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मीठी नींद कंट्रोल कर सकती है शुगर बीपी, देर से सोने की आदत दिल को बना रही बीमार

समय पर खाने, सोने और जागने से हार्ट, शुगर और बीपी की बीमारी से बचें. शरीर में मेलाटोनिन और माइक्रोबायोम एंजाइम का बना रहेगा संतुलन. पढ़ें ये खास रिसर्च...

MELATONIN ENZYME REGULATES SLEEP
मीठी नींद कंट्रोल कर सकती है शुगर बीपी और ह्रदय रोग (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 6, 2026 at 11:33 AM IST

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Updated : February 6, 2026 at 2:25 PM IST

5 Min Read
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रिपोर्ट: कपिल तिवारी

सागर: आमतौर पर हार्ट, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को लेकर लोग खाने पीने का परहेज करने लगते हैं. लेकिन ताजा रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ खाने पीने से नहीं, बल्कि नींद के जरिए इन बीमारियों से बचा जा सकता है. कर्नाटक के बेलगाम यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. माधव प्रभु ने रिसर्च के आधार पर बताया है कि हमारे शरीर में मेलाटोनिन नाम का एंजाइम नींद को नियंत्रित करता है और समय पर सोना और नींद से जागना इसी एंजाइम की वजह से होता है.

अगर हम अपनी दिनचर्या अव्यवस्थित कर लेते हैं और न समय पर सोते और न समय पर उठते हैं तो इस वजह से शरीर के अंदर मेलाटोनिन (Melatonin) नाम का एंजाइम असंतुलित हो जाता है और हार्ट, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की वजह बनता है. इस रिसर्च से यह निष्कर्ष निकलता है कि अगर आप नियमित तौर पर समय पर सो रहे हैं और समय पर जाग रहे हैं तो इन गंभीर बीमारियों से आप बचे रहेंगे. डॉ माधव प्रभु सागर यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शिरकत करने पहुंचे थे.

केएलयू यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ माधव प्रभु की रिसर्च (ETV Bharat)

सदियों से नींद की प्रक्रिया नियंत्रित

कर्नाटक के बेलगाम की केएलयू यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ माधव प्रभु ने हार्ट, शुगर और ब्लडप्रेशर के मरीजों पर की रिसर्च के आधार पर बताया कि आजकल हार्ट अटैक, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां काफी ज्यादा बढ़ रही हैं. इसका सीधा संबंध हमारी नींद से है. हमारे शरीर के अंदर एक ऐसा एंजाइम है, जो लाखों साल से शरीर की नींद की प्रक्रिया को नियंत्रित कर रहा है.

BELGAUM UNIVERSITY KARNATAKA DR MADHAV PRABHU RESEARCH
केएलयू यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ. माधव प्रभु की रिसर्च (ETV Bharat GFX)

मेलाटोनिन हमारे शरीर के अंदर ही तैयार होता है. ये एंजाइम आपको सोने और जागने के संदेश देता और एक तरह से हमारी नींद का शेड्यूल तैयार कर देता है. इसी के आधार पर "Early to Bed and Early to Rise" के बारे में कहा गया है. हमारे शास्त्रों में भी ब्रह्म मुहूर्त में उठने और रात के वक्त जल्दी सोने के बारे में कहा गया है.

मेलाटोनिन और माइक्रोबायोम का असंतुलन

डॉ. माधव प्रभु बताते हैं कि "मानव शरीर एक तरह से प्रोग्राम्ड है. जब हम दिन भर काम और मेहनत करते हैं और रात में सो जाते हैं, तो हमारा शरीर रिकवर होता है. इसके लिए मेलाटोनिन नाम का एंजाइम जवाबदेह है. अब हम क्या देख रहे हैं कि लोग दिनभर काम करते हैं और रात के वक्त पार्टी करते हैं. फिर खाना खाने के बाद देर रात में सोते हैं. हमारा शरीर इस तरह से प्रोग्राम्ड है कि दोपहर और सुबह खाना चाहिए, लेकिन हम इसके खिलाफ चले जाते हैं.

SLEEP AND WAKE HABITS
बीमारियों से बचने के लिए समय पर सोना और जागना जारूरी (ETV Bharat GFX)

हमारे शरीर के अंदर मेलाटोनिन एंजाइम और आंत में मौजूद बैक्टीरिया (माइक्रोबायोम) होते है, जो अनगिनत सूक्ष्मजीवों का समुदाय है, पाचन, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और विटामिन संश्लेषण के लिए अनिवार्य हैं, ये दोनों असंतुलित हो जाते हैं. इसकी वजह से ऑक्सीडेशन ज्यादा होता है और टिशु डैमेज होते हैं. इसी कारण से डायबिटीज हाइपरटेंशन कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं."

नौजवानों में इन बीमारियों के बढ़ने की वजह नींद

प्रो. माधव प्रभु कहते हैं कि इस तरह की बीमारियां पहले नौजवानों में देखने नहीं मिलती थीं, लेकिन जब से नौजवानों की लाइफस्टाइल बदली है उनके जीवन में तनाव बढ़ा है तब से नौजवानों में यह बीमारियां देखने मिलने लगी हैं. आमतौर पर नौजवान लोग काम को लेकर तनावग्रस्त रहते हैं उनकी लाइफ स्टाइल में देर रात पार्टी करना अल्कोहल लेना शामिल है. इस वजह से वह न तो समय पर खाना खाते हैं और न ही समय पर सोते हैं. इसलिए आजकल नौजवानों में हाइपरटेंशन डायबिटीज, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां देखने मिल रही हैं.

MELATONIN AND MICROBIOME IMBALANCE
मेलाटोनिन और माइक्रोबायोम काे ऐसे करें संतुलित (ETV Bharat GFX)

असंतुलन को बेहतर नींद से सुधार सकते हैं

अगर आप इन बीमारियों से परेशान हैं तो प्रो. डॉ माधव प्रभु का कहना है कि इन समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति सबसे पहले अपनी नींद और सुबह -शाम के खाने के वक्त को सुधारकर अपनी सेहत ठीक कर सकता है. देर रात खाना खाने की आदत छोड़ें. शाम होने के कुछ देर बाद खाना खाएं और सोने और जागने का समय निर्धारित करें. सुबह के खाने में दही छांछ से मेलाटोनिन संतुलित कर सकते है, लेकिन दही छांछ रात के खाने में ना खाएं. उच्च फाइबर वाला भोजन फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोबायोटिक (दही, छाछ) स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम को संतुलित करते हैं. इलाज की जरूरत पड़ती है तो दवाओं के जरिए मेलाटोनिन और माइक्रोबायोम का संतुलन बना सकते हैं. लेकिन अगर बेहतर समयबद्ध नींद हमेशा लें, तो दवाओं की कम जरूरत पड़ेगी.

Last Updated : February 6, 2026 at 2:25 PM IST