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गाजियाबाद में शुरू हुआ 'संवाद सेतु', अब 10 मिनट में अफसरों को देना होगा जवाब

अफसरों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाए जाने की शिकायत के बाद योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.

गाजियाबाद में संवाद सेतु
गाजियाबाद में संवाद सेतु (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 26, 2026 at 7:27 PM IST

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नई दिल्ली/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हरदोई और और कन्नौज में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 'संवाद सेतु' (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) की शुरुआत की गई है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत गाजियाबाद में संवाद सेतु शुरू किया गया है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद को पारदर्शी और जवाबदेही बनाने के लिए 'संवाद सेतु' व्यवस्था लागू की गई है. कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा शिकायत की जाती थी कि अधिकारी उनका फोन नहीं उठाते और ना ही कॉल बैक करते हैं, जिससे कि जनहित से संबंधित में बाधा उत्पन्न होती है.

योगी सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री असीम अरुण द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गाजियाबाद में संवाद सेतु का शुभारंभ किया गया है. प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने डीएम को निर्देश दिए हैं कि संवाद सेतु का सुचारू रूप से संचालन किया जाए. माना जा रहा है कि संवाद सेतु की शुरुआत होने के बाद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा जिससे कि जनहित के कार्यों को रफ्तार मिल सकेगी.

गाजियाबाद में शुरू हुआ संवाद सेतु (ETV Bharat)

जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, संवाद सेतु का मुख्य उद्देश्य है कि जब कोई जरूरत नहीं थी किसी सरकारी कार्यालय या प्रशासनिक अधिकारी से संपर्क करना चाहिए लेकिन किसी कारणवश संबंधित अधिकारी का फोन नहीं उठाता है और 10 मिनट के भीतर कॉल बैक नहीं करता है तो जनप्रतिनिधि संवाद सेतु हेल्पलाइन नंबर पर कॉल दर्ज कर सकते हैं. संवाद सेतु कमांड सेंटर द्वारा संबंधित अधिकारी से संपर्क कर संबंधित जनप्रतिनिधि को कॉल करने के निर्देश दिए जाएंगे. इतना ही नहीं कमांड सेंटर द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधि को कॉल करके बातचीत की गई है या नहीं.

संवाद सेतु केवल कार्य दिवस, कार्यालय समय और सरकारी नंबरों पर लागू होगा. विकास भवन में कमांड सेंटर स्थापित किया गया है. मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल के मुताबिक बेहतर संवाद और तुरंत प्रक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा जबकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी.

बता दें कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा मुद्दा उठाया जा चुका है कि प्रशासनिक अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं जिसके चलते जनहित के कार्य प्रभावित होते हैं. इसी को लेकर राज्य मंत्री असीम अरुण द्वारा संवाद सेतु कमांड सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया गया था. प्रभारी मंत्री के सुझाव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के तीन जिलों में लागू किया गया है. कमांड सेंटर की मॉनिटरिंग की जाएगी इसके बाद इस पायलट प्रोजेक्ट को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा.

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