इस हाइवे पर वाहनों से तेज ड्रग्स नेटवर्क, ढाबों के नाम में छिपा सप्लाई राज, इशारों में मिलता है नशा
देश के सबसे बड़े नेशनल हाईवे-44 पर हर कदम नशे का कारोबार, ड्रग्स के लिए बदनाम राज्यों से आसानी से पहुंच रही खेप. बुंदेलखंड में महिलाओं के जरिए शहरों से गांव और कस्बों तक ऑपरेट हो रहा नेटवर्क. होम डिलीवरी से पुलिस-प्रशासन नहीं लगा पा रही अंकुश. सागर से कपिल तिवारी के साथ प्रशांत पॉल की स्पेशल रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 19, 2026 at 3:07 PM IST
|Updated : June 20, 2026 at 1:31 PM IST
सागर: देश का सबसे बड़ा नेशनल हाइवे 44 वैसे तो सागर शहर के लिए एक बड़ी सौगात है और शहर ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है. लेकिन इन अच्छाइयों के साथ ये नेशनल हाइवे इस इलाके में कई तरह की बुराइयां लाया है. दरअसल, देश के उत्तर और दक्षिणी सिरे को जोड़ने वाले हाईवे पर हर तरह का नशा आसानी से मिल जाता है. यहां सस्ते और आसानी से मिलने वाले नशे के साथ-साथ महंगी ड्रग्स भी आसानी से मिल जाती है. नशे के कारोबार के लिए देश में बदनाम हो चुके राज्यों की पहुंच यहां तक है.
हाइवे के सहारे आसानी से ड्रग डिलेवरी होती है और यहां संचालित अलग-अलग राज्यों के ढाबों से नशे का कारोबार चलता है. गुजरात, पंजाब और ओडिशा जैसे राज्यों से हर तरह के नशे की खेप आसानी से यहां पहुंच जाती है और अलग-अलग इलाकों के नाम से संचालित इन ढाबों से आसानी से ये कारोबार ऑपरेट होता है. यहां के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों तक ये कारोबार अपने पैर पसार चुका है. स्कूल और कालेज के स्टूडेंट्स को महंगे नशे की लत लगायी जा रही है. महिलाओं से ड्रग्स के कारोबार को ऑपरेट कराया जा रहा है. हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बड़े नेटवर्क के जरिए होने वाले इस संगठित कारोबार को काबू करना मुश्किल नजर आता है.
नेशनल हाईवे वरदान भी अभिशाप भी
एक तरह से मध्य प्रदेश के बीचोंबीच स्थित सागर जिले के लिए जब राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भज योजना के तहत फोरलेन की सौगात मिली, तो माना जा रहा था कि ये बुंदेलखंड सहित सागर शहर के विकास में अहम भूमिका निभाएगा. ऐसा हुआ भी, लेकिन अच्छाई के साथ बुराईयां भी देश के सबसे बड़े नेशनल हाइवे ने सागर शहर और बुंदेलखंड को दी है. नेशनल हाइवे 44 पर रफ्तार के साथ दौड़ते वाहन विकास की रफ्तार को बढ़ा रहे हैं, तो नशे के कारोबार का नेटवर्क स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
यहां से गुजरने वाले वाहनों के जरिए नशे की खेप पहुंचायी जा रही है. नेशनल हाइवे के आकार लेते ही यहां बड़े पैमाने पर अलग-अलग राज्यों के नाम से ढाबे स्थापित किए गए हैं, जिन पर नशा आसानी से मिल जाता है. खास बात ये है कि इस हाईवे पर सस्ते से सस्ता और महंगे से महंगा नशा आसानी से मिल रहा है. यहां के स्थानीय लोग भी इस कारोबार में शामिल हैं और देश के अलग-अलग कोनों से आने वाले अलग-अलग तरह के नशे के कारोबार को व्यवस्थित तरीके से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
हर तरह के नशे का कारोबार
देश के उत्तरी सिरे श्रीनगर से दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी को जोड़ने वाले एनएच-44 की वैसे तो कुल लंबाई 4,112 किलोमीटर है. लेकिन खास बात ये है कि इस हाईवे का 162 किलोमीटर का हिस्सा अकेले सागर जिले से गुजरता है. इस 162 किलोमीटर के हिस्से में अलग-अलग राज्यों के ढाबे और रेस्टोरेंट की भरमार हो गयी है. सागर देश के बीचोंबीच है और इस इलाके से पूरे देश का ट्रैफिक गुजरता है. भारी वाहनों के साथ यहां नशे की खेप आसानी से पहुंच जाती है.

