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सरस मेले में आत्मनिर्भर भारत की धूम, मिलेट्स के शुगर-फ्री उत्पादों ने जीता सबका दिल

मेले में ओम नमो शिवाय स्वयं सहायता समूह के स्टॉल पर लोगों की खास भीड़ देखने को मिल रही है.

SARAS MELA MANDI 2026
सरस मेला बना आत्मनिर्भर भारत की मिसाल (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 21, 2026 at 7:14 PM IST

3 Min Read
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मंडी: मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के दौरान इंदिरा मार्केट की छत पर सजा सरस मेला इस बार खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह मेला केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सजीव तस्वीर बनकर उभरा है. देश के 14 राज्यों, हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों और मंडी के 14 विकास खंडों से आए स्वयं सहायता समूहों ने यहां अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं.

सरस मेले में हर स्टॉल एक नई कहानी कहता नजर आता है. कहीं हिमाचल की पारंपरिक हस्तकला है, तो कहीं राजस्थान की कढ़ाई. पूर्वोत्तर की बुनाई और महाराष्ट्र के पारंपरिक खाद्य उत्पाद भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. हस्तनिर्मित वस्त्र, सजावटी सामान और स्थानीय व्यंजन मेले की पहचान बन चुके हैं. यहां आने वाले पर्यटक केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति का अनुभव भी कर रहे हैं.

मिलेट्स के शुगर-फ्री उत्पादों ने जीता सबका दिल (ETV BHARAT)

मिलेट्स के शुगर-फ्री उत्पाद बने खास आकर्षण

महाराष्ट्र के धूलिया जिले से आई ओम नमो शिवाय स्वयं सहायता समूह की सदस्य कलाबाई रायपुरे के स्टॉल पर लोगों की खास भीड़ देखी जा रही है. उनके द्वारा तैयार किए गए रोस्टेड ज्वार, बाजरा, मूंग दाल पापड़, सोयाबीन नमकीन, केला चिप्स, पानपूरी खाखरा और मेथी खाखरा जैसे उत्पाद लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं. खास बात यह है कि ये सभी उत्पाद शुगर-फ्री हैं और पूरी तरह हाथ से तैयार किए जाते हैं.

SARAS MELA MANDI 2026
मिलेट्स के शुगर-फ्री उत्पाद (ETV BHARAT)

महिलाओं को मिल रहा सशक्त मंच

कलाबाई रायपुरे ने बताया कि वर्ष 2005 से वे इस कार्य से जुड़ी हैं और वर्तमान में 10 महिलाएं उनके साथ काम कर रही हैं. मिलेट्स से बने उत्पाद न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं. वे अपने उत्पाद देश के कई राज्यों में कोरियर के माध्यम से भेजती हैं. कलाबाई ने बताया कि सरस मेले जैसे मंच से उन्हें अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है और इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है.

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सरस मेले में कलाबाई रायपुरे का स्टॉल (ETV BHARAT)

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

सरस मेला इस बात का प्रमाण है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. देश-विदेश से आए पर्यटक इन स्टॉलों पर रुककर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिल रहा है. यह मेला केवल व्यापार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की सच्ची कहानी भी बयां कर रहा है.

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