ETV Bharat / state

'MP की सरकारी नौकरियों में काशी के संस्कृत छात्रों को मिले मौका', संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति ने सीएम को भेजा पत्र

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने उठाई मांग.

sampurnanand-sanskrit-university sanskrit students kashi get opportunity government jobs of mp latter to cm demand
संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति ने सीएम को भेजा पत्र. (etv bharat)
author img

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 28, 2026 at 2:17 PM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

वाराणसी: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने संस्कृत सहायक प्राध्यापक नियुक्तियों में परम्परागत संस्कृत विषयों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को समुचित अवसर प्रदान दिए जाने की मांग की है.


पत्र में कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की दार्शनिक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला है. न्याय, मीमांसा, ज्योतिष, वेदान्त, धर्मशास्त्र, आगम, पुराण, सांख्ययोग एवं अन्य परम्परागत शास्त्र भारतीय ज्ञान-विज्ञान की वह गौरवशाली धरोहर हैं, जिन्होंने सहस्राब्दियों से राष्ट्र की वैचारिक एवं सांस्कृतिक चेतना को दिशा प्रदान की है.


उन्होंने मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा आयोग द्वारा संस्कृत सहायक प्राध्यापक पदों के लिए वर्तमान में सीमित विषयों को ही सह-विषय के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने पर चिंता व्यक्त की है. इसके कारण ज्योतिष, सिद्धान्त ज्योतिष, नव्य न्याय, मीमांसा, नव्य व्याकरण, तुलनात्मक दर्शन, धर्मशास्त्र, आगम, पुराणेतिहास, माधव वेदान्त एवं अन्य परम्परागत संस्कृत विद्याओं में अध्ययनरत अनेक योग्य छात्र-छात्राएं आवेदन प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं, जबकि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) एवं विद्यावाचस्पति जैसी राष्ट्रीय स्तर की योग्यताएं प्राप्त कर चुके हैं.

कुलपति प्रो शर्मा ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भारतीय ज्ञान-परम्परा, शास्त्रीय अध्ययन एवं बहुविषयी शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करती है. ऐसे में संस्कृत की पारम्परिक शाखाओं को सीमित दायरे में बाँधना न केवल शैक्षिक समावेशिता की भावना के प्रतिकूल है, बल्कि वर्षों से इन विषयों में साधनारत विद्यार्थियों के साथ अन्याय भी है.

कुलपति प्रो. शर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य सभी परम्परागत संस्कृत विषयों को संस्कृत सहायक प्राध्यापक नियुक्तियों की सह-विषय सूची में सम्मिलित करने हेतु सहानुभूतिपूर्वक एवं सकारात्मक निर्णय लिया जाए, जिससे संस्कृत की विविध शास्त्रीय परम्पराएँ सुरक्षित रह सकें तथा हजारों विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के भविष्य को नई दिशा प्राप्त हो सके.

ये भी पढ़ें: यूपी में मानसून के दो रास्ते कौन से, कब से शुरू होगी बारिश