वहीं अलग-अलग राज्यों और स्थानीय ढाबों के जरिए यहां पर नशे का कारोबार आसानी से संचालित होता है. स्थानीय ढाबा संचालक और कारोबारी जहां कच्ची और अवैध शराब के साथ, गांजे और अफीम जैसे नशे का नेटवर्क बनाए हुए हैं, तो दूसरे राज्यों के ढाबों के जरिए महंगे ड्रग्स का कारोबार भी संचालित हो रहा है. इन ढाबों के जरिए हैरोइन, मार्फिन और सिंथेटिक ड्रग्स आसानी से मिल रहा है.
ऐसा नहीं है कि नारकोटिक्स, पुलिस या आबकारी विभाग को इन कारोबार की जानकारी नहीं है, लेकिन रस्म अदायगी की कार्रवाई के अलावा इन पर आरोप है कि नशे के कारोबार में ये विभाग अनदेखी करके एक तरह से संरक्षण प्रदान कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश में नशे का जाल
एनसीबी 2024 की रिपोर्ट सितंबर 2025 में जारी हुई थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में देश भर में 5.21 लाख किलोग्राम अफीम, हेरोइन, मॉर्फिन जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए. चिंतानजक पहलु ये है कि इस कारोबार में सिंथेटिक ड्रग्स के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी गयी है. साल 2024 में देश में 11 हजार 994 किग्रा सिंथेटिक्स ड्रग्स जब्त किये गये. मौजूदा साल में मेफेड्रोन यानि एमडी की तस्करी के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक सिंथेटिक ड्रग्स एटीएस - एम्फैटेमिन-टाइप स्टिमुलेट्स (ATS) एमडीएमए, मेफेड्रोन, मेथाडोन का चलन पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है. सिंथेटिक्स ड्रग्स कैमिकल से बनाए जाते हैं, जो नेशनल हाइवे 44 के कस्बों और बड़े गांवो में अपनी पैठ बना चुके हैं. जो टैबलेट और पाउडर के रूप में आसानी से मिल रहा है.

एनएच 44 पर महिलाओं के जरिए स्मैक का जाल
नेशनल हाइवे 44 पर स्थित देवरी नगर तो स्मैक के कारोबार के लिए पूरे बुंदेलखंड में बदनाम हो गया है. जुलाई 2025 में पुलिस ने अभियान चलाकर स्मैक का नशा करने वाले और बेचने वालों पर बड़ी कार्यवाही करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया और पुलिस ने जुलूस निकालकर कारोबारियों और नशे की जद में आने वाले युवकों को संदेश देने की कोशिश की. यहां पर मोटरसाइकिल पर महिलाओं को बिठाकर नशे के कारोबारी स्मैक की होम डिलेवरी करते हैं. पीछे महिला के बैठे होने के कारण इन पर शक नहीं होता है. यहां के स्कूल कालेज इन कारोबारियों के निशाने पर हैं.
04 मार्च 2024 को देवरी थाना के बेलढाना गांव से मन्नू लोधी के कब्जे से 15.52 ग्राम स्मैक पावडर (कीमत 1 लाख 55 हजार रुपये) जब्त किया गया था. इसी गांव के प्रदीप एवं उसकी पत्नि नम्रता दुबे के कब्जे से 20.35 ग्राम स्मैक पाउडर जब्त किया गया, जिसकी बाजार में कीमत 2 लाख 30 हजार रुपये आंकी गयी थी.
देवरी के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ईटीवी भारत को बताते हैं कि "नेशनल हाइवे 44 पर देवरी, गौरझामर, महाराजपुर कस्बों के अलावा नेशनल हाइवे से कनेक्ट अन्य कस्बों और गांवों में स्मैक का कारोबार पैर पसार चुका है. पुलिस की पिछली कार्यवाही में पूछताछ में पता चला है कि यहां के स्मैक कारोबारी एनएच 44 पर नरसिंहपुर से अशोकनगर, राजगढ़ ब्यावरा से लगी राजस्थान की सीमा से स्मैक लाकर यहां पर बेंचते हैं. नशे के कारोबारी, महिलाओं की आड़ में ये कारोबार कराते हैं. महिलाओं पर किसी को आसानी से शक नहीं होता है. एक स्मैक की पुड़िया 350 रुपए में मिलती है, जिसमें गेहूं के दाने के बराबर स्मैक होती है."
नशे के कारोबारियों का खौफ
नेशनल हाईवे 44 पर पड़ने वाले गांव और कस्बों में इस कारोबार से जुड़े माफिया और ढाबा संचालकों का इतना खौफ है कि लोग इस बारे में बात करना नहीं चाहते हैं. बमोरी बीका पंचायत के सरपंच मृगेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं कि "इस समस्या को लेकर एक बार मैंने स्थानीय विधायक को ज्ञापन दे दिया था, तो यहां के ढाबा संचालक मेरे पीछे पड़ गए थे. इसलिए मैं अब इस मामले से दूर रहता हूं. वहीं, नेशनल हाईवे 44 के चितौरा टोल प्लाजा के किसान हल्ले भाई लोधी कहते हैं कि "नशे का कारोबार गांव-गांव और कस्बों तक फैल गया है. हम लोगों ने कई बार एसपी, कलेक्टर और जनसुनवाई में शिकायत की, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ है. अब हम लोग थक हार कर घर बैठ गए हैं."

