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जिस बाघ ने नौरादेही में तोड़ा दम, उसे लगी थी रेडियो कॉलर, फिर कैसे नहीं लगी जानकारी?

सागर के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 15 फरवरी को मिला बाघ का शव, प्रबंधन पर लगे लापरवाही के आरोप.

NAURADEHI TIGER DEATH CONTROVERSY
सागर में रेडियो कॉलर लगे बाघ की मौत से मचा हड़कंप (Getty Image)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 17, 2026 at 10:27 PM IST

5 Min Read
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सागर: प्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही टाइगर रिजर्व में एक घोर लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां कान्हा टाइगर रिजर्व से भेजे गए बाघ की मौत की खबर प्रबंधन को दो दिन बाद मिली. जिससे प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत की वजह टेरीटोरियल फाइट बताई जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि बाघ को रेडियो कॉलर लगा होने के बाद भी बाघ मृत पड़ा रहा और टाइगर रिजर्व प्रबंधन को दो दिन बाद उसकी चिंता हुई.

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने दर्ज कराई शिकायत

इस मामले को लेकर वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने बड़े सवाल खड़े किए हैं. इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश वन विभाग और एनटीसीए में शिकायत दर्ज कराई है और कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सबसे खास बात ये है कि आगामी जुलाई में यहां चीते शिफ्ट किया जाना तय हो गया है. ऐसे में बाघ की मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

नौरादेही टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत से मचा हड़कंप (ETV Bharat)

दो दिन बाद मिली मौत की खबर?

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने बाघ की मौत पर सवाल खड़े करते हुए कहा, " एक रेडियो-कॉलर वाले बाघ का मृत पाया जाना और प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट कई संदेहास्पद प्रश्न खड़े करता है. प्रबंधन द्वारा खुद बताया गया है कि दो दिन तक बाघ की लोकेशन एक ही जगह पर पाया गया, जिससे शक हुआ तो मौके पर जाकर देखा गया तो बाघ मरा हुआ था."

जिम्मेदार स्टाफ पर कार्रवाई की मांग

अजय दुबे ने बताया, "आखिरकार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने 2 दिनों तक स्टैटिक अलर्ट की अनदेखी क्यों की? रेडियो कॉलर से हर 8 घंटे में मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट को 2 दिनों तक नजरअंदाज क्यों किया गया? निगरानी टीम को बाघ के संघर्ष की भनक क्यों नहीं लगी? बाघों की क्षेत्रीय लड़ाई की आवाज या हलचल निगरानी टीमों द्वारा अनसुनी कैसे रह गई. लड़ाई में शामिल दूसरा बाघ वर्तमान में कहां है. क्या अन्य बाघ भी खतरे में है? क्या इस तरह की लापरवाही इलाके के बाकी 3-4 कॉलर वाले बाघों की सुरक्षा को भी जोखिम में डालती है? इस निगरानी चूक के लिए तत्काल जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है. जिम्मेदार स्टाफ को निलंबित कर जांच होना चाहिए."

फील्ड स्टाफ की कार्यक्षमता पर उठे सवाल

अजय दुबे ने आगे कहा, "आमतौर पर रेडियो-कॉलर का मुख्य उद्देश्य बाघ के असामान्य व्यवहार या उसकी मृत्यु की स्थिति में तुरंत मॉर्चुअरी अलर्ट देना है. यदि अलर्ट मिलने के बावजूद 48 घंटों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल फील्ड स्टाफ की कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे निगरानी प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाता है."

रेडियो काॅलर में कैसे होती है ट्रेकिंग और मॉनिटरिंग?

इस मामले में नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया, "बेशक बाघ की गतिविधि पर ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि रेडियो काॅलर में कैसे ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग होती है. रेडियो काॅलर तो एक चमड़े की बेल्ट होती है. उसमें एक छोटा सा डिवाइस लगा होता है जो सिग्नल भेजता है. ये व्हीएच सिग्नल होते हैं, जिन्हें बहुत उच्च आवृत्ति संकेत कहते हैं."

ऐसे मिलती है स्पष्ट सिग्नल

उन्होंने आगे बताया, "इसे रिसीव करने के लिए टीव्ही के एंटीना की तरह एक एंटीना लेकर स्टाफ घूमता है. एंटीना और जानवर सीधी लाइन पर हैं तो सिग्नल स्पष्ट और साफ मिलते हैं. यदि दोनों का एंगल अलग-अलग होता है, तो आवाज साफ नहीं आती है. ऐसे में हमारा मॉनिटरिंग दल कभी भी ऐसी कोशिश नहीं करता है कि वो टाइगर के सामने चला जाए और मॉनिटरिंग करें. क्योंकि वो अगर टाइगर के सामने चला जाएगा, तो टाइगर सहज नहीं हो पाएगा."

टाइगर के मूवमेंट पर रहती है बारीक नजर

डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया, "हम लोग टाइगर को असहज नहीं करना चाहते हैं. इसलिए हमारी कोशिश होती है कि हम 200 से 500 मीटर दूर रहकर केवल ये देंखे कि टाइगर किस तरह से मूवमेंट कर रहा है. आमतौर पर रिसर्च के लिए टाइगर को रेडियो कॉलर किया जाता है. इस मामले में टाइगर को छोड़ा गया था. वहीं टाइगर में एक और आदत होती है कि अपने घर की तरफ लौटना, जिसे हम लोग होमिंग करते हैं. कई बार डर होता है कि जब हम टाइगर को छेड़ेंगे तो वो घर की तरफ भाग सकता है."

रजनीश ने आगे बताया, "हमेशा ये टाइगर एक ही जगह पर करीब डेढ़ दिनों तक बैठा रहता था. उसके बाद फिर 1 या 2 किमी चलता था और फिर एक जगह बैठ जाता था. ये बहुत एक्टिव टाइगर नहीं था, इसलिए ये मामला हुआ. ऐसा लग रहा था कि वह अपनी आदत के अनुसार बैठ होगा. टाइगर जब आपस में लड़ते हैं तो पूरी ताकत लड़ाई में लगाते हैं. अगर वो अनावश्यक आवाज करेंगे, तो वो लड़ नहीं पाएंगे. ऐसा भी नहीं है कि इनकी लड़ाई पूरी हुई हो, हमने उसकी खोपड़ी देखी है, जो पूरी तरह कुचली हुई है. ऐसा लग रहा है कि दूसरे टाइगर ने घात लगाकर उसके ऊपर से हमला किया गया होगा. इसको तो बचने और लड़ने का समय भी नहीं मिला. इसलिए मेरा मानना है कि स्टाफ एक दो दिन तक इंतजार करेगा. हर क्षण वो टाइगर को देखने नहीं जा सकते हैं."