संकष्टी चतुर्थी 2026: काशी में उमड़ीं भक्तों की भीड़, पुत्र की दीर्घायु के लिए व्रत; जानिए चन्द्र दर्शन का समय
सकट चौथ के मौके पर पिता की नगरी में हो रही पुत्र की जय जयकार, मंदिरों में लंबी कतारें.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 1:43 PM IST
|Updated : January 6, 2026 at 3:24 PM IST
वाराणसी: भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में आज उनके पुत्र गणपति की जय जयकार हो रही है. मौका है माघ की चतुर्थी तिथि का जिसके चलते सकट चौथ या संकष्टी चौथ का पर्व मनाया जा रहा है. आज सुबह से ही गणेश जी के मंदिरों में भक्तों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है. काशी के प्रसिद्ध बड़ा गणेश मंदिर, चिंतामणि गणेश, सिद्धिविनायक समेत ढूंढीराज गणेश मंदिरों में जबरदस्त भीड़ है. जहां पर लगभग 2 किलोमीटर भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही व्रती महिलाएं गणपति महाराज के दर्शन के लिए पहुंच रही हैं. जानिए कैसे करें व्रत-पूजन और चन्द्र दर्शन का समय...
संकष्ट चौथ व्रत क्यों किया जाता है: इस बारे में मंदिर के पुजारी मोनू तिवारी का कहना है कि आज के दिन महिलाए अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए व्रत रहती हैं. इसी के साथ भगवान गणेश की आराधना के साथ व्रती महिलाएं संतान की सुरक्षा और उसकी लंबी उम्र की कामना के साथ घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी फास्ट करती हैं. शाम को चंद्रोदय के साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद अपना व्रत खोलती हैं.

ये है चंद्रोदय का समय: बता दें, आज चंद्र उदय का विशेष महत्व माना जाता है. पुजारी मोनू तिवारी के मुताबिक आज शाम को 7.30 बजे के बाद महिलाएं पूजन करें, जिसके बाद 8:36 पर चन्द्र दर्शन (चंद्रोदय) का समय है.
पुजारी का कहना है कि यह बहुत ही पावन पर्व है और भगवान गणेश को कुछ विशेष सामग्री आज अर्पित की जाती है. जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है. काले तिल का लड्डू, गुड़ तिलकुट और अन्य वह सामग्री जो ठंड के मौसम में मिलती हैं. इन सारी सामग्रियों के साथ ही प्रभु गणेश को बेसन का लड्डू और मोदक भी अर्पित किया जाता है.

संकष्ट चौथ की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं.
- इसके बाद सकट चौथ व्रत रखने का संकल्प करें.
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी और सकट माता की प्रतिमा की स्थापना करें.
- सिंदूर का तिलक लगाएं. घी का दीपक जलाएं.
- भगवान गणेश की प्रतिमा पर फूल, फल और मिठाइयां अर्पित करें.
- पूजा में तिलकुट का भोग जरूर शामिल करें.
- गणेश चालीसा का पाठ करें. अंत में बप्पा की आरती करें.
- शंखनाद से पूजा पूर्ण करें.
- प्रसाद खाकर अपने व्रत का पारण करें.
बता दें, भगवान गणेश के मंदिर में भक्तों की भीड़ के साथ ही मंदिर के बाहर और शहर के अलग-अलग हिस्सों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी आज मिल रहीं हैं. इन प्रतिमाओं को खरीद कर शाम के वक्त विधि-विधान से महिलाएं पूजन करती हैं.

क्या कहती हैं व्रती महिलाएं: सकट चौथ का व्रत करने वाली महिलाओं का कहना है कि आज हम पूरा दिन व्रत रहने के बाद शाम को भगवान गणेश का पूजन करके अपना व्रत पूरा करते हैं. अपनी संतान की सुख शांति समृद्धि के साथ घर परिवार की तरक्की के लिए ये कठिन व्रत करके भगवान गणेश से यही मन्नत मांगते हैं कि सब कुछ अच्छा हो. घर- परिवार में सभी की तरक्की हो और सब स्वस्थ रहें.

जानें क्या है व्रत कथा: ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के मुताबिक इस दिन विघ्न विनाशक ने अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से मुक्ति पाई थी. इस वजह से इसे सकट चौथ कहा जाता है. मान्यताओं के मुताबिक एक बार गणेश भगवान की मां माता पार्वती स्नान के लिए गईं तो उन्होंने पहरा देने के लिए भगवान गणेश को द्वार पर खड़ा कर दिया और आदेश देते हुए कहा कि कोई भी अंदर ना आने पाए. इसके बाद वह स्नान करने चली गईं. कुछ देर के बाद भगवान गणेश के पिता और माता पार्वती के पति भोलेनाथ आए और अंदर जाने लगे. गणेशजी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और कहा कि किसी को भी अंदर जाने की आज्ञा नहीं है. इस बात को लेकर पिता-पुत्र दोनों में विवाद हो गया. इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और त्रिशूल से भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया. जब मां पार्वती स्नान करके बाहर आईं तो उन्होंने देखा कि उनके बेटे का यह हाल हो गया है. उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया. वे शिवजी से नाराज होकर बोलीं कि मुझे मेरा बेटा जीवित चाहिए.
बहुत ज्यादा जिद करने पर शिवजी ने गणेशजी के सिर के स्थान पर एक हाथी का सिर लगा दिया. तभी से उन्हें गजानन कहा जाने लगा. इसके साथ ही उन्हें वरदान मिला कि देवताओं में सबसे पहले उनकी ही पूजा की जाएगा. ऐशी मान्यता है कि संकष्टी चतर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
प्रयागराज में गणेश चतुर्थी: धर्म नगरी प्रयागराज में गणेश चतुर्थी के अवसर पर 135 वां गणेश उत्सव मनाया गया और नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई. इसमें महिला-बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. शोभायात्रा जॉनसन गंज स्थित गणेश मंदिर से उठकर विभिन्न मार्गों से होते हुए फिर गणेश मंदिर में आकर समाप्त होगी. मुख्य अतिथि पूर्व मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने भगवान गणेश का आरती पूजन करके यात्रा का शुभारंभ किया.