जिला प्रशासन का नशे के खिलाफ थ्री लेवल अभियान
कलेक्टर प्रतिभा पाल का कहना है कि "नारकोटिक्स और नशे को लेकर हम लोग कई स्तरीय कार्यवाही कर रहे हैं. हमने तीन स्तर की कार्यवाही तय की है. पहली कार्यवाही के तहत हमें नशे का कारोबार करने वाले, जो युवा पीढ़ी को लक्ष्य बनाकर उनको नशे की गर्त में धकेल रहे हैं, उनको चिन्हित कर कार्यवाही की जा रही है. दूसरा और महत्वपूर्ण पहलु ये है कि हम ऐसे बच्चे जो सीनियर सेकेंडरी या काॅलेज में हैं, उनको नशे के खिलाफ और नशे की बुराइयों को लेकर जागरूक करने के लिए स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के साथ मिलकर रोस्टर तैयार कर जागरूकता कार्यक्रम चलाने जा रहे हैं.
उनको बताया जा रहा है कि वो दिग्भ्रमित न हों और नशे की गर्त में जाकर अपना भविष्य बर्बाद न करें. इसके साथ ही स्कूल काॅलेज के पास ऐसी गुमटियां जो नशे के कारोबार को संचालित कर रही हैं या नशे के कारोबारियों की मदद करती हैं, उनको चिन्हित करके हटाने के निर्देश स्थानीय निकाय और राजस्व विभाग को दिए गए हैं. इसके अलावा जो लोग नशे की गिरफ्तर में आ चुके हैं, उनको काउंसलिंग के जरिए मुख्य धारा से जोड़ने का काम करने के लिए हम नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने जा रहे हैं.

नशे के खिलाफ प्रशासनिक स्तर के अलावा सामाजिक स्तर पर निपटना ज्यादा जरूरी है. ऐसे बच्चे या लोग जो नशे की गिरफ्त में हैं या नशे की तरफ उनका रूझान हैं, हम उनको रोककर और टोककर नशे की जद से दूर कर सकते हैं."
इंदौर में नशे का जाल, करोड़ों की ड्रग्स जब्त
नशे का ये कारोबार सिर्फ नेशनल हाईवे पर नहीं हो रहा है. ड्रग्स की ये तस्करी मध्य प्रदेश के कई जिलों में हो रही है. रतलाम से लेकर इंदौर तक आए दिन ड्रग्स की खेप पुलिस पकड़ रही है. इसी तरह इंदौर में पुलिस ने बीते दिनों 129 ग्राम यानि 70 पुड़िया ब्राउन शुगर की जब्त की थी. जिसकी कीमत करीब 29 लाख रुपए थी. पुलिस ने पांच आरोपियों को भी पकड़ा है. इसके अलावा इंदौर क्राइम ब्रांच ने 1 किलो एमडी ड्रग्स भी बरामद की थी. जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आंकी गई.
क्या कहते हैं समाजशास्त्री
सागर यूनिवर्सिटी के समाज शास्त्र और समाज कार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष समाजशास्त्री प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत कहते हैं कि "खासकर जो युवा पीढ़ी है, उसको नशे से कैसे बचाया जाए, इसके लिए पूरे समाज को जागरूक होने की बड़ी आवश्यकता है. जब हम नेशनल हाइवे की बात करते हैं, तो यहां से नशे के कारोबार में लिप्त लोग जब यहां से गुजरते हैं, तो यहां के लोगों से संपर्क बढ़ता है. तो ऐसे में नशे की आदत पड़ जाती है. ऐसे में समाज को चाहिए कि खासकर स्कूल और कालेज जाने वाले बच्चों को ऐसी गतिविधियों से दूर रखे कि वो नशे के संपर्क में न आ पाएं.
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विद्यार्थियों और युवाओं में इस बात की जागरूकता फैलाई जाए कि नशा न केवल शरीर को बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाता है. दूसरी बात ये है कि हमें ये समझने की कोशिश करना चाहिए कि कौन किसको किस रूप में कहां लेकर जा रहा है. ये भी जरूरी है कि हम आज के दौर में ग्लैमर की तरफ न भागें. मीडिया का उपयोग जागरूकता के लिए किया जाए.

कभी-कभी लोग विज्ञापन और कुछ लोगों की परिस्थिति देखकर अपने समूह में अपने आप को बेहतर बताने के लिए नशे का उपयोग करके अपने आप को मजबूर कर लेते हैं. इन परिस्थितियों से बचाव की जरूरत है. सबसे बड़ी बात ये है कि अगर हम युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करें, कैरियर के प्रति रूचि और लक्ष्य केंद्रित कार्य के प्रति समर्पण पैदा कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से युवाओं को नशे से बचाया जा सकता है."

