मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में खुराक की कमी! बढ़ रहा मांसाहारी जानवरों का कुनबा
नौरादेही टाइगर रिजर्व सागर में लगातार बढ़ रहा मांसाहारी जानवरों का कुनबा. विस्थापन में देरी से जरुरत के हिसाब से नहीं बढ़ रहे शाकाहारी जानवर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : November 15, 2025 at 6:55 PM IST
सागर: मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व की बात करें, तो यहां लगातार बाघों का कुनबा बढ़ रहा है. अगले साल चीतों को लाने की तैयारी तेज हो गई है लेकिन टाइगर रिजर्व में मांसाहारी जानवरों की खुराक यानि शाकाहारी जानवरों की संख्या फिलहाल कम है. इसकी एक बड़ी वजह विस्थापन में लग रहा समय है.
खास बात ये है कि जब यहां पर एनटीसीए के चीता प्रोजेक्ट के विशेषज्ञों की टीम मई 2025 में दौरा करने आई थी, तब चीता बसाने के लिए जरूरी कामों में उन्होंने शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने के लिए भी कहा था.
लगातार बढ़ रहा है मांसाहारी जानवरों का कुनबा
जहां तक वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की बात करें, तो 2018 में इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना में शामिल किए जाने के बाद यहां बाघ-बाघिन का जोड़ा छोड़ा गया था. उम्मीद के मुताबिक यहां मई 2019 से बाघों की संख्या बढ़ना शुरू हो गई थी. महज 6 साल में यहां बाघों का कुनबा 26 पहुंच चुका है, जो अधिकृत आंकड़ा है.
इसके अलावा जब 1975 में वन्यजीव अभ्यारण्य के रूप में नौरादेही की स्थापना की गई थी, तब इसे भारतीय भेड़ियों (ग्रे वुल्फ) के प्राकृतिक आवास के रूप में स्थापित किया गया था. यहां आज भी भारतीय भेड़ियों की संख्या काफी ज्यादा है. इसके अलावा यहां पैंथर्स, वाइल्ड डॉग, जैकल, ग्रे फॉक्स और ऊद बिलाव (कॉमन ओटर) जैसे मांसाहारी जीव काफी संख्या में हैं.
नौरादेही में शाकाहारी जानवरों की कमी
ऐसा नहीं है कि नौरादेही में शाकाहारी जानवर एक दम से कम हो, यहां पर भी नीलगाय, चिंकारा, चीतल, सांभर, काला हिरण और सामान्य हिरण पाए जाते हैं लेकिन इनकी संख्या तेजी से बढ़ रहे शाकाहारी जानवरों के मुकाबले कम आंकी जा रही है. 2023 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के पहले से ही यहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
भविष्य में चीतों को बसाए जाने के लिए यहां काम शुरू हो गया है. चीता प्रोजेक्ट के विशेषज्ञ चीतों को बसाने के पहले यहां का दौरा करने और तैयारियों के संबंध में निर्देश देने के लिए पहुंचे थे. जिसमें उन्होंने फेंसिंग, चीतों के लिए बाड़े बनाने, जलस्त्रोत बढ़ाने के साथ-साथ शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी प्रबंधन को दिए थे, क्योंकि उनका मानना था कि भविष्य में चीते बसाने के लिहाज से फिलहाल शाकाहारी जानवरों की संख्या कम है.

विस्थापन में देरी बड़ी समस्या
नौरादेही टाइगर रिजर्व की बात करें, तो मध्यप्रदेश का यह सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व 3 जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर में फैला है. जिसका कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किमी है. यहां का कोर एरिया 1414 वर्ग किमी और बफर एरिया 922 वर्ग किमी है. यहां विस्थापन में देरी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि ये यहां के रहवासियों की सहमति से होता है.
नरसिंहपुर में तो लगभग विस्थापन का काम पूरा हो चुका है, क्योंकि यहां पर विस्थापित होने वाले गांवों की संख्या कम थी. सागर में कुछ बड़े गांव अभी विस्थापित नहीं हो पाए हैं. वहीं दमोह जिले में विस्थापन की प्रक्रिया सबसे धीमी गति से चल रही है. विस्थापन होने के बाद जो खेती की जमीन रहती है, वहां पर प्रबंधन चारागाह विकसित करता है और ये शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने में मददगार होते हैं. विस्थापन के कारण चारागाह विकसित होने में देरी हो रही है.

'शाकाहारी जानवरों को बढ़ाना जरूरी'
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे बताते हैं कि "मध्य प्रदेश के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जो चीते लाए जाने का कदम है, वह स्वागत योग्य है. चीतों को बसाए जाने के लिए जरूरी है कि वहां पर शाकाहारी जानवर और जलस्त्रोत बढ़ाया जाना जरूरी है, वो निश्चित संवेदनशील जरूरत है. मैं नौरादेही गया हूं, वहां ग्रासलैंड बहुत अच्छा है. चीता के लिए छोटे शाकाहारी जानवरों की जरूरत होती है इस कारण यहां पर इनकी संख्या बढ़ाना होगी. यहां पर शिकार को रोकना पड़ेगा और निगरानी और बेहतर सुरक्षा प्रबंधन की जरूरत है."
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'पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं शाकाहारी जानवर'
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ ए ए अंसारी कहते हैं कि "पहले यहां शाकाहारी जानवर थोड़े कम थे लेकिन जैसे-जैसे गांव विस्थापित हो रहे हैं, तो वहां हम घास के मैदान विकसित कर रहे हैं. बाहर से हम लोग पेंच, कान्हा से चीतल लाए थे, तो आप देखेंगे कि पिछले तीन-चार सालों में चीतल की संख्या बढ़ रही है.
संरक्षण मिलने से चिंकारा और नीलगाय की संख्या बढ़ रही है. अभी किसानों के खेतों में पहुंचने वाले ब्लैक बक को पकड़कर भेजा रहा है. हमको एक बार 153 और दूसरी बार 35 ब्लैक बक मिले हैं. ये हमारे मांसाहारी जानवरों के भोजन के लिहाज से अच्छे संख्या है. यहां की ईकोलाॅजी और खुले मैदान ब्लैक बक के लिए काफी अच्छे हैं. हमारे यहां शाकाहारी जानवरों की संख्या लगातार बढ़ रही है."

