दलहनी फसलों से बढ़ती है जमीन की उर्वरकता, गरमी में मूंग-उड़द की खेती में बरतें सावधानी
दलहनी फसलों में सबसे बड़ी समस्या कीट व्याधि और रोग, कृषि वैज्ञानिक डॉ आशीष त्रिपाठी से जानें फसलों को इनसे बचाने के उपाय.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 25, 2026 at 11:00 PM IST
सागर: गर्मी के सीजन में जायद फसलों में किसान बड़े पैमाने पर उड़द और मूंग की खेती करते हैं. इस खेती में किसानों के लिए आमदनी तो होती ही है, इसके साथ ही दलहनी फसलों की खेती का बड़ा फायदा ये भी है कि ये जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाने का काम करती है. बुंदेलखंड में किसान बड़े पैमाने पर मूंग और उड़द की खेती करते हैं. फसल की अच्छी पैदावार हो और किसानों को नुकसान न हो, उसके लिए किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर खेती करना चाहिए. आमतौर पर किसान अच्छी फसल के लिए बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं, जो फसल के लिए तो नुकसानदायक होती ही है, वहीं जमीन की उर्वरकता को भी प्रभावित करती है.
दलहनी फसलों में सबसे बड़ी समस्या कीट व्याधि और रोग
कृषि वैज्ञानिक डॉ आशीष त्रिपाठी बताते है कि "सागर जिले में 35-40 हजार हेक्टेयर में गर्मियों में मूंग और उड़द की खेती की जा रही है. इसमें सबसे बड़ी समस्या पीला मौजेक की आती है. साथ ही साथ इसमें लगने वाला फलीछेदक कीट है, जो 2-3 तरह का होते है. जिसमें सेमी लूपर, कहीं-कहीं चने वाली इल्ली और मारूका इल्ली देखने मिलती है. इनके निदान के लिए किसान बहुत ज्यादा मात्रा में पेस्टीसाइड का उपयोग करते हैं.
लेकिन इसे खत्म करने के लिए जरूरी है कि किसान निश्चित समय पर सिंचाई करें. जब सिंचाई की जरूरत हो, तभी सिंचाई करें और जरूरत से अधिक सिंचाई न करें. कई किसान ये सोचते हैं कि जल्दी-जल्दी सिंचाई करने से फसल जल्दी बड़ी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है. ध्यान रखे कि समय पर ही सिंचाई करें और खरपतवार के पौधों को समय-समय पर निकालते रहें. जिससे रसचूषक कीट या अन्य कीट उनका सहारा न ले पाएं.

इसके अलावा 4 या 5 फैरोमेन ट्रैप प्रति एकड़ में लगाएं. जिससे कीटों की निगरानी और नियंत्रण भी होगा. एक लाइट ट्रैप कम से कम 2-3 एकड़ जमीन पर लगाना चाहिए. आजकल सौर ऊर्जा से चलित लाइट ट्रैप आने लगे हैं, जो कि रात्रि के समय कीट आते हैं, तो हम उनकी पहचान करके नियंत्रण के उपाय करते हैं और जो कीट पकड़ जाते हैं, वो नियंत्रण में सहयोगी होते हैं. कीटनाशक का उपयोग शाम के 4 बजे के बाद करना चाहिए. इससे कीटनाशक के फसलों पर अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं. एक बार में एक रसायन का उपयोग करें और अगर दूसरे रसायन की जरूरत है, तो 48 घंटे बाद दूसरे रसायन का छिड़काव कर सकते हैं."

ज्यादा मात्रा में रसायनों का प्रयोग खतरनाक
कृषि वैज्ञानिक बताते है कि "ज्यादा मात्रा में रसायनिक उर्वरक यूरिया या डीएपी का उपयोग फसल में न करें. अगर लग रहा है कि फसल की वृद्धि अच्छी नहीं हो रही है या फसल में रौनक नहीं है, तो घुलनशील उर्वरक एनपीके 18-18-18 और एनपीके 19-19 का छिड़काव कर सकते हैं. वहीं, फूल आने पर 05234 एनपीके का उपयोग कर सकते हैं. जब फल्लियों में दाना पड़ने लगे, तो उस समय 0050 का उपयोग कर सकते हैं. इससे अच्छी उपज प्राप्त होगी और फसल की गुणवत्ता अच्छी होगी. अनावश्यक रसायनों का उपयोग करने से लागत बढती है और साथ ही साथ कीट व्याधियों का प्रकोप ज्यादा होता है. अगर समय रहते इन कामों को करेंगे, तो निश्चित रूप से अच्छी गुणवत्ता की उपज मिलेगी."

ज्यादा मात्रा में खरपतवार नाशक का उपयोग खतरनाक
डॉ आशीष त्रिपाठी ने कहा, "किसानों से निवेदन है कि जो भी किसान मूंग को जल्दी पकाने के लिए खरपतवार नाशी का उपयोग करते हैं, वो गलत है. ये बहुत हानिकारक रसायन है, उनका उपयोग नहीं करना चाहिए. 60 से 65 दिन में मूंग पक जाएगी. समय रहते यदि मूंग पकती है, तो उसकी गुणवत्ता अच्छी होने के साथ उत्पादन भी अच्छा मिलता है. अनावश्यक रसायनों का उपयोग बिल्कुल न करें.
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समय पर जब फसल पक जाए, तो आप उसकी कटाई करें. समय से पकेगी, तो उसके पत्ते झड़ेंगे, तो खेत में गिरकर खाद बनेगी. यदि रसायन का उपयोग करके असमय पका दिया, तो जो भूसा निकलेगा, वो न तो जानवरों के काम का रहेगा और ना ही उसकी खाद बन पाएगी. दलहनी फसलों से हमारी जमीन में सुधार होता है, भूमि की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है. इसलिए हमें फसल चक्र में मूंग उड़द और दलहनी फसलों का समावेश जरूर करना चाहिए और प्रकृति के विरूद्ध रसायनों का उपयोग ज्यादा नहीं करना चाहिए."

