जशपुर में रेत माफिया का फैलता साम्राज्य, छत्तीसगढ़-झारखंड की सीमा पर शंख नदी में अवैध खनन का खेल जारी
रेत माफिया के गुर्गों ने गौठान में रेत का पहाड़ खड़ा कर दिया है. आरोप है कि माफिया के गुर्गे खुलेआम ‘गुंडा टैक्स’ वसूलते हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 20, 2026 at 10:14 AM IST
जशपुर: पीसीसी चीफ दीपक बैज लगातार बीजेपी सरकार में अवैध खनन के बढ़ते मामलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. एक बार फिर रेत खनन के अवैध खेल का मामला सामने आया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ और झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा पर रेत तस्कर सक्रिय हो चुके हैं. ये तस्कर गिरोह संगठित रुप से शंख नदी का सीना छलनी कर रेत का खनन कर रहा है. अवैध उत्खनन से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक को रोकने में संबंधित विभाग नाकाम साबित हो रहा है, ऐसा स्थानीय लोगों का आरोप है. कार्रवाई नहीं होने से इन तस्करों का हौसला दिनों दिन बुलंद होता जा रहा है.
रेत माफिया का फैलता साम्राज्य
रेत का अवैध खनन और भंडारण करने वालों का खौफ इतना ज्यादा है कि इसके विरोध का साहस पंचायत प्रतिनिधित तक नहीं जुटा पा रहे हैं. आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक उदासीनता के चलते रेत तस्कर दिन और रात नदी से अवैध खनन कर रहे हैं. स्थानीय लोग दबी जुबान में बताते हैं कि रेत माफिया के गुर्गे आवाज उठाने पर खूंटे पर टांग देने की धमकी देते हैं.
लोदाम थाना क्षेत्र की घटना
रेत खनन का ये पूरा मामला लोदाम थाना क्षेत्र के ग्राम पुत्रीचैरा का है. छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा से लगे इस गांव में कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर गौठान की सरकारी जमीन तक रेत माफियाओं का कब्जा दिखाई देता है. शंख नदी से अवैध रूप से निकाली गई रेत का इतना बड़ा भंडारण यहां किया गया है कि कई स्थानों पर रेत के विशाल पहाड़ खड़े हो गए हैं. हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नजरों के सामने किया जा रहा है.

पुत्रीचैरा में रेत खदान और भंडारण का चल रहा काम
ईटीवी भारत की टीम ने जब इस पूरे मामले की जमीनी पड़ताल की तो सामने आया कि पुत्रीचैरा में संचालित यह अवैध रेत खदान और रेत भंडारण का कारोबार कोई नया नहीं है, बल्कि कई वर्षों से लगातार चला आ रहा है. स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायतें भी होती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कारोबार पर रोक नहीं लग पाया. ग्राम पंचायत पुत्रीचैरा के सरपंच अरुण लकड़ा ने बताया कि पंचायत ने शंख नदी में वैधानिक रूप से रेत खदान संचालन के लिए प्रशासन के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किया था. हालांकि शासन स्तर पर नियमों में बदलाव होने के कारण यह प्रस्ताव अधर में लटक गया.

पंचायत की ओर से पूर्व में भी अवैध उत्खनन और भंडारण की शिकायत प्रशासन से की गई थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है और अवैध कारोबार लगातार जारी है: अरुण लकड़ा, सरपंच, ग्राम पंचायत पुत्रीचैरा

क्षेत्र में चल रहे अवैध उत्खनन और भंडारण से शासन को तो राजस्व का नुकसान हो ही रहा है, साथ ही ग्राम पंचायत भी आर्थिक रूप से प्रभावित हो रही है. यदि रेत का कारोबार नियमों के तहत संचालित किया जाता तो पंचायत को राजस्व प्राप्त होता, लेकिन वर्तमान में इसका लाभ केवल अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को मिल रहा है: रामचंद्र राम, पंचायत सचिव
ट्रिप के हिसाब से होती है वसूली-स्थानीय ग्रामीण
बताया जा रहा है कि पुत्रीचैरा क्षेत्र में कुछ संदिग्ध और दबंग किस्म के लोग स्थानीय ट्रैक्टर चालकों से प्रति ट्रिप 100 रुपये की वसूली कर रहे हैं. यह वसूली किसी अधिकृत संस्था या विभाग द्वारा नहीं बल्कि कथित रूप से दबंगों के माध्यम से की जा रही है. अनुमान है कि केवल स्थानीय ट्रैक्टरों से होने वाली यह अवैध वसूली हर महीने 30 से 40 हजार तक पहुंच चुकी है. लोग बताते हैं कि पुत्रीचैरा से झारखंड की ओर जाने वाली रेत से लदी गाड़ियों से भी 200 से 300 रुपये प्रति ट्रिप की दर से वसूली की जा रही है.

मीडिया के सामने खनिज अधिकारी को किया गया फोन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत सचिव रामचंद्र राम ने मीडिया की मौजूदगी में ही जिला खनिज अधिकारी विवेक साहू से फोन पर चर्चा की. उन्होंने पुत्रीचैरा में चल रहे अवैध रेत उत्खनन और बड़े पैमाने पर किए गए भंडारण की जानकारी देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की.


पुत्रीचैरा में अवैध रेत भंडारण की सूचना आपके माध्यम से मिली है. इसकी जांच कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी: विवेक साहू, खनिज अधिकारी
कब होगी तस्करों पर कार्रवाई
अब सवाल यह उठता है कि छत्तीसगढ़-झारखंड अंतरराज्यीय सीमा पर वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासन कब तक अंकुश लगा पाएगा. क्योंकि शंख नदी का सीना चीरकर निकाली जा रही रेत, गौठान की जमीन पर खड़े रेत के पहाड़ और खुलेआम चल रही अवैध वसूली यह बताने के लिए काफी हैं कि रेत तस्करों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं.

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