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एक पत्ते में छिपी इस गांव के नाम की पूरी कहानी, पेड़ पर दिखती है पहचान

सागर के एक गांव के नाम की अलग कहानी, पेड़ की पत्ती पर पड़ा नाम, ग्रामीण मानते दैवीय चमत्कार, वैज्ञानिक ने बताया जेनेटिक म्यूटेशन.

SAGAR VILLAGE NAME UNIQUE STORY
एक पत्ते में छिपी गांव के नाम की कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 23, 2026 at 8:55 PM IST

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Updated : February 24, 2026 at 9:11 AM IST

7 Min Read
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रिपोर्ट: कपिल तिवारी

सागर: गांवों में बसने वाले भारत देश के लाखों गांव के एक से बढ़कर एक नाम सुनने मिलेंगे. कई नाम अनोखे होंगे, तो कई नाम अटपटे लगेंगे, लेकिन हर गांव के नाम के पीछे कोई ना कोई कहानी जरूर सुनने मिलेगी. ऐसे ही सागर जिले की नरयावली विधानसभा के इकपना गांव की कहानी बड़ी अटपटी है, लेकिन इस नाम में प्रकृति के प्रति आस्था और सम्मान जाहिर होता है. इस गांव का नाम एक अनोखे पेड़ के कारण रखा गया है, जिसे स्थानीय भाषा में छेवला कहा जाता है और वैसे इसे पलाश कहा जाता है.

पलाश की बात करें, तो इसके एक डंठल में तीन पत्तियां निकलती है और सभी पेड़ों में ऐसा ही होता है, लेकिन इकपना गांव में मौजूद पलाश के पेड़ में तीन की जगह एक पत्ती निकलती है और इसी के कारण गांव का नाम इकपना रखा गया है. गांव के लोगों ने पेड़ के नीचे अपनी गांव की देवी खैरमाई की स्थापना की है और गांव के लोग इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं. हालांकि वनस्पति वैज्ञानिक इस घटना को जेनेटिक म्यूटेशन कहते हैं.

सागर के गांव के नाम की कहानी (ETV Bharat)

कहां मौजूद है ये गांव

सागर जिला मुख्यालय से बीना के लिए जाने वाली रोड पर नरयावली विधानसभा क्षेत्र में इकपना गांव मौजूद है. इस गांव का नाम इकपना होने की कहानी बड़ी दिलचस्प है. कड़ान नदी किनारे बसे इस गांव के लोग बताते हैं कि उनके गांव का नाम इकपना तब रखा गया, जब इस गांव में 5 छेवले के पेड़ मौजूद थे. जो दूसरे छेवले के पेड़ से हटकर थे, क्योंकि छेवले का जो पत्ता है, उसमें एक डंठल में तीन पत्ते होते हैं, लेकिन यहां मौजूद पांच पेड़ों में तीन की जगह एक ही पत्ता था, इसलिए गांव का नाम इकपना पड़ गया.

SAGAR IKPANA VILLAGE RARE TESU TREE
इकपना गांव (ETV Bharat)

हालांकि गांव में अब बस एक ही पेड़ बचा है, जिसमें तीन की जगह एक पत्ते हैं. जिसके नीचे गांव की देवी मां, जिन्हें स्थानीय बोली में खैरमाता कहा जाता है, उनकी स्थापना की गयी है, लेकिन यहां के लोग इस पेड़ और यहां विराजी देवी मां में बड़ी आस्था रखते हैं और इसे दैवीय चम्तकार मानते हैं.

गांव के लोग मानते हैं चमत्कार

इकपना गांव के निवासी मेहताब सिंह बताते हैं कि "यहां छेवले के पांच पेड़ थे, जिनमें एक पत्ता है. जबकि छेवले में एक साथ तीन पत्तियां होती है. उनका कहना है कि ऐसे पेड़ सिर्फ हमारे गांव में ही है, जो अब दो बचे हैं. यहां गांव में छेवले के दूसरे पेड़ भी है, लेकिन उनमें दूसरे पेड़ की तरह तीन पत्तियां है, लेकिन यहां जो पांच पेड़ लगे थे, उनमें एक ही पत्ती थी, जिनमें से अब दो पेड़ बचे हैं.

SAGAR IKPANA VILLAGE UNIQUE NAME
पलाश के पेड़ पर एक डंठल में एक पत्ती (ETV Bharat)

मेहताब सिंह बताते हैं कि इसीलिए गांव का नाम इकपना बसोना रखा गया, क्योंकि हमारे गांव में एक पत्ते वाले छेवले का दुर्लभ पेड़ है. गांव काफी पुराना है, यहां की आबादी करीब 1500 है. मैं खुद 74 साल का हो गया हूं और इसी गांव में पैदा हुआ और मेरे पूर्वज भी यही रहे, जिनका 80 और 85 साल की उम्र में निधन हुआ. हम लोग इसे देवी मां का चमत्कार मानते हैं."

