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बाघ की मौत पर नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन को फटकार, लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई के आदेश

कान्हा टाइगर रिजर्व से नौरादेही शिफ्ट किए गए बाघ की मौत मामले में कर्मचारियों की लापरवाही आई सामने. मध्यप्रदेश सीसीएफ ने दिए कार्रवाई के आदेश.

SAGAR NAURADEHI TIGER DEATH CASE
CCF ने लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई के दिए आदेश (NAURADEHI TIGER RESERVE)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 28, 2026 at 5:21 PM IST

4 Min Read
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सागर: कान्हा टाइगर रिजर्व से जनवरी माह में वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व शिफ्ट किए गए बाघ को पूरा महीना भी नहीं हुआ था. टेरिटोरियल फाइट में उसकी मौत हो गई. इस मामले में वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कई गंभीर सवाल खड़े किए थे और मुख्य वन सरंक्षक को शिकायत भेजी थी.

इस शिकायत के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने टाइगर रिजर्व के डीएफओ को नोटिस जारी करते हुए 3 दिन में जवाब मांगा था. उनके जवाब पर वन मुख्यालय ने डीएफओ को सख्त लहजे में कहा है कि वनकर्मियों की लापरवाही छिपाने का प्रयास आपके द्वारा किया गया है, इस पर तत्काल कार्रवाई कर सूचित किया जाए.

NAURADEHI TIGER RESERVE
नौरादेही टाइगर रिजर्व सागर (ETV Bharat)

डीएफओ के प्रतिवेदन से मुख्य वन संरक्षक नाराज

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट की शिकायत के बाद नौरादेही टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार सिंह द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने नाराजगी जताई है. उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कहा है कि आपने स्थानीय कर्मचारियों द्वारा की गई घोर लापरवाही को छुपाने का प्रयास किया है.

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मुख्य वन सरंक्षक ने लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई के दिए आदेश (ETV Bharat)

पत्र में लेख है कि रेडियो कॉलर बाघ को कान्हा से लाने के बाद 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही थी. 13 फरवरी को एक ही स्थान पर लगातार लोकेशन मिलने के बाद भी मॉनिटरिंग टीम बाघ को देखने नहीं गई और वह 48 घंटे बाद लोकेशन पर पहुंची, तो बाघ मृत पाया गया.

'कर्मचारियों को क्यों सुनाई नहीं दी बाघ की दहाड़'?

इसी प्रकार प्रतिवेदन में उल्लेख है कि पोस्टमार्टम के दौरान बाघ की खोपड़ी पर किसी अन्य बाघ के केनाइन दांत के निशान थे एवं खोपड़ी की हड्डियां भी टूटी हुईं थी, जिस कारण बाघ की मृत्यु हुई है. इसका मतलब यह हुआ कि दो बाघ आपस में लड़ते हैं, तो इनकी दहाड़ की गूंज 1 से 2 किलोमीटर तक सुनाई देती है. फिर भी स्थानीय कर्मचारियों ने उनकी लड़ाई को अनसुना कर दिया.

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मुख्य वन सरंक्षक ने लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई के दिए आदेश (ETV Bharat)

जबकि निर्देश हैं कि लड़ाई के दौरान बाघ घायल होते हैं तो उनकी मॉनिटरिंग की जाए ताकि घायल बाघ का भी शिकार ना हो सके और उसका उपचार किया जा सके. वन मुख्यालय ने नौरादेही डीएफओ को लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अवगत कराने के लिए लिखा है.

बाघ की मौत पर नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन को फटकार (ETV Bharat)

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने की थी शिकायत

शिकायतकर्ता वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि "वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कुछ दिन पहले एक बाघ की दुखद मौत हुई थी. बाघ के लिए बहुत महंगा सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया गया था. बाघ की निगरानी के लिए पूरी टीम लगी हुई थी. दुर्भाग्य से यह बाघ 2 दिन तक मृत्यु होने के बाद पड़ा रहा, लेकिन क्विक रिस्पांस टीम जो इसको फॉलो करती थी, वह इसे नहीं देख पाई.

डीएफओ और अन्य स्टाफ सैटेलाइट सिग्नल के आते ही मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार थे, उनके स्तर पर भी कार्रवाई नहीं हुई. कहीं ना कहीं जो कान्हा से बाघ लाया गया था, उसकी देखभाल में लापरवाही हुई है. हमने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख से अनुरोध किया था कि दोषियों पर कार्रवाई हो. उन्होंने अब सख्त आदेश निकाला है कि जो भी दोषी हैं, उन पर लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए. भविष्य में रेडियो कॉलरधारी बाघ और अन्य बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.