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तिल चौथ पर आस्था का सैलाब: बूंदी में चौथ माता के मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

चौथमाता मंदिर मेला क्षेत्र की सुरक्षा में 2 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 5 उपाधीक्षक, 13 थानाधिकारी और 350 से अधिक पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए.

Til Chauth vrat
मंदिर में सजी चौथ माता की प्रतिमा (Etv Bharat Bundi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 4:41 PM IST

5 Min Read
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बूंदी/ अजमेर: तिल चौथ के अवसर पर बूंदी की बाणगंगा पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध चौथ माता मंदिर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. मंगलवार तड़के करीब 3 बजे से ही माता के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. यह क्रम दिनभर जारी रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचे. इसी प्रकार अजमेर और कुचामनसिटी के चौथमाता मंदिरों में भी महिला श्रद्धालुओं की भीड़ रही.

बूंदी की बाणगंगा पहाड़ी पर स्थित चौथ माता मंदिर समिति अध्यक्ष गोपाल गुर्जर ने बताया कि तिल चौथ का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. वर्षों से मेले का आयोजन होता आ रहा है. उन्होंने बताया कि बूंदी के अलावा प्रदेशभर के श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए सुबह से ही बूंदी पहुंच रहे थे. करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु माता के दर्शनों को पहुंचे हैं.

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सामाजिक कार्यकर्ता पुरुषोत्तम पारीक ने बताया कि इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. बड़ी संख्या में महिलाओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर मनोकामनाएं मांगी. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर व्रत-उपवास रखे. परिवार की खुशहाली की कामना की. रात के समय बड़ी माता मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.

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भारी पुलिस जाब्ता तैनात: चौथ माता मंदिर मेला क्षेत्र की सुरक्षा में 2 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी), 5 उपाधीक्षक (डीवाईएसपी), 13 थानाधिकारी और 350 से अधिक पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए गए. पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा भी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग करते रहे. मंदिर परिसर, पहाड़ी मार्ग और मेला क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस जत्था तैनात रहा, जिससे श्रद्धालु स्वयं को सुरक्षित महसूस करते दिखे. सुबह से ही कई मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा. यातायात प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि भारी भीड़ को देखते हुए तड़के सुबह से ही कई मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था. जैत सागर रोड पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रही और मीरा गेट से ही श्रद्धालुओं को पैदल दर्शन के लिए भेजा गया. अहिंसा सर्किल से बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश रोक दिया गया. करीब तीन किलोमीटर पहले से ही वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया, वहीं विभिन्न पॉइंट्स पर ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहे, जिससे यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रही.

अजमेर में चौथमाता मंदिर (ETV Bharat Ajmer)

अजमेर में चौथ माता मंदिर में उमड़ी महिलाएं: तिल चौथ के अवसर पर सुहागन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और संतान के स्वास्थ्य की कामना के साथ व्रत रखा. शहर के ऋषि घाटी स्थित डेढ़ सौ साल पुराने चौथ माता मंदिर में शाम को महिलाओं का तांता लगा रहा. यहां पूजा-अर्चना और दर्शन का दृश्य देखने को मिला. महिलाएं पूजन सामग्री, जल एवं घर में बने तिलकुटे का भोग लेकर मंदिर पहुंची. उन्होंने विधिवत पूजा कर दीप जलाए और मंदिर प्रांगण में ही बुजुर्ग महिलाओं से संकल्पपूर्वक चौथ माता की कथा सुनी. नवविवाहिताओं को पूजा विधि की जानकारी दी गई. श्रद्धालु नीलकमल शर्मा के अनुसार यह अजमेर का एकमात्र चौथ माता मंदिर है, जो सालों से आस्था का केंद्र रहा है. तिल चौथ का व्रत संतान प्राप्ति, उन्नति और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है. महिलाएं तिल-गुड़ के प्रसाद का भोग लगाकर मनोकामना करती हैं. श्रद्धालु आरती खंडेलवाल और सना ने बताया कि वे सालों से यहां पूजा करने आती हैं. इस दिन महिलाएं चौथ माता से पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं. पूजन और कथा श्रवण के बाद सभी ने रात्रि में चंद्रोदय के बाद ही व्रत खोला.

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कुचामनसिटी में सकट चौथ मनाई: शहर सहित पूरे जिले की महिलाओं ने माघ चतुर्थी मनाई. माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे सकट चौथ, तिल चतुर्थी या तिलकुट चौथ के नाम से जाना जाता है, संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत भगवान गणेश और संकटा माता को समर्पित है. पंडित नवरत्न शास्त्री ने बताया कि इस दिन तिल से बनी वस्तुओं का भोग लगाने व तिल का दान करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और संकट दूर होते हैं. सालभर में 24 गणेश चतुर्थियां आती हैं, लेकिन इनमें चार का विशेष महत्व है – भाद्रपद की गणेश जयंती, माघ की तिलकुट चौथ, वैशाख की चतुर्थी और कार्तिक की करवा चौथ. पार्षद ललिता वर्मा ने बताया कि इस दिन अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर नहीं पड़ने चाहिए. इसके लिए ऊंचे स्थान से अर्घ्य दें या नीचे थाली रख लें. साथ ही, दूध मिलाकर अर्घ्य देने के लिए तांबे के बर्तन के बजाय चांदी, पीतल या कांसे के पात्र का उपयोग करना शुभ रहता है, जिससे सूर्य देव की कृपा बनी रहती है.