दूर -दूर से पेड़ देखने पहुंचते हैं लोग

गांव के नाम और यहां मौजूद छेवले के पेड़ के बारे में सुनने के बाद पेड़ देखने पहुंचे भापेल गांव के किसान मेहरबान सिंह बताते हैं कि "यहां हम इकपना गांव देखने के लिए आए हैं. लोग बोलते हैं कि यहां के छेवले के पेड़ में इक पना (एक पत्ता) होता है, इसलिए इस गांव का नाम इकपना रख दिया. वैसे छेवले के पेड़ में तीन पत्ते होते हैं, लेकिन यहां एक पत्ते वाला छेवले का पेड़ है. यहां गांव में और भी छेवले के पेड़ हैं, लेकिन उन पेड़ों में तीन पत्ते ही है. इस सिद्ध स्थान पर जो पेड़ लगा है, उसमें एक ही पत्ता है. इसलिए मैं देखने आया था कि ऐसा पेड़ कहा हैं."

SAGAR VILLAGE NAME ON TREE LEAVES
टेशू का पेड़ (ETV Bharat)

वनस्पति विज्ञान की नजर में क्या है छेवला (पलाश) का पेड़

सागर के डाॅ हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन और वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. डाॅ पी के खरे इसे दुर्लभ पेड़ मानते हैं. ईटीवी भारत से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि "इसे पलाश और टेसू भी बोलते हैं. जो अपने यहां सामान्य छेवला होता है, इसमें तीन पत्तियां होती है. इसमें होली के समय पर फूल भी लगते हैं और इसको फ्लैम ऑफ फारेस्ट भी कहते हैं, क्योंकि दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि जैसे पेड़ से आग की लपटे उठ रही है.

एक पत्ती वाले छेवला पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक

डाॅ पीके खरे बताते हैं कि जो इकपना गांव के छेवले के पेड़ की बात है, तो इसे वनस्पति विज्ञान में यूनिफोलियट लीफ (Unifoliate Leaf) या एकपर्णी पत्ती कहते हैं. यह एक असामान्य विशेषता है, इस तरह की विशेषता के बारे सबसे पहले किसी ने 1917 में ध्यान खींचा था. इसका वानस्पतिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा (Butea monosperma) है. जिसमें तीन पत्ती की जगह एक पत्ती मिली. इसके बाद गुजरात में जामनगर और वडोदरा के पास इस तरह के पेड़ मिले हैं. उनमें भी तीन पत्ती की जगह एक पत्ती है.

SAGAR VILLAGE NAMED ON PALASH TREE
पलाश के पेड़ की होती है तीन पत्ती, गांव में एक पत्ती (ETV Bharat)

जिसमें रिपोर्ट किया गया है कि इसमें फूल और फल नहीं आते हैं, क्योंकि ये असामान्य है, तो लोगों ने मान्यता के अनुसार उन जगहों पर मंदिर बना दिए और पूजा भी करते हैं. अपने यहां जो इकपना में मिला है, तो कई जगह मैंने पढ़ा है कि इसमें फूल और फल नहीं लगते हैं, इसलिए इसके बीज नहीं मिलते हैं. मुझे नहीं मालूम कि वहां गांव के लोगों ने इसके फूल और फल देखे है कि नहीं. जब फूल और फल नहीं होते हैं, तो अगली पीढ़ी कैसे आगे विकसित हो पाएगी.

ये आसामान्य विशेषता जो है, ये आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutation) के कारण होता है. ये प्रकृति में अपने आप परिवर्तन हो जाते हैं. इसलिए तीन की जगह एक पत्ती आती है. इनकी संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है, क्योंकि अगली पीढ़ी तैयार नहीं हो पा रही है, लेकिन मेरे हिसाब से पलाश में बीज के अलावा अन्य चीजों से भी रीजनरेशन हो सकता है. इसकी जड़ से और इसके काटने पर नई-नई टहनियां निकलती है, इससे नए पौधे बन जाते हैं. ये असामान्य और दुर्लभ है, इसलिए इसकी संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. छत्तीसगढ़, असम और गुजरात में सामने आ चुका है. अपने यहां भी आपने बताया, हमारे ख्याल से ये पहली रिपोर्ट है कि सागर में एक पत्ती वाला पलाश मिला है."

Last Updated : February 24, 2026 at 9:11 AM IST