व शिक्षकों के बीच काम करने वाला संगठन है. उसका कोई राजनीतिक विषयों में बहुत कमेंट नहीं होता. फिर भी समाज में ऐसा विषय है तो मेरा ऐसा सोचना है कि ऐसे विषयों पर प्रशासन को संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए और जिस कारण से ऐसी घटना हुई, उसकी पुनरावृत्ति ना हो, इस पर काम करना चाहिए."