भिवानी में सैंड ऑफ आर्ट शो के माध्यम से जीवंत हुई छोटे वीर साहिबजादों के शहादत की अमर गाथा, मुंबई से पहुंचे कलाकारों ने किया अद्भुत प्रस्तुतीकरण
भिवानी में वीर बाल दिवस पर सैंड ऑफ आर्ट शो द्वारा छोटे वीर साहिबजादों की शहादत की प्रेरणादायक गाथा प्रस्तुत की गई.

Published : December 19, 2025 at 10:31 AM IST
भिवानी: भिवानी के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सैंड ऑफ आर्ट शो का आयोजन किया गया. कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वीर बाल दिवस के अवसर पर छोटे वीर साहिबजादों की शहादत की स्मृति में ये आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम उपायुक्त साहिल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया ने किया. शो के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला.
जीवंत हुई छोटे वीर साहिबजादों के शहादत की गाथा: मुंबई से आए सैंड ऑफ आर्ट कलाकारों ने रेत कला के माध्यम से गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत की गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. लगभग 40 मिनट के इस शो में मुगल शासकों के अत्याचारों और साहिबजादों के अदम्य साहस को युवा पीढ़ी के समक्ष जीवंत किया गया.
ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से दर्शाया: कलाकारों ने खालसा पंथ की स्थापना के बाद की ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से दर्शाया.सरहिंद के सूबेदार द्वारा किए गए आक्रमण, 20-21 दिसंबर 1704 को मुगल सेना से युद्ध के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा परिवार सहित आनंदपुर साहिब किला छोड़ना तथा सरसा नदी पर परिवार के विछोह के दृश्य दर्शकों को भावविभोर कर गए. शो में गंगू द्वारा लालच में आकर माता गुजरी जी और छोटे साहिबजादों की सूचना वजीर खां को देने और उसके बदले सोने की मोहरें प्राप्त करने की घटना को भी दर्शाया गया.
उस समय की यातनाओं को दर्शाया गया:इसके बाद माता गुजरी जी तथा 7 वर्षीय साहिबजादा जोरावर सिंह और 5 वर्षीय साहिबजादा फतेह सिंह की गिरफ्तारी, ठंडे बुर्ज में अमानवीय यातनाएं और इस्लाम धर्म स्वीकार करने का दबाव दिखाया गया. भरी सभा में दोनों नन्हे साहिबजादों द्वारा निर्भीक होकर “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” का जयघोष करना दर्शकों के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण रहा. अंततः 27 दिसंबर 1704 को दोनों साहिबजादों को दीवारों में जीवित चिनवाने की हृदयविदारक घटना को रेत कला के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जब वे जपुजी साहिब का पाठ कर रहे थे.साहिबजादों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी जी द्वारा अकाल पुरुष का स्मरण करते हुए प्राण त्याग देने की घटना भी शो का मार्मिक हिस्सा रही.
"ऐसे कार्यक्रम बच्चों के ज्ञान को मजबूत करते हैं": इस दौरान भिवानी जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया ने कहा कि, “ऐसे कार्यक्रम बच्चों के ज्ञान और संस्कारों को मजबूत करते हैं. सैंड ऑफ आर्ट के माध्यम से इतिहास को जिस तरह जीवंत किया गया है, उससे बच्चों को अपने गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर मिला है.” वहीं, सैंड ऑफ आर्ट कलाकार श्रम पटेल ने कहा कि “हमारा उद्देश्य है कि नई पीढ़ी तक साहिबजादों के बलिदान की गाथा कला के माध्यम से पहुंचे. रेत कला एक ऐसा माध्यम है, जो भावनाओं को सीधे दिल तक पहुंचाता है.”
बता दें कि इस कार्यक्रम के दौरान वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया.
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