सरगुजिहा व्यंजन बोथल बासी का कमाल, B12-D3 जैसी कई विटामिन्स का है खजाना, जानिए कैसे बनाएं, डायटीशियन ने बताई सावधानी
सरगुजा में खूब खाया जाता है बोथल बासी, क्या सच में दूर करता है विटामिन B12 और D3 की कमी?, देशदीपक गुप्ता की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 24, 2026 at 2:56 PM IST
सरगुजा: आज के समय में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में विटामिन B12 और D3 की कमी आम समस्या बन गई है. इसके लिए डॉक्टर अक्सर सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं. लेकिन सरगुजा के पारंपरिक खान-पान में एक ऐसा व्यंजन शामिल है, जिसे स्थानीय लोग पीढ़ियों से खाते आ रहे हैं. यह व्यंजन है बोथल बासी.
सरगुजा में लोग रात के बचे हुए पके चावल (भात) को पानी में भिगोकर रातभर रखते हैं और सुबह नमक, मिर्च, अचार या सब्जी के साथ खाते हैं. देखने में साधारण लगने वाला यह भोजन पोषण और गट हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डायटीशियन भी खाने की सलाह दे रही हैं.
हालांकि इसे कितनी मात्रा में खाना है और किसे ये ज्यादा नहीं खाना चाहिए, कैसे बनाएं, क्या फायदे हैं इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए ETV भारत ने सरगुजा के ही एक ग्रामीण के साथ ही डायटीशियन सुमन सिंह से भी खास बातचीत की.
पीढ़ियों से खा रहे हैं ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण संजय कुमार बताते हैं कि उनके यहां बोथल बासी का सेवन वर्षों से होता आ रहा है. बोथल बासी का फायदा तो नहीं जानते हैं, लेकिन पुरखों से हम लोग इसको खा रहे हैं. रात का बासी हो या दिन का, बचपन से ही खाते आ रहे हैं.
भात में पानी डालते हैं, फिर उसमें नमक, मिर्च और अचार डालकर खाते हैं. सरगुजा में लगभग सभी लोग बोथल बासी खाते हैं.- संजय कुमार, ग्रामीण
गट हेल्थ के लिए फायदेमंद
डायटीशियन सुमन सिंह के अनुसार, दही और बासी चावल का संयोजन गट हेल्थ के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं, जो शरीर की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं. आजकल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में विटामिन B12 और D3 की कमी देखी जा रही है. ऐसे में दही और बासी चावल जैसे घरेलू और सस्ते खाद्य पदार्थ काफी मददगार हो सकते हैं. यह गट हेल्थ के लिए अच्छा है और इसमें कई जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं.

दही मिलाने से बढ़ जाता है पोषण
सुमन सिंह का कहना है कि केवल चावल और पानी से मुख्य रूप से ऊर्जा मिलती है, लेकिन यदि इसमें ताजा दही या छाछ मिलाई जाए तो इसका पोषण मूल्य बढ़ जाता है. अगर बोथल बासी में ताजा दही या छाछ मिलाकर खाया जाए और साथ में जीरा, पुदीना और मिर्च शामिल की जाए तो प्रोटीन, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं.
प्रोबायोटिक गुण भी मौजूद
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार का भोजन शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.
इसमें प्रोबायोटिक गुण मिलते हैं, जो गट हेल्थ को मजबूत करने में मदद करते हैं. इसका सकारात्मक असर लीवर के साथ ही अच्छी त्वचा करने और बालों पर भी देखा जा सकता है.- सुमन सिंह, डायटीशियन
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा लाभकारी
डायटीशियन का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह भोजन विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इनमें अक्सर पाचन और पोषण संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. सुमन सिंह ने बताया कि बुजुर्गों में खाना पचने और पोषक तत्वों की कमी की समस्या रहती है. वहीं बच्चे फास्ट फूड की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. ऐसे में बोथल बासी एक पौष्टिक विकल्प हो सकता है.

इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
हालांकि, विशेषज्ञों ने इसके सेवन में कुछ सावधानियां बरतने की भी सलाह दी है. मोटापा और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए. एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज के मरीज चाहें तो सामान्य चावल की जगह कोदो चावल का उपयोग कर सकते हैं. वहीं मोटापे से परेशान लोगों को मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
सरगुजा का पारंपरिक व्यंजन बोथल बासी केवल एक स्थानीय भोजन नहीं, बल्कि पोषण और गट हेल्थ से जुड़ी एक पारंपरिक खाद्य संस्कृति भी है. हालांकि इसके सभी स्वास्थ्य दावों की वैज्ञानिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है, लेकिन दही, छाछ और पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया यह भोजन संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है.

