संकट में किसान, बिहार में आलू की फसल के नहीं मिल रहे खरीदार.. क्या करें अन्नदाता?
बिहार में आलू की कम कीमत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. 5 रुपये किलो में भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं. पढ़ें..

Published : March 2, 2026 at 2:56 PM IST
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में आलू किसान परेशान है. वजह कीमत कम होना है. आलू उत्पादन में समस्तीपुर जिले को बिहार में अव्वल माना जाता है. इस साल पहले मौसम की बेरुखी फिर खाद की किल्लत का असर आलू किसानों पर दिखा. जिस वजह से अन्य वर्षों की तुलना में पैदावार काफी कम हुआ. इसके बावजूद अब आलू की उचित कीमत नहीं मिल पा रही है.
5 रुपये किलो में आलू की बिक्री: जिले का ताजपुर प्रखण्ड आलू उत्पादन का हब माना जाता है. इसके आसपास के पूसा, मोरबा और सरायरंजन आदि प्रखंडों में इन दिनों आलू किसानों की हालत दयनीय बनी हुई है. मंडी में आलू की कीमत महज 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक सिमट गई है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
कम कीमत से किसान परेशान: ताजपुर के आलू किसान रविन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि इतनी कम कीमत पर बिक्री करने से खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है. वे बताते हैं कि ताजपुर समेत समस्तीपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों में इस बार आलू की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई है. ऐसे में दाम नहीं मिलेगा तो कैसे अगली फसल लगा पाएंगे?
10 रुपये प्रति किलो हो दाम: आलू किसान बताते हैं कि इस बार प्रति एक कट्ठा आलू का उत्पादन दो-ढाई क्विंटल हुआ है. इस बार खेती में लागत प्रति कट्ठा करीब 1500-2000 रुपये हुई है. अब कीमत का हाल ऐसा है कि 1200-1500 भी प्रति कठ्ठा कीमत नही मिल रही. रविन्द्र प्रसाद सिंह ने सरकार से मांद की है कि कीमत 10 रुपये प्रति किलो तय हो.

"हमलोग आलू की खेती करते हैं. इस बार आलू को खरीदने वाला नहीं मिल रहा है. सरकार से मांग करते हैं कि इस ओर ध्यान दें, नहीं हो हमलोगों के लिए घर चलाना भी मुश्किल हो जाएगा."- रविन्द्र प्रसाद सिंह, आलू किसान
क्यों कम है आलू की कीमत?: इस समय आलू की कीमत कम होना, किसानों और व्यापारियों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों के भी समझ से परे है. मोतीपुर सब्जी मंडी के गद्दीदार मंजीत कुमार सिंह कहते हैं कि बाजार में मांग कमजोर रहने और बाहरी राज्यों से आवक बढ़ने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आ गई है.
किसान महासभा ने जताई चिंता: वहीं आलू किसान के इस हालत पर अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता सह आलू उत्पादक किसान ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि किसान बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, दवाई, मजदूरी और परिवहन मिलाकर प्रति किलो लागत करीब 15 रुपये तक आती है, जबकि उन्हें 5–6 रुपये में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है. जिले में कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की सीमित क्षमता और भंडारण शुल्क अधिक होने के कारण छोटे और सीमांत किसान तत्काल नकदी की जरूरत के कारण कम दाम पर ही फसल बेच रहे हैं. ऐसे में सरकार को एमएसपी निर्धारित करनी चाहिए.
"मेरी सरकार से मांग है कि अविलंब आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 9-10 रुपये किलो करे, जिससे किसान का अधिक आर्थिक नुकसान न हो. आत्महत्या पर उतारू किसानों की रक्षा के लिए सरकार जल्द पहल करे, अन्यथा अखिल भारतीय किसान महासभा आंदोलन शुरू करेगी."- ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रखण्ड अध्यक्ष, किसान महासभा
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