भिवानी में दिखा 70 के दशक का हरियाणा, आप भी देखें सूबे की सांस्कृतिक और पुरातन वस्तुओं की झलक
भिवानी में सर्व कल्याण मंच हरियाणा ने प्रदर्शनी लगाई. इस प्रदर्शनी में 70वें दशक के हरियाणा की झलक देखने को मिली. देखें वीडियो.

Published : May 26, 2026 at 2:43 PM IST
भिवानी: हरियाणा प्रदेश का आधे से ज्यादा हिस्सा दिल्ली एनसीआर में आता है. ये सूबा राजधानी दिल्ली से तीन दिशाओं से घिरा है. ऐसे में तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण व शहरीकरण से हरियाणा की संस्कृति पर असर पड़ रहा है. बहुत सी ऐसी चीजें हैं, जो विलुप्त होने की कगार पर ही. हरियाणा की संस्कृति और विरासत को जिंदा रखने के लिए भिवानी में सर्व कल्याण मंच हरियाणा ने प्रदर्शनी लगाई. इस प्रदर्शनी में 70वें दशक का हरियाणा देखने को मिला.
भिवानी में दिखी हरियाणा की संस्कृति: सर्व कल्याण मंच हरियाणा ने भिवानी के पुर गांव में प्रदर्शनी लगाई है. इसमें हरियाणा के पुराने सामान की स्टॉल लगाई गई है. स्टॉल लगाने वाले हरियाणा के पारंपरिक परिधान (पुरुष- धोती कुर्ता और महिलाएं दामन) में दिखे. इसके अलावा बैलगाड़ी से लेकर खेत जोतने का हल भी इस प्रदर्शनी में देखने को मिला. भारतीय करेंसी का इतिहास भी इस मेले में दिखा. आज की पीढ़ी ने बड़ी उत्सुकता से इसे देखा.
हरियाणवी वाद्य यंत्र से कलाकारों ने मोहा मन: प्रदर्शनी देखने आए लोगों ने ना केवल प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बल्कि ठेठ हरियाणवी परिधानों व हरियाणवी वाद्य यंत्रों का लुत्फ उठाया. हरियाणवी कलाकारों ने इस प्रदर्शनी में दर्शकों का मन मोहा. इस प्रदर्शनी में पुराने समय में प्रयोग होने वाली करेंसी, पुराने समय में प्रयोग होने वाले मापतोल के उपकरण, रसोई में प्रयोग होने वाले चीनी मिट्टी के बर्तन प्रदर्शित किए गए.



इन चीजों की लगी प्रदर्शनी: प्रदर्शनी में टोकनी, लालटेन, कृषि में प्रयोग होने वाले यंत्र, रेहडू, पुरातन हल, गोपियां, फाली, दीवे, कढ़ावनी, रई, बिलौना जैसे पुरातन हरियाणवी वस्तुएं देखने को मिली. जिन्हें देखकर पुराने समय के लोगों ने अपने बचपन व जवानी को याद किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन व अपनी जवानी में इन उपकरणों व साधनों का प्रयोग किया है. आज ये आधुनिकता की दौड़ में उतने उपयोगी नहीं रहे है. लेकिन ठेठ हरियाणवी संस्कृति व हरियाणवी ग्रामीण जीवन को दर्शाते हैं कि किस प्रकार से हरियाणवी लोग सरलता से कम साधनों में अपना जीवन गुजारते थे.



GenZ को मिला हरियाणा की विरासत और संस्कृति देखने का मौका: इस मौके पर हरियाणवी वाद्य यंत्रों जैसे इकतारा, तुम्बा, ढोल, ढहरू, ढफली, बीण व ठेठ हरियाणवी परिधान धोती, कुर्ता, दामन, गोटेदार चुनड़ी, पगड़ी, लहंगा में कलाकारों ने आगंतुकों का स्वाागत किया तथा वाद्य यंत्रों के साथ हरियाणवी संस्कृति से जुड़े संगीत भी का प्रदर्शन किया. लोगों ने हरियाणवी संस्कृति से जुड़े इन स्टॉलों का अवलोकन कर अपने पुराने दिनों को याद किया तथा नई पीढ़ी के बच्चों को ये बताने का प्रयास किया कि पहले हरियाणवी लोगों का जीवन कैसा था तथा किस प्रकार के साधनों का प्रयोग करते हुए वे अपना जीवन गुजारते थे. इस प्रदर्शनी के जरिए GenZ ने भी हरियाणा की संस्कृति और विरासत को करीब से देखा.

