सांभर लेक बर्ड फेस्टिवल : पक्षी प्रेमी करेंगे प्रवासी पक्षियों का दीदार, वेटलैंड मित्र का भी होगा पंजीकरण
पहले 24 फरवरी को होना था बर्ड फेस्टिवल, अब महीने के आखिर में संभव.

Published : February 23, 2026 at 3:59 PM IST
जयपुर : खारे पानी की एशिया की सबसे बड़ी सांभर झील में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आए माइग्रेटरी बर्ड्स से पक्षी प्रेमियों को रूबरू करवाने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस बार एक अनूठी पहल करने जा रहा है. सांभर झील में पहली बार बर्ड फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया जा रहा है. इसमें पक्षी प्रेमी सांभर झील में विचरण कर रहे प्रवासी पक्षियों के दीदार कर सकेंगे. इसके साथ ही आमजन को सांभर झील के इको सेंसेटिव जोन के प्रति जागरूक भी किया जाएगा. पहले यह बर्ड फेस्टिवल 24 फरवरी 2026 को आयोजित होना था. लेकिन अब इसका आयोजन फरवरी के आखिर में करवाया जाएगा.
मानसून में अच्छी बारिश, पानी की भरपूर आवक : जयपुर डीएफओ वी केतन कुमार ने बताया कि मानसून में अच्छी बारिश के कारण सांभर झील में इस बार अभी तक काफी पानी है. इसके चलते सर्दियों में प्रवास पर आए पक्षियों की बड़ी संख्या अभी सांभर झील में मौजूद है. ऐसे में पक्षी प्रेमियों के लिए यह आयोजन किया जा रहा है. उनका कहना है कि पहले यह कार्यक्रम 24 फरवरी को होना था. लेकिन अब फरवरी के आखिर में बर्ड फेस्टिवल करवाया जाएगा.

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नमक उत्पादन की प्रक्रिया की भी देंगे जानकारी : उन्होंने बताया कि पक्षी प्रेमियों को पक्षियों के बारे में जानकारी देने के साथ ही ई बर्ड एप का डेमोंस्ट्रेशन भी किया जाएगा. वहीं, बाहर से आए लोगों को नमक उत्पादन की प्रक्रिया के बारे में भी गहन जानकारी दी जाएगी. स्कूली बच्चों के लिए बर्ड क्विज और पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन करवाया जाएगा. प्रतियोगिताओं में विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया जाएगा.

लोगों को जागरूक करना है मकसद : उन्होंने बताया कि सांभर झील विश्व प्रसिद्ध रामसर साइट भी है, जो जैव विविधता से भरपूर है. यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और उन्हें अनुकूल माहौल मिले. इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा. इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए वेटलैंड मित्र मुहिम का आगाज भी किया जा रहा है. बर्ड फेस्टिवल के दौरान वेटलैंड मित्र पंजीकरण भी किए जाएंगे. इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को यहां के इको सेंसेटिव जोन के प्रति जागरूक किया जा सके.

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